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राजीव भवन में हर्षोल्लाष के साथ मनाई गई गाँधी और शास्त्री की जयंती

राजीव भवन में हर्षोल्लाष के साथ मनाई गई गाँधी और शास्त्री की जयंती

जगदलपुर।  राजीव भवन में अहिंसा के पुजारी व राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की जयंती सादगी व हर्षोल्लाष के साथ मनाई गई कांग्रेसियो ने सर्वप्रथम उनकी छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देकर गाँधी/शास्त्री को याद किया।

 जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव शर्मा ने क्रांतिकारी उद्बोधन देते उनकी जीवनी पर प्रकाश डाला और कहा कि आज ही के दिन दो महान युग परुष का जन्म हुआ जिन्हें बापू और शास्त्री के नाम से जाना जाता है इन महान पुरुषों ने अंग्रेजी ताकतों के खिलाफ सत्य औऱ अहिंसा को हथियार बनाकर कर देश छोड़ने पर मजबूर किया अवज्ञा आंदोलन,दांडी यात्रा,असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह जैसे प्रमुख चरणबद्ध आंदोलन करके आज़ाद भारत की नीव रखी, गाँधी जी का जन्म गुजरात के पोरबंदर क्षेत्र में हुआ उनके पिता करम चन्द गाँधी पोरबंदर के दीवान थे उनके जीवन मे उनकी माता का खास प्रभाव था उनका विवाह 13 वर्ष की आयु में ही हो गया था नवम्बर 1887 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और लन्दन गये वहां से बेरिस्टर बनकर लौटे श्री शर्मा ने बताया कि 1894 में दक्षिण अफ्रीका में अन्याय के खिलाफ अवज्ञा आंदोलन चलाया और पूर्ण होने तक वहीं रहे सन 1916 में गाँधी जी अफ्रीका से भारत लौटे फिर देश की आज़ादी के लिए कदम उठाये 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की गांधी एक महान लीडर थे सादा जीवन उच्च विचार को मानने वाले व्यक्तियों में से एक थे उनके इसी स्वभाव के कारण लोग उन्हें महात्मा के नाम से सम्बोधित करते थे वाराणसी के छोटे से गांव में एक शिक्षक परिवार में लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म हुआ वह देश के दूसरे प्रधानमंत्री थे भारत को आजादी दिलाने और भारत के भविष्य का निर्माण करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी काशी विद्यापीठ में यह शामिल हुए जहां उनका महानुभाव और बुद्धिजीवियों से संपर्क बड़ा और यह देश को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी दिलाने के लिए गांधी के साथ हो चले अपने जीवन काल में इन्होंने भी कई उतार-चढ़ाव का अनुभव प्राप्त किया तथा जय जवान जय किसान का नारा देकर उन्होंने गांधी की ताकत बनकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर किया तथा भारत के सपनों को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी यह देश हमेशा युग युग से उनका ऋणी रहेगा।

 महापौर सफीरा साहू, सभापति कविता साहू ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते बताया कि गांधी/शास्त्री उस युग के महान नेता थे जिन्होंने देश की आज़ादी में अहम भूमिका अदा की गाँधी प्रजातन्त्र के भारी समर्थक थे सत्य अहिंसा के बल पर भारत को आज़ाद कराया उन्होंने समाज मे फैले छुआछुत की भावना को दूर करने के लिए बहुत प्रयास किये उन्होंने पिछड़ी जातियों को ईश्वर के नाम पर हरि-जन नाम दिया,जीवन पर्यन्त तक उनके उत्थान के लिए प्रयासरत रहे गांधी जी का स्वराज्य गांव में बसता था और वे ग्रामीण उद्योगों की दुर्दशा से चिंतित थे खादी को बढ़ावा देना तथा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार उनके जीवन के आदर्श थे गांधी जी का कहना था कि खादी का मूल उद्देश्य प्रत्येक गांव को भोजन व कपड़े के विषय मे स्वावलम्बी बनाना है एक ऐसे समय जब पूरा संसार बुनियादी वस्तुओं की खरीद के लिए संघर्ष कर रहा है तब गांधी जी का ग्राम स्वराज एवं स्वदेशी का विचार ही हमारा सही मार्गदर्शन कर सकता है भारत जैसे विकाशशील देश की आगे की नीति यही होनी चाहिये कि वह गांधी जी के ग्राम स्वराज और स्वदेशी की अवधारणा का अनुसरण करें क्योंकि भारत के गांव सामाजिक संगठन की एक महत्वपूर्ण इकाई है।

जिला महामन्त्री अनवर खान,राजकुमार झा,अपर्णा बाजपई सहित अन्य वक्ताओं ने भी बापू/शास्त्री की जीवनी पर प्रकाश डाला और कहा की इन महापुरषों ने देश की एकता अखण्डता को एक सूत्र में पिरोने का काम किया बापू शास्त्री को श्रद्धांजलि देकर उनके पद चिन्हों पर चलने का आव्हान किया।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ कांग्रेसी सतपाल शर्मा ने किया और कहा कि स्वतन्त्रता के उन महापुरूषों के संदेशों को कांग्रेसजन तक पहुंचाते इसका स्मरण करने की बात कही और उनके बलिदान व योगदानों को बताते उनके जीवन का विस्तार से परिचय कराया,कार्यक्रम के अंत में 2 मिनट का मौन धारण कर स्वतन्त्रता के महापुरुषों को श्रद्धान्जलि दी।

कार्यक्रम में प्रदेश/जिला/ब्लॉक/जोन/सेक्टर/बूथ/अनुभाग के पदाधिकारीगण सेवादल, युवक कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई सहित अन्य मोर्चा/प्रकोष्ठ/विभाग के पदाधिकारी सोशल मीडिया के प्रशिक्षित/सहकारिता क्षेत्र के  सदस्यों/पार्षद/मनोनीत पार्षद/त्रि-स्तरीय पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ कांग्रेसी व कार्यकर्तागण उपस्थित थे।