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सीमेंट उत्पादन इकाइयों की खरीदी से 2700 रुपए टन हुआ धान भूंसा

सीमेंट उत्पादन इकाइयों की खरीदी से 2700 रुपए टन हुआ धान भूंसा

राजकुमार मल

बलौदा बाजार- इसे कोयला की ही मेहरबानी कहिए कि सालों बाद धान भूंसा पहली बार रिकॉर्ड 2700 रुपए टन की ऊंचाई पर पहुंच चुका है। इसमें बढ़त के आसार इसलिए भी बने हुए हैं क्योंकि जिले के उद्योगों की मांग निकली हुई है। पुराने उपभोक्ता ईंट भट्ठों की डिमांड अपनी गति पर बनी हुई है। लिहाजा भाव टूटने की संभावना तो फिलहाल जरा भी नहीं है।


देश स्तर पर कोयला संकट का हाहाकार मचा हुआ है। इससे जिले के उद्योग भी अछूते नहीं हैं। हालांकि कोयला जैसा मजबूत तो नहीं लेकिन उद्योगों के पहिए गतिमान बनाए रखने के लिए धान भूंसा बेहतर विकल्प बन चुका है। उद्योगों के अलावा ईंट भट्टों की मांग भी अपनी जगह पर बनी हुई है। इसलिए आगत दिनों में धान भूंसा की कीमत में मंदी जैसी कोई संभावना नहीं है।

इनकी तो निकल पड़ी

कोयला संकट के बीच गति पकड़ रहे धान भूंसा के कमीशन एजेंटों की निकल पड़ी है। प्रति टन उपलब्धता के लिए खरीददार और बिकवाल के बीच सेतु का काम करने वाला, यह क्षेत्र पहली बार जी-जान लगाकर काम करता नजर आ रहा है। यह भी शायद पहली बार है, जब इस काम के लिए अच्छे पैसे मिल रहे हैं।

इनकी मांग जोरदार

जिले में सीमेंट उत्पादन इकाईयों की संख्या अच्छी-खासी  है। सबके पास अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए अपने पावर प्लांट भी हैं। मांग की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोयला संकट के बीच यह इकाइयां धान भूंसा की मांग कर रहीं हैं। इसके अलावा परंपरागत खरीदी क्षेत्र ईट भट्ठा संचालकों की मांग अपनी जगह पूर्ववत बनी हुई है।

पहली बार 2700 रुपए टन



जिले में इस समय 70 राईस मिलें संचालन में हैं। 230 टन प्रति घंटा चावल उत्पादन वाली इन राइस मिलों से 600 टन धान भूंसा निकल रहा है। अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि इसमें से लगभग 50 फ़ीसदी मात्रा की खरीदी, यही उद्योग कर रहे हैं। दो तरफा मांग के बाद भाव, इस समय 2700 टन पर मजबूती के साथ जमा हुआ है। मालूम हो कि इसके पहले तक धान भूंसा की कीमत 1500 रुपए टन थी।

मंदी की संभावना नहीं

सीमेंट प्लांटों की डिमांड भरपूर होने से धान भूंसा की कीमत तेज बनी हुई है। मंदी के आसार फिलहाल नहीं है।

- देवेंद्र भृगु, अध्यक्ष, जिला राइस मिल एसोसिएशन, बलौदा बाजार