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क्या राजनीति का अर्थ केवल चालाकी है

क्या राजनीति का अर्थ केवल चालाकी है

ध्रुव शुक्ल

विदेशियों के पग धरने से पहले भारत के अतीत में राज्य के लिए नीति का उपदेश किया जाता रहा है। जैसे वेदव्यास रचित 'महाभारत' इतिहास में अंधे धृतराष्ट्र के प्रति विदुर नीति कही गयी है। यानी राज कोई भी करे उसके लिए नीति के प्रति समर्पित होकर लोक जीवन की चिंता करना चाहिए।

आधुनिक समय में , खासकर ब्रिटिश राज के कुसंग से हमारे देश के नेताओं ने अंग्रेजी भाषा के Politic शब्द का वह अर्थ ग्रहण किया कि Politician चालाक यानी Cunning होता है। नेताओं ने अपने अतीत से सीखकर वह अर्थ ग्रहण नहीं किया कि राजकर्ताओं और उनके प्रतिपक्षियों को लोक हित में नीति कुशल होना चाहिए।

आज भारत की सरकार और प्रतिपक्ष के बीच राजनीति करने का अर्थ मात्र एक-दूसरे की चालाकी माना जाता है। सरकार जब अपना विरोध नहीं सह पाती तो यही कहती रहती है कि विपक्ष राजनीति यानी चालाकी कर रहा है।

तब सरकार से यह सवाल पूछना ही चाहिए कि वह अपने प्रतिपक्ष के प्रति राजनीति शब्द का इस्तेमाल किस अर्थ में कर रही है ? और खुद सरकार जो राज-नीति कर रही है वह लोकहित में नीतिकुशल राज-नीति है या चालाकी से भरी कोई अनीति है।

हम भारत के लोगों को भारत के चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड लगभग ढाई हजार राजनीतिक दलों से यह निवेदन करना चाहिए कि वे आपस में मिल-बैठकर पहले राजनीति शब्द का अर्थ तय कर लें। फिर जनता के बीच आकर राजनीति करें ताकि जनता यह तो समझ सके कि वे लोगों के बीच आकर नीति की बात कर रहें है या सरकार और विपक्ष दोनों ही चालाक हैं।

अगर भारत के राजनीतिक दलों की राज-नीति मात्र चालाकी है तो हम किसी को भी चुनें,हमारा क्या भला होना है?