कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः छूट गया है बेघर देश

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की कविताः छूट गया है बेघर देश

कोरोना श्रृंखला में सुप्रसिद्ध कवि ध्रुव शुक्ल की 13 कविताओं का प्रकाशन आज की जनधारा में हो चुका है इसी श्रृंखला में  आज की कविता है - छूट गया है बेघर देश 


हम उस देश के वासी हैं

जिसमें सब एक-दूसरे पर दोष लगाकर

अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं

फिर दोष लगाने वाले ही

आपस में मिल जाते हैं

आधे दाँयें हो जाते हैं

आधे बाँयें हो जाते हैं

कुछ बीच में कीच मचाते हैं

मौका पाकर अपने हित में

मिलकर सरकार बनाते हैं

इनकी अपनी-अपनी जनता होती है

जो अपने हित में हँसती-रोती है


परहित में स्वाधीन नहीं जो

बस अपने हित में पराधीन

उस जनता के घर से दूर

सूनी सड़कों पर छूट गया है बेघर देश 

पीछे  मौत पड़ी है उसके

जो बेइरादा नहीं लगती