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आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग में फर्जी नियुक्ति मामला, उच्च स्तरीय जाँच दल की रिपोर्ट में आईएएस अवार्ड शारदा वर्मा सहित सात अधिकारी दोषी साबित, फर्जीवाड़ा कर नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों पर अधिकारी मेहरबान

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग में फर्जी नियुक्ति मामला,  उच्च स्तरीय जाँच दल की रिपोर्ट में आईएएस अवार्ड शारदा वर्मा सहित सात अधिकारी दोषी साबित, फर्जीवाड़ा कर नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों पर अधिकारी मेहरबान


आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग में फर्जी नियुक्ति मामला

उच्च स्तरीय जाँच दल की रिपोर्ट में आईएएस अवार्ड शारदा वर्मा सहित सात अधिकारी दोषी साबित
फर्जीवाड़ा कर नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों पर अधिकारी मेहरबान

चमन प्रकाश केयर
रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग में भ्रष्टाचार का खेल इस कदर हावी है कि वर्ष 2012 में हुई स्टेनो टायपिस्ट और सहायक प्रोग्रामर की सीधी भर्ती परीक्षा में अनियमितता संबंधी जाँच रिपोर्ट वर्ष 2014 में प्रस्तुत होने के बाद भी दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। प्रशासनिक अमला कार्यवाही करना तो छोड़ संरक्षण देने में लिप्त है इससे साफ़ ज़ाहिर है कि छह वर्ष बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों से मिलीभगत कर बेरोजगारों का हक़ मार रहे हैं। 
               शारदा वर्मा आईएएस                                         
उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति की गई थी गठित
पूर्व में भी हमने इस ख़बर को अपने पिछले अंक में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी अंजान बन बैठे हुए हैं। जाँच दल की जांच प्रतिवेदन रिपोर्ट आयुक्त शम्मी आबिदी को नहीं मिलने पर हमारे संवाददाता के पास उपलब्ध जांच रिपोर्ट की एक कापी दी गई। दरअसल, अब्दुल्ला बेग ने वर्ष 2012 में हुई भर्ती की शिकायत वर्ष 2014 में कार्यालय आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग में की थी। शिकायत के आधार पर विभाग ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की थी  जिसमें तात्कालिक आयुक्त एन. के. खाखा को अध्यक्ष, तात्कालिक संयुक्त सचिव डीडी कुंजाम और संयुक्त संचालक वित्त के. एल. रवि को सदस्य, बनाया गया था। 

जाँच कमेटी की रिपोर्ट में एक बड़ा भर्ती घोटाला उजागर हुआ था जिसकी रिपोर्ट में विभाग के तत्कालीन आईएएस एम एस परस्ते, तत्कालीन अपर संचालक प्रमोटी आईएस शारदा वर्मा, वर्तमान में उच्च शिक्षा विभाग की संचालक एवं वित्त विभाग में पदस्थ हैं, तत्कालीन अपर संचालक एल के गुप्ता, तीन उपायुक्त दीप्ती बैनर्जी, डीएस ध्रुव, आर.एस.सिंह एवं सहायक ग्रेड एक के.के.तिवारी को दोषी पाते हुए इन अधिकारियों के खिलाफ़ कार्यवाही करने की अनुशंसा की जा चुकी है । बावजूद इसके छह वर्ष बीत जाने के बाद भी विभाग के जिम्मेदार अधिकारीयों ने कार्यवाही करना छोड़ कुंभकरणीय निद्रा में सोये हुए हैं। 
शम्मी आबिदी आईएएस आयुक्त  
दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों को बचाने में जुटा है: विभागीय अमला

गौर करने वाली बात यह भी है कि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी वर्तमान में जिम्मेदार अधिकारियों को इस बारे में कोई जानकारी ही नही है। इससे साफ जाहिर हो रहा हैं कि दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ़ हुई जाँच की फाइल को दबाकर रखा गया है।  विभागीय जानकारी के मुताबिक कई दोषी अधिकारी रिटायर्ड हो गये हैं और कुछ की मृत्यु हो गई है, लेकिन कई ऐसे दोषी अधिकारी -कर्मचारी अन्य विभागों में आज भी मजे से नौकरी की रोटी सेंक रहे हैं। वहीं  फर्जी तरीके से चयनित कर्मचारी आज भी विभाग में कुर्सी तोड़ रहे हैं। 

चहेते अपात्र को पात्र करने फर्जी तरीके से कई बार जारी किया विज्ञापन 
उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि तृतीय वर्ग और अलिपिकीय वर्गीय भर्ती नियम 2011 में सहायक प्रोग्रामर पद पर नियुक्ति के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के साथ या समकक्ष डिग्री जोड़कर विज्ञापन जारी किया गया। ताकि अपात्र व्यक्ति चयन प्रक्रिया में भाग ले सकें जबकि सहायक प्रोग्रामर के रूप में चयनित आशीष वाढेर एवं दिनेश कुमार ध्रुव को भर्ती नियम में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं विज्ञापन में जारी शिक्षण योग्यता से भी हटकर कंप्यूटर में स्नातकोत्तर डिग्री के अंक दिए गए हैं । इन दोनों के द्वारा पीजीडीसीए या समकक्ष डिग्री का कोई प्रमाण पत्र आवेदन के साथ संलग्न ही नहीं किया गया। इसी तरह आशीष वाढेर और दिनेश कुमार ध्रुव के पास भी निर्धारित कंप्यूटर की योग्यता नहीं होने के बावजूद चयनित किया गया है। जांच पत्र में कहा गया है कि आशीष वाढेर एवं दिनेश कुमार ध्रुव को गलत तरीके से विज्ञापन के विरुद्ध कंप्यूटर में स्नातकोत्तर डिग्री के अंक देकर चयन कर लिया गया। 
जांच पत्र में कहा गया है कि आशीष वाढेर एवं दिनेश कुमार ध्रुव को गलत तरीके से विज्ञापन के विरुद्ध कंप्यूटर में स्नातकोत्तर डिग्री के अंक देकर चयन किया गया है। जाँच टीम ने तत्कालीन चयन समिति में सदस्य अपर संचालक शारदा वर्मा थी जो अभी वर्तमान में संयुक्त सचिव वित्त और आयुक्त उच्च शिक्षा के पद पर कार्यरत हैं। वहीं तत्कालीन आयुक्त एमएस परस्ते, अपर संचालक एलके गुप्ता, उपायुक्त आर एस सिंह सदस्य चयन समिति, उपायुक्त डीएस ध्रुव सदस्य चयन समिति, उपायुक्त दीप्ति बनर्जी सदस्य चयन समिति को जिम्मेदार ठहराया जा चुका है। 

वर्सन,
उच्च स्तरीय जाँच का मामला मेरे विभाग में आने से पहले का है। इसकी जानकारी नहीं थी चूँकि इस नियुक्ति में अनियमितता की जाँच रिपोर्ट पुराने हो गये हैं। आपने जाँच प्रतिवेदन की कापी मुझे दी है इसको मैं देखवा लेती हूँ। 
शम्मी आबिदी
आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विभाग छत्तीसगढ़