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अशोका अस्पताल को पुलिस ने भेजा नोटिस, बयान सहित कागजात उपलब्ध कराने को कहा, हास्पिटल पर लगा है गलत इलाज कर गर्भपात करवाने का आरोप

अशोका अस्पताल को पुलिस ने भेजा नोटिस, बयान सहित कागजात उपलब्ध कराने को कहा, हास्पिटल पर लगा है गलत इलाज कर गर्भपात करवाने का आरोप

जनधारा समाचार
रायपुर. राजधानी के पंडरी में स्थित अशोका सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है. लिखित शिकायत पर कार्यवाही करते हुए सिविल लाइंस थाना ने अस्पताल को नोटिस भेजकर कागजात और जवाब मांगा है लेकिन एक सप्ताह के बाद भी अस्पताल प्रबंधन पीड़ित पक्ष के आरोपों के खिलाफ कागजात और प्रमाण नही दे सका.

दूसरी ओर मामले की जांच कर रहे पुलिस उपनिरीक्षक मनीष बाजपेयी ने सभी पक्षों से उनका बयान दर्ज किया है. इस खबर को सबसे पहले उठाने वाले पत्रकार से भी प्रमाण और कागजात मांगे गए हैं. बाजपेयी का कहना है कि सभी संबंधित पक्षों से, पीड़ितों से तथा अस्पताल प्रबंधन का जवाब आने के बाद ही एफआईआर दर्ज करने के मामले में कुछ फैसला होगा. इसके पहले पुलिस ने पीड़ित दम्पत्ति का मेडिकल परीक्षण कराया है तथा रिपोर्ट मांगी है.

जानते चलें कि अम्बिकापुर के निवासी पीड़ित दंपत्ति मरीज रेखा सोनी, 30 वर्ष और उसके पति संजय सोनी ने आरोप लगाया है कि पंडरी स्थित अशोका सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल के संचालक डॉ.ए.सुरेशकुमार ने संतान दिलाने के नाम पर उनसे लगभग चार लाख रूपये वसूले और दो लाख रूपये अन्य खर्च भी कराया. पहली बार जब संतान प्राप्ति में असफलता हाथ लगी तो उन्होंने इसे ईश्वर की सदिच्छा मानते हुए चुप हो गए लेकिन दूसरी बार जब गर्भ ठहरा तो मालूम चला कि तीन बच्चे पेट में हैं जिनका छह महीने तक देखभाल होता रहा लेकिन इसी बीच गलत दवाईयां, सलाह और डॉक्टर बदलने के चलते तीनों बच्चों को नुकसान हुआ और नवजात बचाए ना जा सके. डॉक्टर ने एक—एक करके गर्भ गिरवा दिया.


 पीड़ित मरीज दम्पत्ति

पीड़ित के मुताबिक हमें उम्मीद थी कि हम तीन बच्चों के माता—पिता बनने जा रहे हैं लेकिन तीन महीने गुजरते ही पत्नी की तबियत खराब हुई. डॉक्टर ने मेडिकल परीक्षण किया तो कहा कि तीन में से एक बच्चा कमजोर है इसलिए इसका फेटल रिडक्शन यानि भ्रूण की कमी को ठीक करना पड़ेगा. उसके बाद हमें नागपुर भेज दिया गया जहां पर डॉक्टर नीलम छाजेड़ ने एक इंजेक्शन लगाकर हमें रवाना कर दिया. पीड़ित का आरोप है कि इस प्रक्रिया से एक बच्चा पेट में ही मर गया था! खैर..नागपुर से लौटने के बाद भी पत्नी की तबियत ठीक नही हुई बल्कि बिगड़ती चली गई लेकिन डॉक्टर सब ठीक होने का ढांढ़स बंधाते रहे. इसी बीच हमें अशोका अस्पताल में भर्ती कर लिया गया.

पहले एक बच्चे की मौत, फिर दोनों बच्चे का अबार्शन कराया गया!
पीड़िता रेखा सोनी ने बताया कि चार पांच दिन बाद मेरी तबियत फिर से खराब हो गई. मेडिकल चेकअप हुआ तो डॉक्टर ने कहा कि अब दोनों बच्चों को मारना पड़ेगा. या तो पत्नी बचेगी या बच्चे. इतना सुनते ही हमारे पैरों से जमीन खिसक गई. अंतत: हमने पत्नी को बचाने का फैसला किया. अस्पताल की बड़ी लापरवाही यह रही कि एडमिशन कंसेंट फार्म में दंपत्ति के सिगनेचर तक नही लिए गए. पीड़ित दंपत्ति का आरोप है कि नागपुर की डॉक्टर और अशोक अस्पताल की लापरवाही से हमने तीनों बच्चों को खो दिया. उसके बाद हमसे एक लाख रूपये और मांगे गए. इस इलाज के लिए हमने अपना घर और खेत बेचकर इलाज कराया. लगभग छह लाख रूपये खर्च कर दिए लेकिन संतान ना मिल सकी.

इलाज की प्रक्रिया पर सवाल
पीड़ित सोनी दंपत्ति ने अशोका सुपरस्पेशलिटी हास्पिटल के डॉक्टर ए.सुरेशकुमार, उनकी पत्नी स्मिता अग्रवाल तथा डॉक्टर बेटी पर लापरवाहीपूर्वक इलाज करने का आरोप लगाया है जिससे उनके तीनों बच्चे बचाए ना जा सके. विशेष तौर पर तीन बच्चों का गर्भ ठहरने के बाद गलत दवाईयां देने और गलत इलाज की प्रक्रिया के कारण यह स्थिति बनी. दूसरी ओर हमने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि इलाज में कोई लापरवाही नही बरती गई और ना ही कोई मारपीट की गई. उन्होंने पीड़ित पर ही दुरव्यवहार करने का आरोप लगाया. अस्पताल प्रबंधन ने आरोपी के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी.