जागरूक हुए माड़िया, मुन्ने कैय नोरीयना अचोटे गाटो तीन्ना यानि पहले धोते हाथ फिर खाते भात

जागरूक हुए माड़िया, मुन्ने कैय नोरीयना अचोटे गाटो तीन्ना यानि पहले धोते हाथ फिर खाते भात

नारायणपुर, 12 अप्रैल। विश्व के साथ पूरा भारत देश भी नोवल कोराना (कोविड-19) वायरस संक्रमण से लड़ रहा है। उसके रोकथाम एवं नियंत्रण व बचाव के लिए केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा सभी बेहतर उपाय किए जा रहे है। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र के नाम पहले संबोधन में जनता कर्फ्यू का फिर लॉकडाउन का एलान किया गया है। लॉकडाउन की मियाद नहीं बढ़ाई गई तो यह 14 अप्रैल तक निर्धारित है। नारायणपुर जिले के धूर नक्सल प्रभावित ओरछा विकासखंड के अतिसंवेदनशील एवं नक्सल हिंसा ग्रस्त इलाकों के अबूझमाड़ियां (माड़िया) जनजाति के लोग कोराना से बचाव के प्रति बेहद जागरूक सजग और सर्तक हो गए है। 

      माड़िया लोगों से जब कोराना से बचाव के संबंध सावधानियां बरतने की बात पूछी जाती है तो वह तपाक से अपनी भाशा में कहते है कि ‘‘मुन्ने कैय नोरीयना अचोटे गाटो तीन्ना‘‘ यानि कि (‘‘पहले  धोते हाथ फिर खाते भात’’)  कोराना से बचाव के प्रति इनकी यह जगरूता अब धीरे-धीरे भीतर के इलाकों के गांव में भी पहुंचने लगी है। अबूझमाड़ का कोई भी इलाका चाहें वह थुलथुली सेक्टर का रेगावाड़ा हो हतलनार, हादावाड़ा, या पांगुड़ या किसी भी ऐसे अन्दरूनी गांव है जो चारों ओर से पहाड़ों और घने जंगलों से घिरे है। जहां सूरज की किरण भी जमीन से मिलने पेड़ों से इजाजत मांगती दिखायी देती है । आदमी भी जाने से पहले 10 बार सोचता है। लेकिन यहां के अबूझमाड़िया कोरोना या अन्य गंभीर बीमारी के प्रति काफी जागरूक हो गये है। वे स्वच्छता पर भी घ्यान दे रहे है। इन्हें जागरूक करने का पूरा श्रेय स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले मितानिनों, आरएचओ का तो है ही, उनके साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, के साथ ही शाला आश्रमों के शिक्षक शिक्षकाओं का भी इसमें योगदान है।