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ऑयल क्वालिटी कोढ़ा 36000 रुपए टन... पाम ऑयल आयात बंद होने से मांग राईस ब्रान ऑयल में

ऑयल क्वालिटी कोढ़ा 36000 रुपए टन... पाम ऑयल आयात बंद होने से मांग राईस ब्रान ऑयल में

राजकुमार मल

भाटापारा- पाम ऑयल का आयात बंद होने के बाद ऑयल क्वालिटी का कोढ़ा गर्म होने लगा है। 2 माह में  दोगुना महंगा हो चुका कोढ़ा, राईस ब्रान ऑयल इंडस्ट्रीज की जबरदस्त खरीदी के दबाव के बीच मांग में बना हुआ है। यह इसलिए क्योंकि प्रदेश ही नहीं, उड़ीसा से भी मांग निकल रही है। इसलिए तेजी के आसार बने हुए हैं।


रूस-यूक्रेन के बीच चल रही जंग से पहला असर सूर्यमुखी के तेल आयात पर पड़ा। यह सीधे पाम ऑयल की बढ़ती मांग के रूप में दिखाई दिया। कतिपय विरोध के बाद अब पाम ऑयल की वैश्विक आपूर्ति करने वाले इंडोनेशिया ने भारत को निर्यात पर बंदिश लगा दिया है। इस गतिरोध के बाद अब खाद्य तेल की जरूरतों का दबाव राईस ब्रान ऑयल पर पड़ने लगा है ।इसे राईस मिलों से मिलने वाले ऑयल क्वालिटी के कोढ़े की बढ़ती कीमत के रूप में देखा जा रहा है। जहां कीमत के नए आंकड़े, रोज बढ़ते क्रम के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

निर्यात पर प्रतिबंध

पाम ऑयल की वैश्विक आपूर्ति के सबसे बड़े निर्यातक देश इंडोनेशिया से भारत को पाम ऑयल का निर्यात बंद है। इससे घरेलू तेल बाजार संकट में आ चुका है। इसके पहले सूर्यमुखी तेल की आपूर्ति बंद हो चुकी है। ताजा संकट से निपटने के लिए राईस ब्रान ऑयल, आधार तो है लेकिन घरेलू उपलब्धता बेहद कमजोर है। इसलिए मांग का दबाव ऑयल क्वालिटी के कोढ़ा पर देखा जा रहा है।

तेजी की आंच यहां भी

जिले में चल रही 70 राइस मिलों से इस समय ऑयल क्वालिटी कोढ़ा की प्रतिदिन उपलब्धता लगभग 150 से 200 टन के आसपास बताई जा रही है। इसकी मात्रा, कभी भी कम तब हो जाती है, जब कतिपय कारणों से राईस मिल संचालन में नहीं होती। मांग का दबाव इतना अधिक है कि ऑयल क्वालिटी का जो कोढ़ा, माह भर पहले तक 17000 से 19000 रुपए टन था वह आज 36800 रुपए टन के आसपास पहुंच चुका है।

यहां से निकल रही मांग



अपने प्रदेश में राईस ब्रान ऑयल उत्पादन करने वाली ईकाइयां तिल्दा, नेवरा, रायपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और बिलासपुर में संचालित हो रही है। इसके अलावा पड़ोसी राज्य उड़ीसा में भी ऐसी इकाइयां संचालन में है, जिनकी मांग छत्तीसगढ़ की राईस मिलों से की जा रही है। लिहाजा तेजी के संकेत बराबर बने हुए हैं।

चौतरफा मांग से तेजी

पाम ऑयल के लिए आयात के रास्ते बंद हैं। इसलिए मांग का दबाव राईस ब्रान ऑयल पर बना हुआ है। इसी वजह से ऑयल क्वालिटी का कोढ़ा मांग में है। तेजी की प्रमुख वजह यही स्थितियां हैं।

- देवेंद्र भृगु, अध्यक्ष, जिला राईस मिल एसोसिएशन, बलौदा बाजार ,भाटापारा