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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - सरकारी नौकरियों के प्रति बढ़ता क्रेज

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - सरकारी नौकरियों के प्रति बढ़ता क्रेज

-सुभाष मिश्र

पूरे देश में सरकारी मशीनरी, सरकारी व्यवस्थाओं को लाख कोसे जाने के बाद भी देश में युवाओं का क्रेज सरकारी नौकरी के प्रति सर्वाधिक बना हुआ है। देश में क्रेंद्रीय सेवाओं में भर्ती के लिए होने वाली यूपीएससी की परीक्षा हो या राज्यों में होने वाली पीएससी की परीक्षा, सभी परीक्षाओं में हर साल लाखों प्रतिभागी भाग लेते हैं। प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होने के लिए देशभर में सैकड़ों कोचिंग इंस्ट्रीट्यूट है, जहां पर कोचिंग लेने वालों की भीड़ रहती है। अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के परिणाम घोषित हुए है। इसके परीक्षा परिणाम के बाद 242 पदों के लिए चयन सूची जारी की गई है। प्रारंभिक परीक्षा में एक लाख लोग उपस्थित हुए। इसी तरह केंद्रीय सेवाओं के लिए होने वाली संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में दस लाख लोगों ने भाग लिया और अंतिम चयन सूची के अनुसार 836 लोग चयनित हुए। इस साल अगले महिने यूपीएससी की परीक्षा होनी है ।

कोरोना काल के दौरान बेरोजारी के प्रतिशत में काफी इजाफा हुआ। एक अनुभव के अनुसार दो करोड़ लोगों की नौकरी गई। प्रायवेट सेक्टर में अधिकांश लोगों की सैलरी में भी कटौती हुई, वहीं सरकारी तंत्र के लोग सभी मामलों में सुरक्षित रहे। सरकार में बहुत सारे लोगो का सूत्र वाक्य है च्च्बने रहो पगला काम करेगा अगला। बहुत सारे सरकारी दफ्तर संविदा या आऊट सोर्सिंग वालो के भरोसे चल रहे है। सरकारी नौकरी के लोग सुरक्षित ससुराल समझकर दामाद वाला आचरण करते हैं। जिस काम के लिए नियुक्त होते हैं उसी काम को करने या उलझाने का पैसा लेते हैं। इस सिस्टम के अभ्यस्त हो चुके लोगों को नजराना और शुकराना देने में कोई गुरेज नहीं होता वे सब जबराना से डरते हैं।

पिछले एक दशक पहले से बड़े पैकेज और अन्य पॉकेट मनी के चक्कर में युवाओं ने प्रायवेट सेक्टर और विदेशों की ओर रूख किया। लोगों को डॉलर, पौंड और यूरो में पैसा चहिए था, किन्तु कोरोना से उपजी विश्व व्यापी मंदी और आवाजाही पर रोक ने इस समीकरण और क्रेज को कम कर दिया। कम खाओ बनारस में रहो कहावत को अमल में लाकर लोगों ने वर्कफॉर्म होम के साथ-साथ अपने घर में ही रोजी-रोटी तलाशना शुरू कर दिया।

वर्तमान में हमारे देश में कुल वैसे भी सरकारी नौकरियां की संख्या आबादी की तुलना में बहुत कम है। केंद्र सरकार मोनीटाईजेशन के जरिए बहुत से सरकारी उपक्रमों को प्रायवेट सेक्टर को सौंप रही है। किसी भी सरकारी संस्थान का निजीकरण होने पर सबसे पहले नौकरियों पर गाज गिरती है। निजी क्षेत्र कम इन्वेस्टमेंट और कम खर्च में ज्यादा मुनाफा कमाना चाहती है। केंद्रीय सेवाओं के लिए होने वाली यूपीएससी की परीक्षा में हर साल भर्तीयों की संख्या कम होती जा रही है। हर साल इस परीक्षा के माध्यम से 836 से 800 से 900 लोग ही भर्ती हो पाते हैं।

छत्तीसगढ़ में कहावत है सौ झूठ हजार लबारी ऐसे चले काम सरकारी। सरकारी कामकाज और संस्थानों में कितनी ही लेटलतीफी हो, भ्रष्टाचार हो, भाई-भतीजावाद हो इसके बावजूद अभी भी लोगों के लिए सरकारी संस्थान ही अंतिम विकल्प है। चाहे बात स्वास्थ सुविधाओं से जुड़ी हो या शिक्षा व्यवस्था से या फिर परिवहन से जुड़ी हो, बीमा से जुड़ी हो सभी जगह सरकारी सुविधाए लचर होने के बाद भी आम आदमी के लिए सुलभ है। प्रायवेट सेक्टर में बिना पैसे के कुछ भी संभव नहीं है। प्राइवेट सेक्टर में हर तरह की सेवाओं लिए जो राशि वसूली जाती है वह सामान्य आदमी के बजट से बाहर होती है।

सरकारी नौकरियों के प्रति लड़कियों का भी रूझान बढ़ा है। वे हर बार यह सिद्ध भी कर रही है कि वे किसी भी क्षेत्र में लड़कों से कम नहीं है। इस बार टॉप टेन मेरिट लिस्ट में 7 लड़कियां शामिल है। टॉपर नीरनिधि के अलावा, स्मृति चंद्राकर, सोनल डैविड, गगन शर्मा, रूचि शार्दुल, वर्षा बंसल, हर्ष लता शर्मा, अश्री मिश्रा, आकाश शुक्ला, मधुलिका डिक्सेना ने टॉप में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है। इस 2019 की मुख्य परीक्षा 15,16,17 और 18 मार्च को ली गई थी। इसके बाद 732 लोगों को इंटरव्यू के लिए चुना गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर जहां बीजेपी की ओर से देशभर में आयोजन किया गया, वहीं यूथ कांग्रेस इसे बेरोजगारी दिवस के रूप में मना रही है। इस मौके पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने बताया कि मोदी सरकार 2 करोड़ रोजगार हर साल देने के बड़े-बड़े वादे कर सत्ता में आई थी, लेकिन अब रोजगार के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने चुप्पी साथ रखी है। हालात यह है कि देश में एक साल में बेरोजगारी दर 2.4 प्रतिशत से बढ़कर 10.3 प्रतिशत हो गई है। बीजेपी सरकार युवाओं को रोजगार देने में पूरी तरह विफल रही है।

कोरोना संक्रमण की चुनौतियों और लॉकडाउन के बावजूद छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर को लगातार नियंत्रित रखने में सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की दर 3 प्रतिशत दर्ज की गई है जो राष्ट्रीय दर 10.8 प्रतिशत से काफी कम है। छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मांग आने पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत कार्य मंजूर किये।

अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के ऐसे छात्र जो लोक सेवा आयोग यूपीएससी व लोक सेवा पीएससी की परीक्षा में शामिल होकर अपना करियर बनाना चाहते हैं उनके लिए राज्य शासन ने विशेषज्ञ शिक्षकों की अगुवाई में प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। इसके लिए जरूरी मापदंड भी बनाया है। कई शर्तों पर गौर करें तो ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों को स्नातक डिग्री न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक के साथ हासिल करना जरूरी है। लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए प्रदेश में संचालित निजी शिक्षण संस्थाओं के माध्यम से राज्य में प्रशिक्षण की सुविधा देने के लिए राज्य शासन ने इन वर्ग के छात्रों से आवेदन मंगाएं है।

अकेले सरकारी क्षेत्र में नौकरी सृजित करने से बेरोजगारी से निजात पाना संभव नही है। ऐसे में रोजगार मार्गदर्शन सेल ब्लाक स्तर पर खोलकर वहां के डाटा और जानकारी और प्रशिक्षण की व्यवस्था करवाकर ऐसे लोगो के लिए निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जा सकते हैं। 25 लोगों से ऊपर वाले संस्थान में कम्पिलसरी नोटिफिकेशन आफ वेकेन्सी वर्ष 1959 एमपी से लागू है। छत्तीसगढ़ में इसका कड़ाई से पालन कराया जाना होगा, जहां कहीं भी 25 से ज्यादा एम्पलाई है उन्हें अनिवार्य रूप से रोजगार कार्यालय को वैकेंसी की जानकारी देना अनिवार्य है। फिलहाल छत्तीसगढ़ में यह नियम लागू नहीं हो रहा है। स्थानीय युवाओं को स्व रोजगार देने के लिए कौशल उन्नयन केंद्रों को बेहतर मजबूत करना होगा। इस कार्य के लिए डाटा कंसल्टेंसी की सेवाएं लेकर प्रशिक्षण से रोजगार तक की व्यवस्था की जा सकती है।