breaking news New

अधूरा रोड निर्माण कार्य,1600 मीटर की रोड बनी मात्र 600 मीटर.......

अधूरा रोड निर्माण कार्य,1600 मीटर की रोड बनी मात्र 600 मीटर.......

 कोरिया ! जिला के जनपद क्षेत्र भरतपुर के ग्राम पंचायत जूईली का मामला जहां ग्राम पंचायत द्वारा 1600 मीटर मिट्टी करण करके रोड बनवाना था मगर ग्राम पंचायत निर्माण एजेंसी ने बनाए मात्र 600 मीटर सड़क।हम आपको बता देंगे रोड मैनपुर छांदा से मुंहपोछा पारा तक के लिए मिट्टी की रोड स्वीकृत हुई थी जिसका वर्क आईडी 3306005025/आरसी 1111347895 है। इस रोड का काम 16 मार्च 2019 से शुरू हुआ था जिसे 20 जुलाई 2020 को पूर्ण कर लिया गया है।जबकि इस रोड की स्वीकृत राशि 16 लाख रुपए के आसपास थी। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इस रोड निर्माण कार्य में भारी भ्रष्टाचार हुआ है जिसके कारण यह रोड आधी ही बन सकी बाकी पैसे कहां गायब हो गए यह जानकारी किसी को नहीं मिल रही है।

हम आपको बता दें कि यह मैनपुर छांदा से मुंहपोछा पारा निर्माण कार्य के समय में ग्राम पंचायत जूइली अंतर्गत आता था। मगर अब यह क्षेत्र ग्राम पंचायत रांपा अंतर्गत आता है।

वही इस मिट्टी रोड निर्माण कार्य में काम कर रहे कुछ मजदूरों का भुगतान आज तक नहीं किया गया है जैसे भुद्दू निर्माण कार्य में 20 दिन काम किया था मगर उसकी मजदूरी आज तक नहीं मिली वही ग्राम पंचायत रांपा की केश कली यादव ने भी इस रोड निर्माण कार्य में काम किया था जिनका 24 दिन की मजदूरी आज तक इन्हीं नहीं मिली है। ऐसे और भी कई मजदूर है जिनकी मजदूरी आज तक नहीं नहीं मिली है।जबकि इनके द्वारा कई बार जनपद पंचायत में जाकर भी अपनी बची हुई मजदूरी की मांग की गई है। मगर अधिकारियों द्वारा यह कहकर डाल दिया जाता है कि कुछ दिन में आपकी मजदूरी आ जाएगी।

वही हम बात करें तो शासन द्वारा स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि हर निर्माण कार्य का सूचना पटल में पूर्ण विवरण लिखा जाए मगर इस मैनपुर छांदा से मुंहपोछा पारा तक की रोड के सूचना पटल में कई बातों को छुपाया गया है। जैसे इस मिट्टी की रोड की लंबाई कितनी है,इसकी लागत कितनी है। ऐसे और भी कई ब्योरे इस सूचना पटल में नहीं लिखे गए हैं जो साफ दर्शाता है कि निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत के द्वारा बड़ा भ्रष्टाचार किया गया है। और यदि ग्रामीणों द्वारा बताए गए कथन सत्य है तो दोषियों पर कार्रवाई भी की जानी चाहिए।वही इस निर्माण कार्य में काम कीए हुए मजदूरों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि उनकी मजदूरी दी जाए।