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होम्योपैथी से करें कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन घर पर उपचार - डॉ एम डी सिंह

होम्योपैथी  से करें कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन घर पर   उपचार - डॉ एम डी सिंह

ओमीक्रान से भयभीत नहीं सतर्क होने की जरूरत ,
कोराना फिर लौट रहा है नए नाम नए लक्षणों के साथ।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इसे वेरिएंट ऑफ कंसर्न की संज्ञा दी है। और नाम दिया है ओमिक्रान। इसको लेकर दुनियाभर के देश सतर्क होने लगे हैं और भय का माहौल भी फिर से पैर पसारने लगा है। कहा जा रहा है कि ओमीक्रान की संक्रामकता डेल्टा से भी 3 गुना ज्यादा है। एक बात ध्यान रखने योग्य है कि रोग की संक्रामकता और घातकता में कोई संबंध नहीं होता।
कोई रोग बहुत संक्रामक होते हुए भी जीवन के लिए बहुत घातक नहीं होते कई रोग कम संक्रामक होते हुए भी बहुत घातक होते हैं। संयोग से अब तक जो रिपोर्ट है ओमीक्रान डेल्टा जितना घातक नहीं लग रहा।

कोरोना के पिछले दो संक्रामक लहरों से दुनिया ने इसके बारे में बहुत जानकारियां इकट्ठा की है जो निम्नवत हैं :

1- इस संक्रमण की शुरुआत ड्राई कोल्ड वेदर में हो रही है।

2- यह वायुजनित (एअरबार्न) संक्रमण है। इसका वायरस श्वसन मार्ग से मनुष्य के अंदर प्रवेश कर रहा है।

3- इसके रोकथाम में सबसे जरूरी संसाधन मास्क है। यदि सभी लोग सार्वजनिक स्थलों पर एवं घर पर भी सबके साथ रहते हुए मास्क लगाएं तो यह वायरस बाहर नहीं निकलने पाएगा। जिससे इसका संक्रमण स्वयं बाधित हो जाएगा।

4- टीकाकरण और होम्योपैथिक औषधियां इसको रोकने और चिकित्सा में सबसे ज्यादा कारगर हैं।

5- लाक्षणिक आधार पर चिकित्सा देने वाली होम्योपैथी औषधियां किसी भी तरह के रोग और संक्रमण में कारगर सिद्ध होती हैं। यही कारण है बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, पाकिस्तान और भारत में भी जिन लोगों ने होम्योपैथिक औषधियों का ज्यादा प्रयोग किया वह इस संक्रमण से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे।

6- यह संक्रमण संक्रमित के भीतर पहले से उपस्थित किसी रोग की अवस्था को कई गुना बढ़ा देता है। और वही पूर्व का रोग घातक साबित होता है। अतः स्वयं को स्वस्थ बनाए रखना अति आवश्यक है।

7- भय और अवसाद शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटा देते हैं। डरे हुए व्यक्तियों का रोग ग्रस्त हो जाना और रोग ग्रस्त हो जाने पर उसे न लड़ पाना एक सामान्य बात है। यही कारण है कि मरने वालों में 60% से ज्यादा वे लोग थे जो निरंतर भयग्रस्त थे।

8- अपराध बोध और सहानुभूति की कमी के कारण मृत्यु दर में वृद्धि। पहले दौर में तो यह चरम पर था जिसे भी पता चलता कि उसे संक्रमण हुआ है घर वाले भी उससे दूर हो जाते। यही कारण है किअब भी लोग कुछ लक्षण मिलने पर भी टेस्ट करवाने से बचते हैं और इस संक्रमण को बढ़ाने में वाहक का काम करते हैं।

9-भीड़भाड़ भरे अर्बन एरिया में इसका प्रकोप रूरल एरिया से कई गुना देखा गया।

9- संक्रमण काल में होम्योपैथिक औषधियों आर्सेनिक एल्बम 200, इग्नेशिया 200 और न्यूमोकोकिनम 200
3-3,4-4 जिन पर एक बार बारी- बारी से लेने वाले या तो संक्रमित नहीं हुए और यदि हुए भी तू सुरक्षित रहे।

10- एलोपैथिक ,आयुर्वेदिक औषधियों के साथ रोग होने पर होम्योपैथिक चिकित्सा भी लेने वाले यदि अपवाद को छोड़ दिया जाय इस संक्रमण और आसानी से जीत सकते हैं ।

11- व्यायाम, योग और साहस को जीवन का हिस्सा बनाया जाय। प्रतिरोधक क्षमता स्वतः ही बनी रहेगी।

12- यह रोग संक्रमण मनुष्यों को होमसिक बना रहा है यही कारण है कि इसका प्रसार होते देश दूर-दराज में रहने वाले लोग भी घर पहुंचने के लिए बेचैन हो जा रहे हैं और साथ में संक्रमण को भी लेकर आ जा रहे हैं।

बचाव :
1- जैसा कि प्रतीत हो रहा है यह संक्रमा एयर बार्न हो चला है, इससे बचने के लिए हर व्यक्ति का मुंह और नाक का ढंका रहना जरूरी है। मास्क अवश्य लगएं और सामने वाले को बाध्य करें।

2- टीका अवश्य लगवाएं जितनी बार कहा जाय।

3- बार-बार रूप बदलने वाले इस वायरस के साथ रहना सीखना पड़ेगा। जैसे चेचक ,टी बी और पालूशन के साथ रहना हमने सीख लिया है। इससे भागकर नहीं बचा जा सकता।

4- कार्यदाई संस्थाएं अपने कर्मचारियों की छटनी ना करें उन्हें सारी सुरक्षा मुहैया कराएं और अपने पास रख कर कार्य करावें एवं संक्रमण काल में हर 15 दिन पर आरटी पीसीआर टेस्ट किया जाए जिसके लिए सरकार भी सहयोग करें।

5- समाचार मीडिया भयभीत करने की जगह पर नागरिकों को शिक्षित करे।

6- लोग स्वयं भीड़ में जाने से बचें और बहिस्कार करें।

ठेले खोमचे वालों का टीकाकरण करवा कर एवं निश्चित समय पर बार-बार टेस्ट कल की स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा सर्टिफिकेट प्रधान किया जाए ताकि वह नित्य प्रयोग की वस्तुएं घर- घर जाकर सबको उपलब्ध करा सकें।


ओमिक्रान के लक्षण :

1- संक्रमण लगने की 3 से 7 दिन के अंदर लक्षणों का दिखाई पड़ना। कभी-कभी बिना लक्षण के भी टेस्ट करवाने पर वायरस का मिलना।
2- कोरोना के अन्य वैरीएंट की तरह लक्षण, किंतु माइल्ड प्रभाव वाले ।
3- गले में खराश, हल्का सर्दी, जुकाम और खांसी।
4- हल्का से तेज बुखार।
5- सुस्ती, कमजोरी और बदन दर्द।
6- अपच, पेट दर्द और डायरिया।
7- होमसिकनेस (घर पर रहने की इच्छा बलवती हो जाती है।)
8- अब तक की रिपोर्ट के अनुसार अधिकतम मरीज होम क्वैरेंटिन में ही ठीक हो जा रहे हैं। पूरे दुनिया में आधिकारिक तौर पर अब तक 3-4 मृत्यु ही हुई है।

((उपरोक्त लक्षणों के आधार पर व्यवहारिक निश्चिंतता अभी ठीक नहीं। कालांतर में और लक्ष्मण अवश्य जुड़ेंगे। इसलिए भयभीत हुए बिना पूर्ण सतर्कता जरूरी है।))

होम्योपैथिक चिकित्सा

प्रारंभिक चिकित्सा :

इग्नेशिया 200 संक्रमण काल में इस दवा को हफ्ते में एक बार अवश्य लेना चाहिए। इससे भय, अवसाद और अनावश्यक चिंता से बचा जा सकेगा, जिसके कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी।
आर्सेनिक अल्ब 200 सर्दी के मौसम में होने वाले अनेक लक्षणों में यह दवा प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती है। इसे इग्नेशिया लेने के 4 दिन बाद एक खुराक लेते रहा जा सकता है।
न्यूमोकोकिनम 200 पिछले अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि कोरोनावायरस के प्रतिरोधक होम्योपैथिक औषधि के रूप में इसने काफी हद तक अपनी उपयोगिता सिद्ध किया। संक्रमण काल में इसे 10 दिन में एक बार लेते रहना ठीक रहेगा।

लाक्षणिक चिकित्सा :
संक्रमण लग जाने की अवस्था में एकोनाइट नैप, आर्सेनिक एल्ब, स्पाइडोस्पर्मा, बेलाडोना, ब्रायोनिया एलबा, जेल्सीमियम, हिपर सल्फ, यूपेटोरियम पर्फ, इपीकाक, जस्टिसिया अधाटोडा, इनफ्लुएनजिनम, नक्स वॉमिका, ओपियम, आसिमम सैन्कटम, लैकेसिस,आसिलोकोकिनम, पायरोजेनियम इत्यादि। , येऔषधियां अकेले अथवा एलोपैथिक, आयुर्वेदिक औषधियों के साथ भी होम्योपैथिक चिकित्सक की राय पर ली जा सकती हैं।

(नोट- औषधियां होम्योपैथिक चिकित्सक की राय पर ही लें ।)