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पत्रकारों से छलावा सत्ताधारियों की आदत या फिर चौथे स्तंभ का दर्जा महज झुनझुना

पत्रकारों से छलावा सत्ताधारियों की आदत या फिर चौथे स्तंभ का दर्जा  महज झुनझुना

 आश्वाशन का पत्रकार भवन ही देती आई है राज्य की पिछली सरकार

कोरिया बैकुंठपुर ,बहुप्रतीक्षित पत्रकार भवन की मांग कोरिया जिले के पत्रकारों ने सरकार के सामने उन दिनों रखी थी जब छत्तीसगढ़ में पहली बार भाजपा की सरकार बनी थी।और जब बतौर राज्य के मुखिया रमन सिंह का प्रथम दौरा कोरिया जिले में हुआ था।आपको बता दें कि जिले का हर पत्रकार अपना एक सामूहिक स्थाई ठिकाने की आस लिए नव निर्वाचित मुखिया के समक्ष मांग रखा था।उसके बाद तीन पंचवर्षीय राज काज चलाने वाली रमन सरकार के संज्ञान में अनगिनत बार कोरिया जिले के पत्रकार भवन की मांग को स्मरण कराया गया परन्तु हर बार आश्वाशन ही मिलता रहा भवन कभी नहीं मिला।पत्रकारों से वादाखिलाफी और पत्रकार सुरक्षा कानून को नजर अंदाज करने वाली रमन सरकार ने सच मायनों में पत्रकारों को जितना छला वो कभी भुलाया नही जा सकेगा।जिले में सक्रिय हर पत्रकार संगठनों ने पूरी प्रमुखता से पत्रकार भवन की मांग को रखा लेकिन माननीय रमन सिंह  पत्रकारों की मांग को हमेशा हवा में उड़ाते रहे।गंभीरता से कभी विचार नहीं किया।

 राज्य सरकार पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करे। ,,,

राज्य की वर्तमान भूपेश सरकार भी जिस तरह पत्रकारों के लिए गंभीरता का वादा करती आई है।सच मायनों में तभी से पत्रकारों की पीड़ा और उन पर झूठे मामलों की बयार सी लग पड़ी है।मुखिया जी को अपनी कुर्सी का डर और मजबूत शक्ति प्रदर्शन की चाह के सामने विधायकों के क्षेत्रों में मचा असंतोष दिखाई नहीं दे रहा है।जिसके मद्देनजर संरक्षण प्राप्त भृष्ठ अधिकारियों की मनमर्जी का आतंक अनवरत जारी है।जो बड़ी विसंगति है।जिसके परिणाम स्वरूप ये कहना ग़लत नहीं होगा कि राज्य की कांग्रेस सरकार की आगामी चुनावी परिस्थिति  आज के विपक्ष की भांति लाइन में लाकर खड़ा न कर दे।आज जिस तरह झूठे मामलों सहित भ्रटाचार की खबरें प्रकाशित करने पर पत्रकार टारगेट किया जा रहा है।ये किसी के लिए भी सही नहीं है।शासन और प्रशासन ( कार्यपालिका और विधायका) से जिस तरह चौथे स्तंभ को उपेक्षित होना पड़ रहा है।और अंततः न्यायपालिका ही आश्रय बनकर रह गया है।इस व्याप्त स्थिति को इन दोनों इकाइयों द्वारा अध्ययन में लाना चाहिए।तभी लोकतंत्र के दायित्वों के निर्वहन में सही सहभागिता सभी इकाइयों की दर्ज हो पाएगी।

जिस तरह लोकतांत्रिक देशों की कतार में भारत सबसे बड़ा लोकतांत्रिक ,समृद्ध लोकव्यवस्था, धर्मनिर्पेक्षता, व बहुसांस्कृतिकता को समेटे हुए एक अकेला देश है ।

इसी लोकतंत्र को बनाये रखने के लिए चार मजबूत स्तम्भो को निर्मित किया गया है।न्यायपालिका,कार्यपालिका,विधायका और पत्रकारिता।इस चौथे खम्बे पत्रकारिता को बाकी 3 इकाइयों के काम पर काम अपनी भूमिका निभाते हुए ,जनहित की सूचनाये समय पर प्रसारित करने , लोकव्यवस्था निर्माण करने व समाज को एक सूत्र में बांधे रखने के आधार पर रख गया है।जिसके लिहाज से और पत्रकारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राज्य की सरकार को पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराना चाहिए।

राज्य के हर जिला मुख्यालय में एक पत्रकार भवन को प्रथमिकता में लाना चाहिए ,,,

राज्य की भूपेश सरकार को पत्रकार और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर होने की जरूरत है। राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराना चाहिए।पत्रकार जो अपनी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी से समाज की लड़ाई लड़ता है।लोकतंत्र का रक्षक कहलाता है उसके लिए उसका एक स्थाई वजूद देना चाहिए।पिछली सरकार की तरह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वालों को नहीं छला जाना चाहिए।अगर,न्यायपालिका,कार्यपालिका,और विधायका को सुरक्षा मुहैया है तो फिर चौथे स्तंभ को उपेक्षित किया जाना कहां तक न्यायोचित होगा।पत्रकार को भीड़ का हिस्सा करार न दिया जावे।पत्रकारों के सामूहिक स्थाई ठिकाने की मांग बतौर पत्रकार भवन को सरकार द्वारा प्राथमिकता में लाना चाहिए।