breaking news New

मन की बात: नये साल में स्वच्छ भारत का संकल्प लें- मोदी

मन की बात: नये साल में स्वच्छ भारत का संकल्प लें- मोदी

नई दिल्ली, 27 दिसंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से साल 2021 में स्वच्छ भारत का संकल्प लेने की अपील की है।

श्री मोदी ने रविवार को रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में यह अपील की। उन्होंने कहा, “ हमें ये संकल्प लेना चाहिए, कि हम, कचरा फैलाएंगे ही नहीं। स्वच्छ भारत अभियान का भी पहला संकल्प यही है। हमें देश को ‘सिंगल यूज़ प्लास्टिक’ से मुक्त करना ही है। ये भी 2021 के संकल्पों में से एक है।”

उन्होंने स्वच्छता को लेकर युवाओं की ओर से चलाए जा रहे अभियानों से प्रेरणा लेने की बात कही । उन्होंने गुरुग्राम में रहने वाले युवक प्रदीप सांगवान का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदीप सांगवान 2016 से ‘हीलिंग हिमालयाज’ नाम से अभियान चला रहे हैं। वह अपनी टीम के साथ हिमालय के अलग-अलग इलाकों में जाते हैं और जो प्लास्टिक कचरा पर्यटक छोड़कर जाते हैं, उसे साफ करते हैं। अब तक प्रदीप जी हिमालय की अलग-अलग पर्यटन स्थलों से टनों प्लास्टिक साफ कर चुके हैं।”

प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में कर्नाटक के एक युवा दंपति अनुदीप और मिनूषा का भी उदाहरण दिया । उन्होंने कहा कि हाल ही में विवाह बंधन में बंधे अनुदीप और मिनूषा ने देखा कि लोग अपने घर से बाहर घूमने जाते हैं और वहीँ ढ़ेर सारा कूड़ा-कचरा छोड़ कर आ जाते हैं। कर्नाटका के सोमेश्वर तट पर भी यही स्थिति थी। अनुदीप और मिनूषा ने शादी के बाद अपना पहला संकल्प यही लिया। दोनों ने मिलकर समंदर तट का काफी कचरा साफ कर डाला। उनकी इतनी शानदार सोच से प्रभावित होकर ढ़ेर सारे युवा उनके साथ आकर जुड़ गए। इन लोगों ने मिलकर सोमेश्वर तट से 800 किलो से ज्यादा कचरा साफ किया है।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान का संकल्प दोहराते हुए देशवासियों को नए वर्ष के लिए शुभकामनाएं भी दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिज्ञासा को जीवन की सफलता की कुंजी बताते हुए कहा है कि हमारे धर्म ग्रंथों में जिज्ञासा को महत्व दिया गया है और अर्जुन की जिज्ञासा के कारण ही दुनिया को गीता में भगवान श्रीकृष्ण की अमर वाणी का लाभ मिल रहा है।

श्री मोदी ने रविवार को रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि गीता की विशेषता है कि यह जानने की जिज्ञासा से शुरू होती है और जीवन में कभी निराशा का भाव नहीं आने देती है। यही कारण है कि तमिलनाडु के 92 साल के स्वामी टी श्रीनिवासाचार्य इस उम्र में कंप्यूटर सीखकर उस पर अपनी पुस्तक लिखते हैं। गीता का जिज्ञासा का यही ज्ञान पूरी दुनिया के लिए ऊर्जा का काम करता है।

उन्होंने कहा , “ दो दिन पहले ही गीता जयंती थी। गीता हमें हमारे जीवन के हर सन्दर्भ में प्रेरणा देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, गीता इतनी अद्भुत ग्रन्थ क्यों है। वो इसलिए क्योंकि ये स्वयं भगवन श्रीकृष्ण की ही वाणी है। गीता की विशिष्टता ये भी है कि ये जानने की जिज्ञासा से शुरू होती है। प्रश्न से शुरू होती है। अर्जुन ने भगवान से प्रश्न किया, जिज्ञासा की, तभी गीता का ज्ञान संसार को मिला।”

प्रधानमंत्री ने कहा , “ गीता की ही तरह हमारी संस्कृति में जितना भी ज्ञान है सब जिज्ञासा से ही शुरू होता है। वेदांत का तो पहला मंत्र ही है – ‘अथातो ब्रह्म जिज्ञासा’ अर्थात आओ हम ब्रह्म की जिज्ञासा करें। इसीलिए हमारे यहां ब्रह्म के भी अन्वेषण की बात कही जाती है। जिज्ञासा की ताकत ही ऐसी है। जिज्ञासा आपको लगातार नए के लिए प्रेरित करती है। बचपन में हम इसीलिए तो सीखते हैं क्योंकि हमारे अन्दर जिज्ञासा होती है। यानी जब तक जिज्ञासा है, तब तक जीवन है। जब तक जिज्ञासा है, तब तक नया सीखने का क्रम जारी है।”