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देश में बार बार आपातकाल लगाने वाली भाजपा को, आपातकाल पर बात करना शोभा नहीं देता - कांग्रेस

देश में बार बार आपातकाल लगाने वाली भाजपा को, आपातकाल पर बात करना शोभा नहीं देता - कांग्रेस


नरेंद्र मोदी जी द्वारा घोषित आपातकाल नोटबंदी, जीएसटी, लॉक डॉउन, काले कृषि कानून पर जवाब दे भाजपा

सक्ती, 26 जून। देश में सन 1975 में लगे आपातकाल की याद भाजपा द्वारा देश की जनता को हर साल दिलाया जाता है। 25 जून को जिला जांजगीर चांपा में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा एवं स्थानीय भाजपा नेताओं प्रेसवार्ता कर देश में कांग्रेस शासित प्रदेश में अभिव्यक्ति के हनन होने की बात कही गई। जिस पर जिला कांग्रेस प्रवक्ता शिशिर द्विवेदी ने पलटवार करते हुए कहा है कि देश में बार बार आपातकाल लगाने वाली भाजपा को, आपातकाल पर बात करना शोभा नहीं देता है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के मुख्य नेतृत्व कर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर 2016 के रात 8 बजे नोटबंदी के रूप पहला आर्थिक आपातकाल लागू किया गया। जिसमें छोटे फुटकर व्यापारी, रेहड़ी पटरी से जुड़े कामगारों के ऊपर ऐसी गाज गिरी कि उनकी अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। इसी तरह 1 जुलाई 2017 को एक नई आजादी बताकर गब्बर सिंह टैक्स यानी जीएसटी लागू की गई। यह भारत देश की मध्यम और निम्न वर्ग के लिए दूसरी आर्थिक आपातकाल थी। जिसमें देश की मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय लाखों जनता की नौकरियां चली गई वहीं दूसरी ओर सभी टैक्स को एक करने से रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के दाम कम होने के बजाय दिन प्रतिदिन बढ़ोत्तरी पर है।

 24 मार्च 2020 को देश की आर्थिक रीढ़ को तोड़ने के लिए 54 दिन का लॉकडाउन रूपी तीसरा आपातकाल लगाया गया, जिसमें देश की जनता को कोरोना से बचने के लिए अपने घरों में रहने और संक्रमण चैन तोड़ने को कहा गया, खाने पीने और घर चलाने के लिए उन्हें क्या दिक्कतें हो रही है इसका सुध केंद्र की मोदी सरकार ने नहीं लिया। बावजूद इसके कोरोना का संक्रमण देश के हर राज्य में फैला हुआ है और इस बीमारी से लाखों लोगों की जान चली गई। वर्ष 2020 में ही किसानों के ऊपर कृषि संशोधन अधिनियम 2020 के रूप में खेती और खेती से जुड़े किसान परिवार और उसमें आजीविका पाने वाले 26.3 करोड़ के देश की आबादी के अधिकार को छीनने के लिए चौथा कृषि आपातकाल लागू कर दिया गया है, जिस कानून के वापसी के लिए देश भर के किसान संगठन आंदोलनरत हैं, जिनकी बात मानने के लिए मोदी जी राजी नहीं हो रहे हैं। जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी ने आंदोलन जीवी की संज्ञा भी दी है। 

वर्तमान में देश में निजीकरण रूपी आपातकाल भी लागू है, जिसके तहत देश के चुनिंदा और उत्कृष्ट सेवा देने वाली संस्थाओं को बेचने का सिलसिला चल पड़ा है। देश एक दिन नरेंद्र मोदी जी के कुछ चंद चहेते पूंजीपतियों के हाथ की कठपुतली होगा, जिसके प्रमुख सूत्रधार भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व नरेंद्र मोदी और अमित शाह होंगे। उस भाजपा के नेता हर साल 25 जून को प्रेसवार्ता आयोजित कर स्वयं के द्वारा लागू किए गए नोटबंदी, जी एस टी, लॉक डॉउन, कृषि संशोधन बिल, निजीकरण जैसे आपातकाल पर क्यों बात नहीं करते हैं? जिसने देश की जनता को  कंगाल, बेरोजगार, असहाय और देश की अर्थ व्यवस्था को चौपट कर दिया।