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सरकार न्यायालय में जवाब जवाब खेल रही है ताकि टीके की अनुपलब्धता से लोगों का ध्यान हटाया जा सके - कविन्द्र जैन

सरकार न्यायालय में जवाब जवाब खेल रही है ताकि टीके की अनुपलब्धता से लोगों का ध्यान हटाया जा सके - कविन्द्र जैन


18+ के टीकाकरण की नयी नीति पूर्व की नीति से भी ज्यादा विवादास्पद

धमतरी, 10 मई। छग की सरकार 18+ व्यक्तियों के टीकाकरण में पूरी तरह नाकाम साबित हो चुकी है। पूर्व में जो नीति सरकार ने बनाई थी उस पर माननीय उच्च न्यायालय से सरकार को फटकार मिली। नयी नीति बनाने में सरकार ने एक हफ्ता निकाल दिया। अब टीकाकरण के लिये प्रदेश में जो नयी नीति सरकार लेकर आयी है वो पहले से भी ज्यादा अव्यवहारिक और विवादास्पद है। इस पर फिर से माननीय उच्च न्यायालय आपत्ति करेगी और पुनः नीति बदलने के नाम से सरकार को अतिरिक्त समय मिल जायेगा। भाजपा के जिला महामंत्री ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि वास्तव में सरकार न्यायालय में जवाब जवाब खेल रही है और सरकार की मंशा किसी भी तरह टीके उपलब्ध कराने में सरकार की नाकामी पर से जनता का ध्यान हटाने की है। 

सरकार ने पुनः भेदभाव की नीति अपनाते हुये एक बड़े वर्ग के साथ अन्याय किया है। सरकार एक तरफ तो विभिन्न वर्गों को फ्रंट लाइन वर्कर मानते हुये उन्हें टीके में 20 प्रतिशत आरक्षण दे रही है वहीं दूसरी तरफ APL वर्ग के आरक्षण को 33 प्रतिशत से घटाकर 16 प्रतिशत कर दिया गया है। एक बड़ा वर्ग जिसमे टैक्स के रूप में सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाला व्यापारी वर्ग भी शामिल है उन्हें इस नीति में पूरी तरह से उपेक्षित रखा गया है। आश्चर्यजनक है कि मेडिकल किराना कृषि संबंधी व्यापार करने  वाले व्यापारियों सहित अनेक ऐसे लोग जो सीधे तौर पर इस आपात स्थिति में आम जनता को सेवा दे रहे हैं उन्हें फ्रंट लाइन वर्कर न मानते हुये टीकाकरण के अधिकार से वंचित रखा गया है। यहां पर सरकार ने को-मॉर्बिड लोगों को आरक्षण देकर एक रास्ता बनाने की कोशिश की है ताकि अधिकृत चिकित्सक फर्जी को-मॉर्बिड का प्रमाणपत्र जारी कर भ्रष्टाचार का नया खेल खेल सके। पूर्व में 45 वर्ष से कम आयु के अनेक लोगों को को-मॉर्बिड का फर्जी प्रमाणपत्र जारी किया गया ताकि वो अपना टीकाकरण करा सके। सरकार को प्रदेश के सभी नागरिकों की जान की सुरक्षा बिना किसी भेदभाव के करना चाहिये तथा इस काम को बिना विलंब किये करना चाहिये क्योंकि टीका ही इस महामारी से बचाव का एकमात्र रास्ता है।