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सोशल मीडिया की ताकत को सलाम

सोशल मीडिया की ताकत को सलाम

डॉ. चन्दर सोनाने

और एक बार फिर से सोशल मीडिया ने अपनी ताकत का लोहा मनवा लिया है । पहले प्रिंट मीडिया में कोई खास खबर छपती थी तो तहलका मच जाता था । फिर आया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया। इसमें सुनने के साथ देखने को भी मिला । देखने वाले दंग रह जाते थे । और अब आ गया है सोशल मीडिया ! इसने पहली बार एक आदमी को भी पत्रकार बना दिया है । वह अपने आस  - पास जो भी देखता है  उसे तुरंत सोशल मीडिया में डाल देता है । देखते  - देखते वह खबर उस क्षेत्र से निकलकर प्रदेश और देश की सीमा को भी तोड़ कर विश्व भर में छा जाती है । और शासन -  प्रशासन को न चाहते हुए भी दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ता है । एक और खास बात । इसी सोशल मीडिया के ही कारण एक आम दुखी , पीड़ित व्यक्ति को उसके दुखों से उसे निजात भी मिली है।

आइये , आज आपको कुछ ऐसी ही महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में बताते हैं , जो सोशल मीडिया की ताकत को बताती है। ताजी घटना को सबसे पहले लेते हैं । हाल ही में मध्यप्रदेश के ही गुना जिले के ग्राम बांसखेड़ी में पाँच माह की गर्भवती एक महिला को उसके ससुर , दो जेठ और एक देवर ने खुले आम सबके सामने मारा  -  पीटा । यही नहीं , उस महिला के कंधे पर एक बड़े बच्चे को बैठाकर नंगे पैर गाँव में तीन किलोमीटर चलाया ,  घुमाया और दंडे से मारते पीटते भी रहे । घटना की शिकायत पुलिस थाने पर करने पर चार लोगों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उसी समय उन्हें छोड़ भी दिया गया । इस शर्मनाक घटना को किसी जागरूक नागरिक ने सोशल मीडिया पर डाल दिया । देखते ही देखते देश भर में ये छा गया । हल्ला मच गया । शासन - प्रशासन हरकत में आया । फिर से चारों को पकड़ा गया । थाने में बंद किया गया । यही नहीं , पुलिस थाने के प्रभारी उप निरीक्षक राकेश शर्मा को आई जी द्वारा निलंबित कर दिया गया । यह सब कुछ यदि हुआ तो उस घटना के सोशल मीडिया में आने के कारण ही ।

अब लेते हैं , दूसरी घटना को । हाल ही में इंदौर के बिजासन मंदिर के बाहर एक बुजुर्ग महिला पुष्पा बाई मिली। उसके पैरों में गहरे घाव थे । यही नहीं उसमें कीड़े भी पड़ गए थे । एक बन्दे दिनेश ने उसे इलाज के लिए एम वाय अस्पताल ले जाना चाहा तो वह उखड़ गई । वह बोली मुझे श्मशान छोड़ आओ । एम वाय नहीं जाऊँगी। उन्होंने ही मेरा पैर खराब कर दिया है। उस बन्दे ने उस पीड़ित महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया। तुरंत कलेक्टर मनीष सिंह ने उस महिला को अरविंदो अस्पताल इलाज के लिए भिजवाया। यही नहीं एम वाय अस्पताल को उस महिला की शिकायत पर जाँच करने के भी निर्देश दिए। सोशल मीडिया के कारण ही उस महिला को आज बेहतर इलाज मुहैया हो सका है। 

अब हम देखते हैं, तीसरी घटना को। पिछले दिनों यह बहुत चर्चित भी रहा है। यह कहानी इंदौर नगर निगम की अमानवीयता की पराकाष्ठा की कहानी है। पिछले दिनों एक दर्जन बुजुर्गों भिक्षुओं को जो शिवाजी वाटिका के आसपास सोए हुए थे उन्हें नगर निगम के कुछ कर्मचारी नगर निगम के ही रिमुअल ट्रक में जानवरों के समान भरकर इंदौर शहर से करीब 20 किलो मीटर दूर शिप्रा के पास गाँव लोहारपीपल्या में टांगाटोली कर डंडे से धमका कर सड़क पर पटक कर जाने लगे। गाँव के ही कुछ युवकों ने इसे देखा तो निगम के कर्मचारियों से भिड़ गए और बीमार बुजुगों को पटक कर जाने का पुरजोर विरोध किया और ट्रक के सामने खड़े हो गए। रास्ता जाम कर दिया। गाँव वालों ने निगम के कर्मचारियों को मजबूर कर सभी बुज़ुर्गों को चाय पिलाकर वापस ट्रक में बैठाया । यही नहीं युवकों राजेश जोशी और संदीप चौधरी ने उस पूरी घटना का वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर भी डाल दिया। कुछ ही देर में  वीडियो देश भर में देखा जाने लगा और नगर निगम को लानतें दी जानी लगी। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को भी सख्त निर्देश देने के लिए बाध्य होना पड़ा। सोशल मीडिया के कारण ही अभी बुजुर्गों को रैन बसेरा में आसरा मिला । दो मस्टरकर्मी ब्रजेश लश्करी और विश्वास वाजपेयी को तुरंत बर्खास्त किया गया। जाँच की गई । निगम के उपायुक्त   प्रताप सोलंकी को निलंबित कर दिया गया । कुल 6 मस्टरकर्मियों  को दोषी पाया गया । इनकी भी सेवाएँ समाप्त की जा रही है । इस सोशल मीडिया के ही कारण एक दर्जन बुजुर्गों को छत और भोजन की स्थायी सुविधा मिल सकी । इसके साथ ही अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद ने भी एक वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाल कर अपनी और से इन जैसे बुजुर्गों की मदद करने और उनके लिए छत उपलब्ध कराने की पेशकश कर इंदौर वासियों से आगे आने की गुहार लगाई है ।

और अब सोशल मीडिया की ताकत का एक और अंतिम उदाहरण । देश का चर्चित किसान आंदोलन । कृषि  के तीन बिलों के खिलाफ करीब तीन महीनों से हजारों किसान खुले आसमान के नीचे कड़कड़ाती ठंड में आंदोलन कर रहे हैं । इस आंदोलन के प्रति केंद्र सरकार की बेरुखी को लेकर किसानों के समर्थन में अमेरिकी गायिका रिहाना , स्वीडन की पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग , बॉलीवुड के नसरुद्दीन शाह ने खुल कर बयान जारी कर तहलका मचा दिया । इसके बाद तो सोशल मीडिया पर किसानों के आंदोलन के पक्ष में बयानों की बाढ़ ही आ गई । आंदोलन के देश की सीमा को तोड़कर विश्व भर में छा जाने से केंद्र सरकार बौखला गई । उसने इसी सोशल मीडिया का आसरा लिया और आंदोलन को देश का आंतरिक मामला मानते हुए देश की जानी मानी फिल्म और क्रिकेट की हस्तियों को सामने खड़ा कर दिया । अक्षय कुमार , अजय देवगन , अनुपम खेर , एकता कपूर , कंगना रनौत ,  तापसी पन्नू , लता मंगेशकर , सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली  आदि ने मौर्चा संभाला। किन्तु मजेदार बात यह रही कि देश की उक्त सभी ख्यात हस्तियों के बयान एक जैसे बयान थे , जो एक अलग ही कहानी कह रहे थे! जो भी हो, आज देश का किसान आंदोलन विश्व भर में चर्चित हो गया है। यह सब सोशल मीडिया के ही कारण हुआ है।

खैर !आपके पास भी सोशल मीडिया की ताकत की ऐसी ही अनेक कहानियाँ होगी। तो आप भी मानते हैं ना , सोशल मीडिया की ताकत को ! तो इक्कीसवीं सदी की इस आम आदमी की ताकत को, सोशल मीडिया की ताकत को सलाम!