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छत्तीसगढ़ के किसानों ने भी मनाया गया काला दिवसः भली-भांति जान समझ ले सरकार! किसानों की मांगें जायज हैं, इसलिए अंततः किसानों की मांगें माननी ही होंगी : डॉ राजाराम त्रिपाठी

छत्तीसगढ़ के किसानों ने भी मनाया गया काला दिवसः भली-भांति जान समझ ले सरकार! किसानों की मांगें जायज हैं, इसलिए अंततः किसानों की मांगें माननी ही होंगी : डॉ राजाराम त्रिपाठी


नई दिल्ली/ रायपुर, 27 मई।  छत्तीसगढ़ के सभी किसान संगठनों ने  एकजुट होकर 26 मई को  मनाया "काला-दिवस"। किसान विरोधी निरंकुश सरकार के निरंकुश शासन के भी होंगे सात साल पूरे। देश के 40 चालीस किसान संगठनों की महासंघ 'अखिल भारतीय किसान महासंघ आईफा के राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजाराम त्रिपाठी ने बताया कि तीनों किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने तथा किसानों के उत्पादन को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलवाने हेतु  बाध्यकारी कानून बनाने की मांग को लेकर देश भर में पांच जून 2020 से यानी कि लगभग एक साल से तथा देश की राजधानी की सीमाओं पर पिछले 6 महीने से किसान आंदोलनरत हैं। 

लेकिन अहंकार में डूबी हुई यह सरकार अपनी हठधर्मिता पर अड़ी हुई है। डॉ त्रिपाठी ने कहा कि यह भली-भांति जान समझ ले सरकार! कि किसानों की मांगें जायज हैं, इसलिए अंततः सरकार को किसानों की मांगें माननी ही होंगी।

इसीलिए 'संयुक्त किसान मोर्चा' दिल्ली के देशव्यापी आह्वान पर छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ व उनके सभी सहयोगी  किसान, मजदूर  संगठनों के  द्वारा 26 मई को काला दिवस मनाया गया ।  इस दिन छत्तीसगढ़ में भी किसानों ने अपने घरों, गाड़ियों में काले झण्डे फहराए तथा विरोध दर्ज कराया। 


इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश के जिला किसान संघ बालोद के संयोजक एवं पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा के उपाध्यक्ष मदन लाल साहू तथा सचिव तेजराम विद्रोही, नदीघाटी मोर्चा के संयोजक गौतम बंध्योपाध्याय, किसान समन्वय समिति सदस्य पारसनाथ साहू, गजेन्द्र कोसले, कृषक बिरादरी के संयोजक डाॅ. संकेत ठाकुर, किसान भुगतान संघर्ष समिति महासमुन्द के संयोजक जागेश्वर जूगनू चन्द्राकर, किसान मोर्चा धमतरी के संयोजक अधिवक्ता शत्रुघन साहू, अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक डाॅ. राजाराम त्रिपाठी, आदिवासी भारत महासभा के अध्यक्ष भोजलाल नेताम एवं संयोजक सौरा, राजधानी प्रभावित किसान संगठन नया रायपुर के संयोजक रूपन चंद्राकार, छत्तीसगढ निवेशक एवम अभिकर्ता कल्याण संघ के अध्यक्ष लक्ष्मी नारायण चंद्राकर, किसान संघर्ष समिति रायगढ़ के संयोजक लल्लू सिंह, किसान मजदूर महासंघ बिलासपुर के संयोजक श्याम मूरत कौशिक सहित समस्त किसान संगठनों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया तथा प्रेस विज्ञप्ति  जारी कर कहा कि साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने ’’हर हर मोदी, घर घर मोदी’’ का नारा दिया था। 

इसी के साथ साथ बहुत हो गई महंगाई की मार अबकि बार मोदी सरकार, बहुत हो गया भ्रष्टाचार अबकि बार मोदी सरकार,  जैसे नारे दिए थे, पेट्रोल डीजल की दामों को कम करने जैसे लोक लुभावन वायदे किये थे। लेकिन आज मोदी के सात साल पूरे होने को है और 'अच्छे दिन' लाने के सारे वायदे केवल जुमले बनकर रह गये। जिस प्रकार हर साल दो करोड़ बेरोजगारों को रोजगार देने, प्रत्येक भारतीयों के बैंक खातों में 15-15 लाख रुपये देने का वायदा किया था उसी प्रकार किसानों को उनके उपजों का स्वामीनाथान आयोग की सिफारिशो के अनुरुप लागत से डेढ़ गुणा समर्थन मूल्य देने का वायदा किया था जो आज झूठा साबित हो चुका है। उल्टे कृषि को काॅरपोरेटों के हवाले करने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बाजार के हवाले करने की नियत से 05 जून 2020 को अध्यादेश लाकर मोदी सरकार ने काॅरपोरेट परस्त व किसान कृषि और आम उपभोक्ता विरोधी कानून को जबरदस्ती थोपा है जिसके खिलाफ किसानों का आन्दोलन निरंतर जारी है। मोदी सरकार सभी सार्वजनिक संस्थानों जैसे रेल्वे, बैंक, बीमा, भेल, हवाई आदि को निजी हाथों में बेच रहा है, कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए ही श्रम कानूनों में संशोधन कर मजदूर विरोधी चार कोड बिल बनाये, कोरोना जैसे महामारी के पहले चरण में नमस्ते ट्रंप किया और दूसरे चरण में पांच राज्यों के विधनसभा चुनाव के बहाने कोरोना संक्रमण की गंभीरता को हल्के में लिया और जब भारत की लाखों जनता कोरोना से अपनी जान गवां चुके हैं, आज भी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है उसे दुरुस्त न कर अनावश्यक रूप से करोड़ों रुपए खर्च कर सेंट्रल वीष्टा बनाने में लगे हुए हैं। आपदा को अवसर में बदलकर आवश्यक वस्तुओं की महंगाई बढ़ाने वाले मुनाफाखोरों, कालाबाजारियों पर भी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। अर्थात्  सरकार हर मोर्चे पर असफल साबित हुई है।

इसलिए प्रदेश के किसानों ने भी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत, वर्तमान राष्ट्रीय किसान आंदोलन में अपनी भागीदारी था सिद्ध करते हुए , जो जहां है,  वहीं पर  कोरोना बीमारी से बचाव के सभी नियमों का भली-भांति पालन करते हुए 26 मई को संपूर्ण प्रदेश में "काला-दिवस मनाया ।