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प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है?

प्रधान संपादक सुभाष मिश्र की कलम से - पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है?

- सुभाष मिश्र
देश के सुप्रसिद्ध कवि, लेखक गजानन माधव मुक्तिबोध बहुत बार अपनी बातचीत और मिलने वालों के बीच अनायास पूछ बैठते थे की पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है। मोदीजी सहित समूची भाजपा आईआरएस की अच्छी भली नौकरी छोड़कर एनजीओ के जरिये अन्ना हजारे के आंदोलन से राजनीति में आये अरविंद केजरीवाल से पूछ रहे हैं, पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है? कभी तुम घर-घर राशन योजना बनाते हो और अब तुम घर-घर जाकर जहां वोट वहीं वैक्सीन योजना के जरिये टीका लगाना चाहते हो। सब जानते हैं कि जैसे तुम्हे गरीबों को घर-घर राशन देने की अनुमति नहीं मिली, वैसे ही तुम्हे टीके भी नहीं मिलेंगे। अभी पूरा देश टीके के लिए लाईन में हैं और तुम हो की कभी आक्सीजन के नाम पर, कभी टीके के नाम पर, कभी राशन के नाम पर केंद्र की सबका साथ-सबका विकास वाली मोदी सरकार को अनावश्यक कोर्ट-कचहरी में घेरते हो। टीवी पर, रेडियो पर लाईव आने के उनके एकाधिकार को चुनौती देकर उनकी बैठक में लाईव आ जाते हो। नाराज होने पर माफी मांग लेते हो। आज मोदीजी ने फिर लाईव आकर तुम्हारी घर-घर वैक्सीन योजना को फेल कर दिया। अब देश में तुम लोगों का नहीं मोदीजी का ही टीका लगेगा और उन्ही की फोटो वाला सर्टिफिकेट भी मिलेगा। मोदीजी और उनके बाकी साथी तुम्हारे खेल को बखूबी जान गये हैं। दिल्ली के मीडिया के सुविधा भोगी खेल को तुम और तुम्हारी पार्टी के नेता बखूबी समझकर दिल्ली की छोटी-बड़ी घटनाओं के कारण चर्चा में रहते हो। मीडिया को भी बैठे ठाले, बिना ज्यादा खर्च और ओबी वैन भेज कर बहुत सा मसाला, ब्रेकिंग न्यूज दिल्ली से ही मिल जाती है।

तुम डाल-डाल मैं पात-पात कहावत को केंद्र और विपक्ष की राज्य सरकारें मिलकर चरितार्थ कर रही है। राज्य सरकारे अपने खर्च से जो वैक्सीन लगा रही थी, उसमें वहां के मुख्यमंत्री की फोटो के साथ उसे उपलब्ध कराने की राज्य की अपनी पॉलिसी थी। अब प्रधानमंत्री ने आज अपने उद्बोधन में साफ कर दिया है कि 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को केंद्र की ओर से नि:शुल्क वैक्सीन निर्धारित गाईड लाईन के अनुसार लगाई जाएगी। राज्यों को 25 प्रतिशत वैक्सीन की जो जिम्मेदारी गलती से दे दी गई थी, अब उसका खर्चा भी अब केंद्र वहन करेगा। सुप्रीम कोर्ट भी यही कह रहा था की केंद्र वैक्सीनेशन की जिम्मेदारी ले और वैक्सीन सभी के लिए एक कीमत पर राज्यों को उपलब्ध कराए। केंद्र सरकार ने 35 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रावधान कोविड के लिए बजट में प्रावधानित किया है तो उस राशि से सभी को एक सी नीति के तहत टीकाकरण होना चाहिए। 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से देश के हर राज्य के 18 वर्ष के उम्र के सभी नागरिकों को मुफ्त वैक्सीन मुहैय्या कराई जाएगी। दिसंबर अंत तक देश के 94 करोड़ वयस्क जनता को वैक्सीनेशन हो जायेगा, ऐसा आश्वासन भी मोदीजी ने अपने उद्बोधन में दिया। अब शायद ही दिल्ली में लोगों को घर-घर राशन की तरह ही घर-घर वैक्सीन ना मिल पाये। उन्हे बाकी देश की जनता की तरह राशन दुकान, वैक्सीनेशन सेंटर ही जाना पड़ेगा।

मोदीजी के आज की घोषणा के बाद विपक्ष वाली सरकारें जो केंद्र पर वैक्सीन की कीमत और उपलब्धता को लेकर लगातार सवाल उठा रही थी संभवत: अब इस विवाद पर विराम लगायेगी, बशर्त की मोदीजी जिस तरह वैक्सीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दे रहे हैं, वह पारदर्शी तरीके से बिना भेदभाव उन राज्यो को मिल जाये। वैसे मोदीजी ने भी अपने भाषण में कहा है कि वाद-विवाद, राजनीति छींटाकशी को कोई अच्छा नहीं मानता। देश के हर नागरिक को टीका मिल सके यह सामूहिक जिम्मेदारी है। अब मोदीजी के इस फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल कहेंगे कि लोगों को घर-घर यदि टीके लगा रहे हैं तो उसमें क्या हर्ज है। दरअसल ये सब मामला 18 साल से ऊपर का है, जो वोटर हैं।

अरविंद केजरीवाल का सूत्र वाक्य है
तुम मुझे पसंद करो या ना करो पर तुम मुझे इग्नोर नहीं कर सकते। खबरों में बने रहने के लिए नवाचार के माध्यम से मैं कोई न कोई रास्ता खोज ही लूंगा।
दरअसल घर-घर राशन योजना जिसकी शुरुआत दिल्ली में इसी सप्ताह से होनी  थी, उसे रोके जाने पर अरविंद केजरीवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि हम केंद्र से कोई विवाद नहीं चाहते। दिल्ली में अगले हफ्ते से घर-घर राशन पहुंचाने का काम शुरू होने वाला था। सारी तैयारियां हो चुकी थीं, लेकिन आपने अचानक इसे क्यों रोक दिया? पीएम सर, इस स्कीम के लिए राज्य सरकार सक्षम है और हम केंद्र से कोई विवाद नहीं चाहते। हमें गरीबों के लिए काम करने दीजिए।

पूरी मासूमियत दिखाते हुए अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि इस वक्त देश बहुत भारी संकट से गुजर रहा है। ये वक्त एक-दूसरे का हाथ पकड़ कर मदद करने का है। ये वक्त एक-दूसरे से झगडऩे का नहीं है। लोगों को लगने लगा है कि इतनी मुसीबत के समय भी केंद्र सरकार सबसे झगड़ रही है। आप ममता दीदी से झगड़ रहे हैं। झारखंड सरकार से झगड़ रहे हैं। आप लक्षद्वीप के लोगों से झगड़ रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार से लड़ रहे हैं। दिल्ली के लोगों से लड़ रहे हैं। मोदीजी भी यह कह रहे हैं अब जब केंद्र सरकार सभी के लिए वैक्सीन दे रही है तब दिल्ली सरकार सहित सभी सरकारों को 18 से 45 साल तक के टीकाकरण की अपनी नीति, प्रक्रिया के बदले केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और एप से ही काम करना होगा। मोदीजी कह रहे हैं कोरोना की दूसरी वेब से लड़ाई जारी है, हर मोर्चे पर देश एक साथ लड़ा है। कोरोना अदृश्य और रूप बदलने वाला दुश्मन है। वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह है। इस कवच का इस्तेमाल उनके खिलाफ हो वो कैसे बर्दाश्त करते सो उन्होने बता दिया मोदी है तो मुमकीन है।

वैक्सीन को लेकर पहले गलती कर चुकी केंद्र की मोदी सरकार को अपनी आलोचना के बाद समझ में आया की एक मई से प्रारंभ 18 से 45 साल के टीकाकरण के लिए राज्यों से पैसे लेना उसकी बड़ी भूल थी। उन्होंने इस भूल के लिए कुछ राज्य सरकारों के ऊपर दोष मढ़ते हुए कहा कि बहुत सी सरकारें कह रही थी की संविधान में हेल्थ राज्य का विषय है। हमने 16 जनवरी से अप्रैल तक टीकाकरण की जवाबदारी संभाली। मई में एक महीने के लिए राज्यों को जो जवाबदारी सौंपी गई उसे लेकर तरह-तरह के सवाल उठे। किसी ने बहुमूल्य वैक्सीन के डोज खराब कर दिये तो किसी ने प्रायवेट अस्पतालों को बेच दिया। ये बात तो मोदीजी की थी पर विपक्ष के द्वारा फिर भी सवाल तो अब भी उठेंगे। केंद्र से मिले टीके को राज्य किस तरह से लगवायेगा। टीके कब तक मिलेंगे। बहुत से सवाल तो अभी भी अनुत्तरित है। सब एक दूसरे से पूछ रहे हैं पार्टनर तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है? देश का नागरिक सोच रहा है कोई भी लगाये पर टीका जरूर और जल्दी लगाए।