गुणवत्ताहीन मास्क खरीदी की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही हो-रोहरा

गुणवत्ताहीन मास्क खरीदी की जांच कर दोषियों पर कार्यवाही हो-रोहरा

संजय जैन

धमतरी, 16 अप्रैल। निगम द्वारा महापौर निधि से आनन फानन में सेनेटाईजर और मास्क की खरीदी को लेकर आरोप लग रहे हैं कि स्तरहीन वस्तुएं जब खुले बाजार में उसी दाम में मिल रहे हैं तो थोक के भाव में खरीदी करने से जब लाभ नहीं मिल रहा था तो ऐसी खरीदी क्यों की गई। ऊपर से टेप चिपका हुआ मास्क, घटिया क्वालिटी का साबित हो चुका है और जिन लोगों को दिये जाने हेतु मास्क और सेनेटाईजर खरीदा गया है उन तक यह नहीं पहुंची है बल्कि अपने शुभचिंतकों को इसकी रेवडिय़ां बांटी गई हैं। इस मामले की पूरी जांच होने तक के सप्लायर का भुगतान रोका जाना चाहिये। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो भाजपा इस मामले को लेकर लॉकडाउन समाप्ति के बाद आंदोलन करने बाध्य होगी। यह बात नेता प्रतिपक्ष नरेंद्र रोहरा ने इस प्रतिनिधि से चर्चा के दौरान कही है।

समूचे विश्व के साथ साथ भारत में भी कोरोना कोविड-19 से बचाव को लेकर व्यापक पैमाने पर शासन और प्रशासन मुस्तैदी के साथ जुटे हुए हैं। इसी का परिणाम है कि छत्तीसगढ़ में अभी यह वायरस अपना कातिलाना शिकंजा फैलाने में असफल रहा है। लेकिन इस महामारी से उपजने वाली स्थिति के चलते गरीब, जरूरतमंद लोगों को विभिन्न प्रकार के सहयोग न सिर्फ शासन, प्रशासन बल्कि समाजसेवी संगठनों, संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों आदि के द्वारा समय समय पर अपने अपने हिसाब से सामान वितरित किया गया है। लेकिन अभी जो भी राशन सामग्री है उसे सीधे तौर पर संबंधितों को न पहुंचाकर इसे प्रशासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी के माध्यम से ही वितरित किया जाना तय किया गया है। इसी महामारी से बचने के लिये शहर में बकायदा सेनेटाईजर, मास्क इत्यादि का भी निर्माण किया गया हेै। लेकिन इसके पश्चात भी जरूरत के हिसाब से मास्क एवं सेनेटाईजर की उपलब्धता नहीं हो पा रही थी जिसे लेकर भी अनेक लोगों ने मास्क एवं सेनेटाईजर का वितरण किया है। इसी कड़ी में नगर पालिक निगम धमतरी द्वारा महापौर निधि से पिछले दिनों आनन-फानन में निम्र स्तर का मास्क एवं सेनेटाईजर की खरीदी 5 लाख रूपये की लागत से 3 लोगों से कोटेशन बुलाकार खरीदी किया गया है ताकि जरूरतमंदों को यह वितरित किया जा सके किंतु मास्क एवं सेनेटाईजर की खरीदी के बाद जिन लोगों को इसे वितरित किया जाना बताया गया है, उन तक भी यह वस्तुएं नहीं पहुंच पाई। अलबत्ता आनन-फानन में की गई इस खरीदी को लेकर नेता प्रतिपक्ष नरेंद्र रोहरा ने घोर आपत्ति की है।

नेता प्रतिपक्ष श्री रोहरा ने कहा कि आनन-फानन में निगम महापौर मद से खरीदी गई उक्त वस्तुएं मेरे समक्ष रखी गई जिसमें मास्क बहुत ही निम्र स्तर का है और सेनेटाईजर की जो खरीदी 50 रूपये के हिसाब से जिस फर्म से खरीदी गई है, उसके द्वारा कोई भी रियायत नहीं बरती गई है जिससे साफ जाहिर होता है कि एक व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कोरोना कोविड-19 को आधार बनाते हुए 5 लाख रूपये का यह सामान खरीदा गया है जिसकी जांच अति आवश्यक है क्योंकि 5 लाख रूपये में जितने रूपये का सेनेटाईजर खरीदा गया है, वह खुले बाजार में भी उतना ही रूपये में प्राप्त होता है जबकि सप्लायर और निगम के जिम्मेदार लोगों को इस बात की जांच की जानी चाहिये थी कि जो सप्लाई ऑर्डर दिया जा रहा है, उसमें तीन लोगों के द्वारा भरे गये कोटेशन के अनुरूप सबसे कम दर्जे का किस फर्म का कोटेशन है। इसका भी उल्लेख नहीं किया गया। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कोरोना कोविड-19 के चलते में शासन और प्रशासन द्वारा जिन आवश्यक सेवाओं को निरंतर चालू रखा गया है उसमें मेडिकल स्टोर्स भी प्रमुख हैं। साथ ही शहर में कई मेडिकल होलसेलर्स एवं रिटेल दुकानें हैं, उसमें भी सेनेटाईजर आसानी से उपलब्ध हो सकता था। लेकिन आवश्यक सेवाओं के चलते मेडिकल स्टोर्स अथवा होलसेल डीलर को भी इसकी सूचना भेजी जाती। लेकिन निगम की कुर्सियों में बैठे ऐसे लोगों ने इस बात का संज्ञान नहीं लिया और कमरे में बैठकर यह निर्णय ले लिया गया और नेता प्रतिपक्ष जो कि निगम में प्रमुख जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्होंने कहा कि भला हो आज की जनधारा समाचार पत्र का जिससे मुझे यह जानकारी प्राप्त हुई।

श्री रोहरा ने कहा कि निगम में बैठे महापौर के मद में भी शासकीय राशि व्यय करने का अधिकार है। लेकिन यह राशि शासन के मद से ही आती है। उसका सदुपयोग किया जाना जिले के नागरिकों के लिये जरूरी होता है। लेकिन लॉकडाउन के दौरान खासमखास के निकाले गये उक्त सप्लाई ऑर्डर में 5 लाख रूपये की जो खरीदी की गई है वह संदेह के दायरे में आ रही है। यदि थोक में खरीदी की जाती है उसमें जाहिर बात है कि कुछ न कुछ रियायत मिलती है। लेकिन निगम के आदेश पर उक्त वस्तुओं की सप्लाई करने वाले संबंधित इंटरप्राईजेस के प्रभारी द्वारा इसमें कोई रियायत नहीं दी गई है। यदि खुले भाव में यह वस्तुएं जब बाजार में उपलब्ध है तो उसे विभिन्न मेडिकल स्टोर्स से भी खरीदी की जा सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। इसे लेकर उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि इससे पहले भी निगम में टेंडर निकाला गया जिसका भारी विरोध हुआ। उसके बाद यह टेंडर रद्द करना पड़ा। इस प्रकार की गतिविधियां निगम में कतई बर्दाश्त नहीं की जायेगी और ऐसे कृत्यों के लिये भाजपा अपने स्तर पर आंदोलन करने से पीछे नहीं रहेगी। उन्होंने इस मामले को राज्यपाल के समक्ष उठाने एवं जांच कराने तथा कलेक्टर रजत बंसल से भी इसकी शिकायत किये जाने की बात कही है।