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ब्रेकिंग : आइपीएस अफसर ने हिन्दु देवी-देवताओं को नकारा तो विवाद खड़ा हुआ, भाजपा महासचिव ने की नौकरी से बर्खास्त करने की मांग, आइपीएस बोले, 'मैंने वही कहा, जो अम्बेडकर जी ने कहा था'

ब्रेकिंग : आइपीएस अफसर ने हिन्दु देवी-देवताओं को नकारा तो विवाद खड़ा हुआ, भाजपा महासचिव ने की नौकरी से बर्खास्त करने की मांग, आइपीएस बोले, 'मैंने वही कहा, जो अम्बेडकर जी ने कहा था'

तेलंगाना. आइपीएस अधिकारी आर एस प्रवीण कुमार एक नये विवाद में फंस गए हैं. दो दिन पहले उन्होंने एक स्वयंसेवी संस्था तेलंगाना सोशल वेलफेयर रेजिडेंशियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस सोसाइटी (TSWREIS) के बैनरतले आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने शपथ लेते हुए कहा कि “मुझे गौरी, गणपति या अन्य हिंदू देवताओं में विश्वास नहीं है. मैं उनकी पूजा नहीं करूंगा. मैं भगवान के अवतारों की अवधारणा को स्वीकार नहीं करता हूं. मैं सरदार कर्म नहीं करूंगा और न ही पिंडा प्रधान. मैं राम, कृष्ण को नहीं मानता. मैं उनकी पूजा नहीं करूंगा.

ऐसी शपथ लेने का वीडियो वायरल होने के बाद आइपीएस अधिकारी आर एस प्रवीण कुमार हिन्दुं संगठनों के निशाने पर आ गए हैं. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी. मुरलीधर राव ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा है कि यह हिन्दु धर्म का अपमान है. एक सरकारी अधिकारी किसी धर्म और उनके भगवान के खिलाफ ऐसा कैसे बोल सकता है जबकि उस पर सभी धर्मों और देवी देवताओं का सम्मान करने का कर्तव्य है. ऐसे अधिकारी को बर्खास्त कर देना चाहिए.

इस पर आइपीएस आर एस प्रवीण कुमार का कहना है कि संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर ने भी ऐसी ही शपथ लेकर बौद्ध धर्म अख्तयार किया था. वे खुद भीम संगठन से जुड़े हुए हैं और एक हॉस्टल भी चलाते हैं. 15 मार्च से चूंकि भीम देखा आंदोलन की शुरूआत हुई है इसलिए इस समारोह में सभी ने बौद्ध धर्म की राह पर चलने की शपथ ली और इसी वीडियो में हिन्दु देवी—देवताओं को ना मानने की शपथ ली गई जिसमें आइपीएस भी मौजूद थे. यह वीडियो वायरल होने के बाद ही विवाद खड़ा हुआ है.

दरअसल आइपीएस अधिकारी आर एस प्रवीण कुमार एक एनजीओ और हॉस्टल चलाते हैं जिसमें गरीब बच्चों को शिक्षा देने का कार्य किया जाता है. हिन्दु संगठनों के नेताओं ने नाराज होकर कहा कि देवी-देवताओं के नाम लेने से धर्म विशेष का संबंध होता है, प्रवीण कुमार जो एक आईपीएस अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं और तेलंगाना सोशल वेलफेयर रेजिडेंशियल स्कूल के सचिव के रूप में ज़िम्मेदार कुर्सी संभाल रहे हैं, एक नौकरशाह के रूप में खुले तौर पर अन्य धर्मों के खिलाफ नफरत फैलाना केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 का उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को हर वह कथन कहने से बचना चाहिए जो किसी भी कानून, नियमों, विनियमों और स्थापित प्रथाओं के विपरीत हो सकता है.

आइपीएस अधिकारी आर एस प्रवीण कुमार के समर्थन में भीम आर्मी ने उतरते हुए कहा है कि सरकार आईपीएस प्रवीण कुमार के जरिए बाबा साहेब को निशाना बना रही है. यह 22 प्रतिज्ञाएँ अम्बेडकरवाद की बहुत बड़ी बुनियाद हैं. हम इन प्रतिज्ञाओं का पालन करते हैं, और करते रहेगें, और लोगों को बताएंगे भी, हमें कोई रोक नहीं सकता. बाबा साहेब ने बौद्ध धर्म स्वीकार करते हुए, 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में 22 प्रेरक शपथ ली थी. यह मुक्ति की शपथ है. प्रत्येक मानव को इसका पाठ करना चाहिए. आईपीएस प्रवीण कुमार जी ने भी यही किया है.