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एजुकेशन के साथ स्किल डेवलप करने की जरुरत - डॉ. वर्षा वरवंडकर

एजुकेशन के साथ स्किल डेवलप करने की जरुरत -  डॉ. वर्षा वरवंडकर


डेस्क |  कोरोना संक्रमण के कारण  जिन  लोगों को अपने जमे जमाएं  रोजगार से  हाथ धोना  पड़ा  जिनकी  नौकरियां  चली गई।  ऐसे  सभी लोगों को एक बात  समझ में आ गई है की हमें  अपने भीतर  कोई  न  कोई  ऐसा  स्किल  डेवलप  करना  पड़ेगा  जो हमें  रोजगार  दे। कोविड -19 के बाद लगभग 60 फीसदी  से ज्यादा लोगों  के ना केवल देश में अपितु विदेश में भी सब जगह रोजगार पर संकट छाया है। चाहे वो आपकी नौकरी हो , चाहे स्वरोजगार हो,  चाहे स्टार्टअप हो या फिर आपका बिजनेस हो।  पूरे  विश्व की जो आर्थिक व्यवस्था है बहुत ज्यादा इन सबसे डिस्टर्ब हो गई है।  कोरोना महामारी के दौरान परिवारों में तनाव की स्थिति तो बढ़ी है इसके अलावा घरेलू हिंसा के भी केस बढे हैं। अपने बच्चों को ये बताना है की कठिन समय का मुकाबला चिड़चिड़ाकर या गुस्सा करके नहीं करना है बल्कि शान्ति से मिलकर करना है। माता पिता को समझाना कठिन होता है। बच्चों के करियर  को लेकर  आज माता पिता की मनस्थिति बदल रही है।


मध्य भारत की प्रसिद्ध करियर कॉउंसलर एवं शैक्षणिक मनोवैज्ञानिक डॉ. वर्षा वरवंडकर छत्तीसगढ़  की  इकलौती  कॅरियर कॉउंसलर  है  जिन्होंने राज्य में 1 लाख 75 हजार से अधिक विद्याथियों को कॅरियर मार्गदर्शन दे चुकी है। डॉ. वर्षा वरवंडकर  का कॅरियर काउंसलिंग में कार्यक्षेत्र छत्तीसगढ़ राज्य के सुदूर ग्रामीण अंचलो में ज्यादा  रहा हैं। सन् 2010 में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों के लिए प्रथम आवासीय विद्यालय "प्रयास" की स्थापना की गई इसके लिए डॉ. वर्षा वरवंडकर ने स्वयं बस्तर जगदलपुर ,धमतरी और  कंकेर में जाकर 10,000 से ज्यादा छात्र-छात्राओं की काउंसलिंग और  मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया। छत्तीसगढ़ राज्य माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा संचालित होने वाली कॅरियर हेल्पलाइन सेवा में पिछले कई वर्षो से डॉ. वर्षा वरवंडकर बतौर कॅरियर विशेषज्ञ अपनी सेवाएं दे रही हैं। डॉ. वर्षा वरवंडकर माय अगलाकदम आजीविका एकेडमी की मुख्य निर्देशक हैं। एक शिक्षाविद के रूप में उन्होंने सेकडों प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की हैं जिसके माध्यम से विद्याथियों और पालकों को कॅरियर चुनने की कला, परीक्षा की तैयारी, तनाव प्रबंधन, श्रेष्ठ पालकत्व इत्यादि विषयों में पारंगत कराया हैं।


 आज की जनधारा समाचार समूह के चैनल जनधारा 24 को दिए  डॉ. वर्षा वरवंडकर के साक्षात्कार के अंश -

- कोरोना काल में लोगों के रोजगार गए है , रोजगार के अवसर नहीं है , स्कूल कॉलेज बंद है तो इसका असर लोगों पर क्या पड़ रहा है इस पर डॉ.  वर्षा  वरवंडकर ने कहा की - कोविड -19 के बाद लगभग 60 फीसदी  से ज्यादा लोगों  के ना केवल देश में अपितु विदेश में भी सब जगह रोजगार पर संकट छाया है। चाहे वो आपकी नौकरी हो , चाहे स्वरोजगार हो,  चाहे स्टार्टअप हो या फिर आपका बिजनेस हो। हमारे पूरे  विश्व की जो आर्थिक व्यवस्था है बहुत ज्यादा इन सबसे डिस्टर्ब हो गई है और चूँकि जीविका का सम्बन्ध  सीधे -सीधे व्यक्ति के मानसिक परिस्थितियो पर डिपेंड करता है। अगर  हमारे पास पैसा नहीं है और अगर धनोपार्जन के साधन नहीं है तो व्यक्ति में चिड़चिड़ाहट और  तनाव होने लगती है  अवसाद जैसे  स्थिति उत्पन्न होने लगती है।  कोरोना काल में जो रोजगार गए है उससे एक बात यही समझ में आ गई  है की हमको अपनी स्किल को डेवलप करना पड़ेगा। अब हम एक ही रोजगार , एक ही एजुकेशन  एक ही शिक्षा  के  भरोसा नहीं बैठे रह सकते  हमको साइड बाय साइड अपनी  कोई न कोई कैसे भी स्किल डेवलपमेन्ट करना पड़ेगा क्योंकि अगर हम जिस फिल्ड में काम कर रहे है और हमे वहां  रोजगार की समस्या हो तो हम दूसरे फिल्ड में अपना हाथ आजमा सके।  जैसे की उदाहरण के लिए कोरोना काल में देखिये सबसे ज्यादा इफ़ेक्ट होने वाला लाइन है एयर लाइन और होटल इंडस्ट्री। बहुत सारे एयर लाइन बंद पड़े है, होटल इंडस्ट्री बंद पड़े हुए है लेकिन इसमें भी हम लोगों ने देखा की जो कस्टमर केयर में एग्जीक्यूटिव काम कर रहे है जिनका कम्युनिकेशन  स्किल अच्छा है  मेरे पास सलाह लेने आते है और हम उनको  सुझाव करते है वो जिन लाइन में  वो परफेक्ट है उस लाइन के बारे में । मतलब ये की कोई न कोई मेन एजुकेशन के अलावा आप अपनी स्किल को डेवलप करते रहेंगे तो हंड्रेड परसेंट तो नहीं लेकिन फिफ्टी परसेंट इस अनिश्चितता की दशा में सर्वाइव कर पाएंगे।  


- कोरोना महामारी की वजह से मानसिक तनाव उत्पन्न हुआ  और घरेलू हिंसा बढ़ी है इसको आप किस तरह से देखती है इस पर  डॉ. वर्षा वरवंडकर ने कहा की कोरोना महामारी के दौरान परिवारों में तनाव की स्थिति तो बढ़ी है इसके अलावा घरेलू हिंसा के भी केस बढे हैं और जैसा की मैंने मनोवैज्ञानिक में पीएचडी किया है तो हम लोग  विहेवियर कॉउंसलिंग भी करते है।  पेरेंटिंग कोच भी करते है नए जनरेशन है उसके साथ कैसा डील किया जाए।  इस महामारी के कारण  हम सब लॉक डाउन में रहे ऐसा पहली बार हुआ है की सभी एक दूसरे के साथ  24 घंटा रहे है जो हमारी एनर्जी थी ऑफिस जाने में बच्चों को खेलने में वो कहीं और खर्च ही नहीं हुई। हम सोशल आइसोलेट हो गए थे  , लोगों से मुलाकात नहीं हो पा  रही थी  हमारे आस- पास  का  वातावरण नेगेटिव था और उस नेगेटिविटी के कारण  उस वाइव्रेंट के कारण  और  हमारे जीविका पर भी संकट आ गया था।  घरों में हम सामंजस्य नहीं रख पाए और इन सब कारणों से बहुत से घरों में घेरलू हिंसा उत्पन्न हुए।  हम सबको अपने बच्चों को अच्छा उदाहरण देना है।  अपने बच्चों को ये बताना है की कठिन समय का मुकाबला चिड़चिड़ाकर या गुस्सा करके नहीं करना है बल्कि शान्ति से मिलकर करना है। क्योंकि समय अभी कठिन है और अगर हम आने वाले 6 महीना भी देखे तो आगे ऐसा ही होने वाला है तो उसके लिए तैयार रहे की हम कैसे आने वाले तूफ़ान का सामना कर सकते है शान्ति से  और प्यार से ये सीखना होगा तभी हम जब इस कोरोना महामारी के बाद आएंगे उभर कर तो  


-  विद्यार्थियों को ऑन लाइन पढ़ाई करने के लिए  मजबूर होना पड़ रहा है इस बदलाव को  किस तरह से देखती हैं इस पर  डॉ. वर्षा वरवंडकर  ने कहा की  परिवर्तन जीवन का नियम है और जिस व्यक्ति ने परिवर्तन को स्वीकार कर लिया वही लाइफ में सक्सेसफुल होता है।  कोविड  19 के कारण जितने भी शैक्षणिक संस्थाए बंद है। पढ़ाई डीमोड़ हो गया है अगर हम  पिछले साल की  बात करें तो उन सब के लिए बहुत चैलेंजिंग समय था न ही टीचर को  मालूम था , न ही पैरेंट्स को मालूम था और ना ही स्कूल को मालूम था की ब्लैक बोर्ड और डस्टर की पद्धति से हटकर बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया  भी जा सकता है।  बच्चों की दिनचर्या डिस्टर्ब  हो चुकी है।  आने वाला समय डिजिटल होगा।  अपने आपको इसके  लिए तैयार  रखना पड़ेगा।  स्टडी का 20-20  पैटर्न अपनाना चाहिए।  आने वाले समय  में नई शिक्षा नीति आने के बाद हर बच्चे को कॉउंसलिंग की जरुरत पड़ेगी।  

 

- कितना कठिन होता है लोगों को कॉउंसलिंग करना इस पर डॉ. वर्षा वरवंडकर ने कहा की सबसे पहले माता पिता को समझाना कठिन होता है।  माता पिता के साथ काम करना पड़ता  है।  माता पिता समझ जाते है तब वो बच्चा को समझने लगते है। इससे  बच्चा ज्यादा ख़ुशी से काम कर पायेगा।  आज माता पिता की मनस्थिति बदल रही है।