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राहुल गांधी ने कहा - झूठ बोलने में मोदी का कोई जवाब नहीं, लॉकडाउन के दौरान लाखों मजदूरों को मजबूरन पैदल ही अपने घर लौटना पड़ा

राहुल गांधी ने कहा - झूठ बोलने में मोदी का कोई जवाब नहीं, लॉकडाउन के दौरान लाखों मजदूरों को मजबूरन पैदल ही अपने घर लौटना पड़ा

बगहा।  कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश के लोगों से झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि झूठ बोलने के मामले में प्रधानमंत्री का कोई मुकाबला नहीं है।

राहुल  गांधी ने पश्चिम चंपारण जिले के मधुबनी प्रखंड के दौनहा मिडिल स्कूल मैदान में एक चुनावी सभा में रोजगार एवं कृषि सुधार कानून के मुद्दे पर श्री मोदी पर जमकर निशाना साधा और कहा कि प्रधानमंत्री ने दो करोड़ रोजगार की बात कही थी। अब यदि प्रधानमंत्री दो करोड़ रोजगार की बात बोल दें तो शायद भीड़ उन्हें भगा देगी। कुछ साल पहले श्री मोदी यहां आए थे और कहा था कि ये गन्ने का इलाका है, चीनी मिल चालू करूंगा और अगली बार आऊंगा तो यहां की चीनी चाय में मिलाकर पिऊंगा। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि पिछले वादे के अनुसार प्रधानमंत्री ने यहां के लोगों के साथ चाय नहीं पी।

कांग्रेस नेता ने रोजगार का मुद्दा उठाया और श्री मोदी के साथ-साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी आलोचना करते हुए कहा कि बिहार के लोगों को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बेंगलुरु में रोजगार मिलता है लेकिन बिहार में नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि रोजगार उपलब्ध नहीं करा पाने के लिए श्री कुमार और श्री मोदी सीधे तौर पर जिम्मेवार हैं।

राहुल गांधी ने कहा, “हम रोजगार देना जानते हैं, बाकी तमाम विकास करना जानते हैं लेकिन हमारे अंदर एक कमी है। मैं इस बात को स्वीकारता हूं कि हम झूठ बोलना नहीं जानते हैं, इस मामले में हमारा उनसे कोई मुकाबला ही नहीं है।”

कांग्रेस नेता ने कृषि कानूनों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आम तौर पर दशहरे पर रावण के पुतले जलाए जाते हैं लेकिन पंजाब में इस बार प्रधानमंत्री और अडाणी के पुतले जलाए गए। इस बार पूरे पंजाब में दशहरा पर रावण नहीं बल्कि श्री मोदी के साथ उद्योगपति अंबानी और अडाणी के पुतले जलाये गये। ये दुख की बात है, लेकिन ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि किसान परेशान हैं।

राहुल  गांधी ने लॉकडाउन के दौरान पैदल चलकर बिहार लौटे पर मजदूरों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश के विभिन्न इलाकों में कार्यरत लाखों मजदूरों के लिए प्रधानमंत्री ने कोई इंतजाम नहीं किया। मजदूरों को मजबूरन पैदल ही अपने घर लौटने काे मजबूर होना पड़ा।