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शिक्षक नें उठाए अहम सवाल, मुख्यमंत्री से मांगा जवाब

शिक्षक नें उठाए अहम सवाल, मुख्यमंत्री से मांगा जवाब

       
राजनांदगाँव ।  कोरोना संक्रमण से सबसे ज्यादा परेशान चल रहे निजी शैक्षणिक संस्थाओं के शिक्षकों में से वेसलियन अंग्रेजी स्कूल के वरिष्ठ व्याख्याता डॉ  एस. के। मिश्रा ने अपनी पीड़ा मुख्यमंत्री तक एक पत्र के माध्यम से उनके ई- मेल द्वारा पहुँचाया है । पीड़ित शिक्षक ने अपने लिखे पत्र में मुख्य मंत्री से अहम सवालों के जवाब माँगे हैं । सबसे मुख्य प्रश्न निजी संस्थाओं के शिक्षको को वेतन न मिलने से संबंधित है ।
                वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. मिश्रा ने बताया कि कोरोना की दस्तक के साथ ही निजी शैक्षणिक संस्थाओं में स्टाफ के वेतन की समस्या उत्पन्न हो गयी । पालकों ने अपने बच्चों का शाला शुल्क भुगतान करना बंद कर दिया । जैसा कि आप जानते हैं कि निजी संस्थाएं अपने स्टाफ के वेतन की व्यवस्था केवल कुल जमा शाला शुल्क से ही कर सकती हैं । जब शाला शुल्क ही नहीं होगा तो वेतन कैसे दिया जा सकेगा ? लॉक डाउन के साथ ही सामाजिक संस्थाओं सहित प्रदेश शासन ने भी जरूरत मंदों की सेवा में योजनाओं को अमल में लाया । मैं आप से पूछना चाहता हूँ कि जब शासन ने अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया है ,तब ऐसे लोगों द्वारा शालाओं का शुल्क क्यों नहीं दिया गया ? सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट तौर पर अपने आदेश नें कहा है कि जिला प्रशासन द्वारा तय शुल्क भुगतान अनिवार्य रूप से किया जाना है ।
                दुसरीं ओर प्रदेश शासन के मुखिया होने के नाते आपके द्वारा भी ऐसा कोई कदम नही उठाया गया ,जो हम जैसे शिक्षकों के लिए राहत बनकर सामने आता । मैं खुद 35 वर्षों से निजी शाला में सेवाएं दे रहा हूँ । शिक्षा जैसा पुण्य कार्य भी वर्तमान में मेरे जैसे लाखों शिक्षकों के लिए अभिशाप बन चुका है । क्या हमारा समाज आपकी सोच से बाहर का विषय है ? क्या हम इस देश के नागरिक नहीं ? क्या हम शासन के साथ ही लंबे समय से लोगों को शिक्षित करने अपना योगदान नहीं कर रहे हैं । मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि हमारा समाज शासकीय वेतन निर्धारण के महज 20 से 25 प्रतिशत के बराबर नगण्य मानदेय पर वही सेवा दे रहा है, जिनके लिए आप करोड़ों का बजट रखते आ रहे हैं । आपके अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा शाला शुल्क न देने की बात क्या आपके अधिकारियों की जानकारी में नहीं है ? यदि आप वास्तव नें सर्व वर्ग हितैषी होने का दावा करते हैं तो ऐसे कर्मचारियों के वेतन से शाला शुल्क की कटौती कर संबंधित शालाओं के खातों में डालने की जहमत भी उठाने की जरूरत समझें और हम जैसे शिक्षा दूतों के परिवार की चिंता को भी अपनी चिंता समझकर एमरजेंसी फण्ड से वेतन की व्यवस्था कर संवेदनशीलता का परिचय दें ।