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साक्षी दुबे खुदकुशी केस : एम्स प्रशासन ने आरोपी विभागाध्यक्ष के खिलाफ जांच बैठाई..संगठनों ने छात्रा को न्याय दिलाने मोर्चा खोला..एम्स में हुआ हंगामा..विभागाध्यक्ष मुश्किल में !

साक्षी दुबे खुदकुशी केस : एम्स प्रशासन ने आरोपी विभागाध्यक्ष के खिलाफ जांच बैठाई..संगठनों ने छात्रा को न्याय दिलाने मोर्चा खोला..एम्स में हुआ हंगामा..विभागाध्यक्ष मुश्किल में !

रायपुर. एम्स प्रशासन ने साक्षी दुबे आत्महत्या प्रकरण में विभागीय जांच बिठा दी है, हालांकि इसे भी मात्र खानापूर्ति माना जा रहा है क्योंकि एम्स प्रबंधन कई जानकारियां छुपाते हुए आरोपी विभागाध्यक्ष को बचाने में लगा हुआ है. दूसरी ओर साक्षी दुबे को न्याय दिलाने के लिए आज सर्व समाज सेवा समिति तथा राष्ट्रीय हिन्दू शक्ति संगठन के कार्यकर्ता एम्स पहुंचे तथा एम्स डायरेक्टर से आरोपी विभागाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा साथ ही छात्रा को न्याय दिलाने की मांग की.

सर्व समाज सेवा समिति के समन्वयक जयराम दुबे, दलविंदर बेदी, तरुण शर्मा, सुब्रतो हलदर तथा राष्ट्रीय हिन्दू शक्ति संगठन के प्रदेश संयोजक शांतनु राय, जिला अध्यक्ष विकास शुक्ला साईं राव ने बताया कि विगत 2 जुलाई 2021 को रायपुर एम्स के बी एस सी नर्सिंग रेडियलॉजी टेक्नीशियन की छात्रा साक्षी दुबे ने आत्महत्या कर ली थी. छात्रा के माता पिता ने विभागाध्यक्ष नरेंद्र कुमार बोधे पर गंभीर शोषण एवं प्रताड़ना का आरोप लगाया था. पुलिस विभाग को भी शिकायत की गई थी जिसके बाद विभागाध्यक्ष को थाना आमानाका से नोटिस देकर पुछताछ की गई है परंतु अब तक पीड़ित के मोबाइल एवं आरोपित डॉक्टर के मोबाइल के अंतिम काल डिटेल एवं व्हाट्सएप आदि की जांच नही की गई जबकि इसी से छात्रा का खुदकुशी का असल सच सामने आ सकता है. अभी तक कोई प्रकरण भी दर्ज नही किया गया है इसलिए उपरोक्त संगठनों ने मोर्चा खोला है.

उन्होंने कहा कि जब तक छात्रा को न्याय नही मिल जाता, यह लड़ाई जारी रहेगी. जानते चलें कि आत्महत्या करने वाली छात्रा साक्षी दुबे ने अपने सुसाइड पत्र में भी विभागाध्यक्ष पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है. मृतका के पिता का आरोप है कि आरोपित विभागाध्यक्ष नरेंद्र कुमार बाँधे रेडियोलॉजी विभाग में पूर्व में भी छात्राओं के साथ अभद्रता के साथ पेश आते रहे हैं साथ ही प्रता​िड़त करते रहे हैं. घटना के बाद भी आरोपी डॉक्टर को उसी रेडियोलॉजी विभाग में बने रहने देना एवं विभागीय जांच न बैठाना संदेह एवं विभागीय संरक्षण को दर्शाता है. इससे न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है. फिलहाल एम्स प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिलाया है.