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महुआ डोरी 4000 रुपए क्विंटल, बन रही सिर दर्द, गठिया, और चर्म रोग की दवाई

महुआ डोरी 4000 रुपए क्विंटल, बन रही सिर दर्द, गठिया, और चर्म रोग की दवाई

राजकुमार मल



बिलासपुर- जिस तरह महुआ के फूलों को मौसम का साथ मिला, उसी तरह का साथ, महुआ डोरी को भी मिला तो निश्चित जानिए कि इस बरस इसकी भी फसल, उत्पादन का नया कीर्तिमान बना सकती है। औषधीय गुणों से परिपूर्ण होने की जानकारी सामने आने के बाद, फिलहाल यह रिकॉर्ड 4000 रुपए क्विंटल की कीमत में खरीदा जा रहा है।

महुआ पत्ता। फिर महुआ फूल। अब बारी है महुआ डोरी की, जिसके आने की आहट से वनोपज कारोबार क्षेत्र में कीमतों में गर्मी आने लगी है। आगामी माह के पहले पखवाड़े में आवक की बनती संभावना के बीच, इस बार यह, भाव का नया कीर्तिमान बना सकता है। यह इसलिए क्योंकि मेडिशनल प्रॉपर्टीज के खुलासे के बाद आयुर्वेदिक दवा कंपनियों की मांग के साथ ऑयल प्लांटों की भी खरीदी चालू हो चुकी है।

फूल के बाद बारी फल की



इस बरस फूल के सीजन में महुआ को मौसम का पूरा साथ मिला। समर्थन मूल्य पर खरीदी से इसे नई पहचान मिली। रिकॉर्ड संग्रहण और रिकॉर्ड खरीदी के बाद अब बारी है, महुआ डोरी की। वनोपज कारोबार क्षेत्र का मानना है कि फूलों के बाद फलों को भी मौसम का साथ मिला, तो यह बीते बरस के उत्पादन का रिकॉर्ड तोड़ सकता है। फलों की आवक की राह देख रहा यह क्षेत्र, इसकी खरीदी अभी से 4000 रुपए क्विंटल की दर पर कर रहा है।

फसल अच्छी लेकिन मौसम...

प्रदेश में वनोपज के कारोबार में पहचान की मोहताज नहीं है, रायपुर की एस पी इंडस्ट्रीज। इसके संचालक सुभाष अग्रवाल का मानना है कि मिल रही खबरों को देखते हुए कहा जा सकता है कि महुआ फूल की तरह इस बार महुआ फल, उत्पादन का नया कीर्तिमान बना सकता है। नई फसल के लिए पूरा मई माह इंतजार करना होगा लेकिन महत्वपूर्ण यह कि मौसम कितना मेहरबान रहेगा? फिलहाल ऐसी ही सोच के बीच आयुर्वेदिक औषधि निर्माण कंपनियां इसकी खरीदी 4000 रुपए क्विंटल की दर पर कर रहीं हैं।


आता है कई काम



टीसीबी कॉलेज ऑफ एग्री एंड रिसर्च स्टेशन बिलासपुर के वानिकी वैज्ञानिक अजीत विलियम्स बताते हैं कि फूल और फल जैसी दोहरी फसल देने वाला महुआ बेहद काम का है। पत्तियों से दोना और पत्तल बनाए जाते हैं तो लकड़ियां घरेलू उपयोग के लिए प्रयुक्त होती हैं। फूलों के उपयोग के बाद जब फलों पर अनुसंधान हुआ, तब इसमें 35 से 40 प्रतिशत तेल की मात्रा का होना पाया गया। तेल के उपयोग की जानकारी के लिए प्रयास हुए, तब इसे ब्रोंकाइटिस और टॉन्सिल जैसी बीमारी के लिए रामबाण माना गया। इसके अलावा सिर दर्द, गठिया और त्वचा रोग खत्म करने के भी गुण मिले हैं।