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जन्मदिन की खुशियों को समाज के बीच बांटकर मोना ने बांटे उपहार

जन्मदिन की खुशियों को समाज के बीच बांटकर मोना ने बांटे उपहार


देश की पहली महिला केश शिल्पी आयोग की अध्यक्ष रह चुकी है मोना सेन

रायपुर, 13 जून। छत्तीसगढ़ की जानी मानी फिल्म कलाकार, गायिका मोना सेन आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। गांव-गांव, शहर-शहर सभी जगह उनका डंका बजता है. ऐसा कोइ नारी सम्मान नहीं है जो उन्हें ना मिला हो। इस बार 12 जून को उन्होंने अपने जन्मदिन पर 12 केक नहीं काटा। बल्कि समाज के लोगों के लिए कुछ करने की इच्छा रखते हुए उपहार भेंटकर उनकी खुशियों में शामिल हुई। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सेन नाई समाज के महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष है।


ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण के दौरान वे लगातार पीड़ितों की सेवा में रात दिन जुटी रही। मोना हर वर्ष अपने जन्मदिन पर 12 नए कपड़े पहनकर 12 केक काटती रही है यह आयोजन उनके प्रशंसक किया करते थे। छत्तीसगढ़ी फिल्मो की चर्चित गायिका व डांसर मोना सेन के पास देश की पहली महिला केश शिल्पी आयोग की अध्यक्ष बनने का गौरव है। इसके साथ ही वे डॉ. रमन सिंह की सरकार के दौरान “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की छत्तीसगढ़ की ब्रांड एम्बेसडर रह चुकी है। वर्ष 2014 में मोना सेन को “मिनी माता” सम्मान से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें माता कौशल्या सम्मान, माता अहिल्या सम्मान, मिनीमाता सम्मान, नारी शक्ति सम्मान, निर्भया सम्मान, छत्तीसगढ़ की बेटी सम्मान, नोनी सम्मान, वीरांगना सम्मान, प्राइड आफ छत्तीसगढ़, बेस्ट एंकर आफ छत्तीसगढ़, छॉलीवुड स्टारडम ने पॉपुलर एक्ट्रेस आफ छत्तीसगढ़ अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही उन्हें बेस्ट एंकर, बेस्ट डांसर व बेस्ट सिंगर पुरस्कार भी मिला है।


बचपन से ही कला के क्षेत्र में थी रुचि

वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ सेन नाई समाज के महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष है। सुश्री मोना सेन ने बताया कि उनका जन्म कुरूद में एक शिक्षक के परिवार में हुआ। उनके पिता चाहते थे कि वे पढ़ लिखकर डॉक्टर या इंजीनियर बने। लेकिन उनकी रुचि बचपन से ही कला के क्षेत्र में थी। फिल्मो में धूम मचाने के बाद वे समाजसेवा में आने के बाद मोना सेन ने कई बच्चों को गोद लेकर उनकी पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था की। अब वह अपने समाज की सेवा में जुटी हुई है। मोना बच्चों में काफी लोकप्रिय है, वे जहां भी जाती है लोग उन्हें घेर लेते हैं। मोना कहती है कि समाजसेवा करने करने से उन्हें बहुत ही सुकून मिलता है। भविष्य में वे उन क्षेत्रों में जाएंगी जहां सरकारी मिशनरी नहीं पंहुच पाती।   

कला के क्षेत्र का परिवार ने भी किया था विरोध

मोना सेन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि नाचने गाने वाली लड़कियों को समाज न तब अच्छी नजर से देखता था और न आज देखता है। उन्होंने बताया कि जब मैं कला के इस क्षेत्र में आई तो शुरू में मेरे परिवार के लोगों ने भी इसका विरोध किया, लेकिन मेरी जिद के आगे उन्हें झुकना पड़ा। इसके बाद जब उन्होंने मेरा घर बसाने के लिए समाज में चर्चा शुरू किया तो उन्हें ज्यादातर लोगों से यह सुनने को मिला कि नाचने गाने वाली लड़की से कौन शादी करेगा। जिसके बाद मैंने शादी नहीं करने का फैसला लिया और फिर अपने काम मे जुट गई।