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डीजल की बढ़ती कीमत के बाद छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियां संकट में, मंडी से खोखली चार तो सूरजपुरा के लिए लगेंगे साढ़े तीन रुपए

डीजल की बढ़ती कीमत के बाद छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियां संकट में,  मंडी से खोखली चार  तो सूरजपुरा के लिए लगेंगे साढ़े तीन रुपए

भाटापारा, 10 जून। कमाई का एक बड़ा हिस्सा डीजल की खरीदी में लगने के बाद छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों का दम निकलने लगा है। भला हो उस कृषि उपज मंडी का, जिसके दम पर किसी तरह रोटी का इंतजाम किया जा रहा है अन्यथा हालात हाथ से बाहर जा चुके होते।

डीजल की रोजाना बढ़त ले रही कीमत के असर से अब ट्रांसपोर्ट कंपनियों के दम निकलने लगे हैं। उपाय था परिवहन दर में वृद्धि करने का लेकिन अब यह उपाय भी काम नहीं आ रहे हैं। काम की दूरी भी तेजी से कम होने लगी है, तो प्रयास इस बात की ज्यादा होती नजर आती है कि जरूरतें, एक परिवहन में पूरी हो जाए। यह बदलाव छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों को संकट में डाल रहा है।


पहला उपयोगकर्ता

किसान। अर्थव्यवस्था की धुरी। यह इस समय डीजल की बढ़ती कीमत का पहला शिकार हो चुका है। खरीफ की तैयारी करना है। इसलिए यही, ट्रांसपोर्ट कंपनियों का पहला उपयोगकर्ता  है। यह क्षेत्र ,इस समय जरूरत को देखकर ही अपनी उपज निकाल रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट कंपनियां हैरत में हैंं कि मात्रा अचानक सीमित कैसे की जा रही है।

यह भी हो रहे परेशान

डीजल की बढ़ती कीमत से क्षेत्र की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां बेहद परेशान हैं। कृषि उपज मंडी प्रांगण में खरीदी गई  उपज, यूनिट तक पहुंचाने में जो पैसे खर्च हो रहेंं हैं, उसकी मात्रा निरंतर बढ़त ले रही है। इसका असर भी छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर पड़ चुका है। परिवहन दरें बढ़ाने का विचार, एक कोने में इसलिए करना पड़ा क्योंकि बाजार में काम है नहीं।

इनसे मुकाबला कठिन

गांव से काम की तलाश में आए ट्रैक्टर मालिकों से छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों को कड़ी टक्कर मिल रही है। खेती के लिए खरीदी गई ट्रैक्टर को कई तरह की छूट मिली हुई है। इसलिए यह,  किसी भी कीमत को स्वीकार कर रहे हैं। इससे भी छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के सामने मुश्किलें आकर खड़ी हो चुकी हैं। दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह भी रोजी-रोटी की तलाश में है।


इस दर पर काम

अंचल में सबसे  ज्यादा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां ग्राम सूरजपुरा, खोखली में संचालित है। कृषि उपज मंडी से इन इकाइयों तक पहुंच के लिए जो परिवहन दरें तय की गई है उसे पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। फिर भी ग्राम सूरजपुरा के लिए प्रति  कट्टा 3 रुपए 50 पैसे से लेकर 4 रुपए लिए जा रहे हैं जबकि प्रति बोरा की परिवहन दर 5 से 6 रुपए बताई जा रही है। खोखली के लिए प्रति कट्टा 4 रुपए और प्रति बोरा परिवहन दर 5 से 7 रुपए लिए जा रहे है।

गांव से शहर तक का सफर

ग्रामीण क्षेत्र से कृषि उपज मंडी तक पहुंच के लिए दूरी , क्विंटल और प्रति कट्टा के मानक पर परिवहन दरें तय हैं। समय और मांग, इस क्षेत्र में दर 

तय करती है ।फिर भी औसतन 50 किलोमीटर के दायरे में  12 से 14 रुपए क्विंटल या 80 रुपए टन के हिसाब से परिवहन दर लिए जाने की मजबूरी है। बावजूद लाख कोशिश के ,छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों की मुश्किल बढ़ ही रहीं हैंं।

श्री मावली ट्रांसपोर्ट कंपनी के संचालक संजय अग्रवाल ने कहा कि  छोटी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के सामने मुश्किल हजार हैंं। डीजल की बढ़ती कीमत की वजह से काम- काज लगातार गिरावट की ओर है।