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संपादकीय : ऑनलाइन गुंडों का बहिष्कार हो! राज्य में आनलाइन ट्रोलर्स और गुण्डों ने संवाद के महात्मा गांधी मार्ग को ध्वस्त किया है!

संपादकीय : ऑनलाइन गुंडों का बहिष्कार हो! राज्य में आनलाइन ट्रोलर्स और गुण्डों ने संवाद के महात्मा गांधी मार्ग को ध्वस्त किया है!

अभी चंद दिनों पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी कि हाल के दिनों में जिस चीज का सबसे ज्यादा दुरुपयोग हुआ है, वह है अभिव्यक्ति की आजादी. सोशल मीडिया पर आये दिन इसके उदाहरण देखने को मिल जाते हैं जिसके बाद समाज उद्वेलित होता है और कानून व्यवस्था बिगड़ने की नौबत तक आ जाती है. ट्विटर, फेसबुक, वाटसअप आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे लोगों को चिह्नित करें और उसे इंटरनेट की दुनिया से बाहर करें, दंडित करें. सरकार को भी अब आनलाइन अपराधों के मामले में सख्त कदम उठाना चाहिए.

पूरे देश में एक मामला काफी चर्चा में है और वह यह कि भारतीय क्रिकेट के सितारे महेन्द्र सिंह धोनी की बेटी से एक 16 वर्षीय युवक ने बलात्कार करने की धमकी दी है. पुलिस को दिए बयान में इस युवक ने कहा कि वह इस बात से नाराज था कि धोनी ने मैच में रन नही बनाए इसलिए सोशल मीडिया पर आकर उसने यह धमकी दी. इसके बाद इसकी निंदा पूरे देश में की जा रही है. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि अवयस्क युवकों में ऐसी मनोवृत्ति पनप कैसे रही है! इसके लिए क्या संस्कार जिम्मेदार हैं या फिर आनलाइन यू टयूब पर उपलब्ध पोर्न वीडियो.

तो स्पष्ट है कि ये सूचना युग के ऑनलाइन गुंडे हैं, जो अदृश्य रह कर शिकार करते हैं. ये सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं. ये आमतौर पर कानून के शिकंजे से बचे रहते हैं. इन्हें ट्रोल्स कहते हैं. सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का एक हिस्सा बन चुका है, मगर ट्विटर और फेसबुक ऐसे घिनौने लोगों पर लगाम लगाने में नाकामयाब रहा है. आइटी एक्ट में ऐसे लोगों के लिए कड़े दंड का प्रावधान है, फिर भी ट्रॉलर्स छुट्टा घूम रहे हैं. राजधानी रायपुर सहित ऐसे जिले, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर है, वहां पर ऐसे मामले ज्यादा बढ़े हैं. दुर्ग, कोरबा, रायपुर, बिलासपुर, यहां तक कि जगदलपुर में भी ऐसे कई मामले सामने आए जब सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों से माहौल दूषित हुआ तो समाज उद्वेलित. धौनी की बेटी के बारे में जिस तरह की टिप्पणी एक यूजर ने की, वह कतई स्वीकार्य नहीं है. ऐसे व्यक्ति को हर हाल में सजा मिलनी चाहिए.



  • इसमें दो मत नही होंगे कि सोशल मीडिया, खासकर ट्विटर और फेसबुक कुत्सित और परपीड़क मानसिकता वालों का अड्डा बनता जा रहा है. सोशल मीडिया पर महिलाओं का पीछा करनेवाले, असभ्य भाषा का इस्तेमाल करनेवाले बढ़ते ही जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ में भी आनलाइन ट्रोलर्स और गुण्डों की संख्या बढ़ती जा रही है जिससे यदा—कदा माहौल अशांत होता रहता है. ताजा मामला कांकेर पत्रकार विवाद का है. आरोपियों ने अपने फेसबुक एकाउंट पर जो राजनीतिक टिप्पिणयां की, उससे माहौल और विषैला होता गया और अंतत: बड़ी घटना हो गई. हालांकि राजनीतिक रसूखदारों ने कानून अपने हाथों में लिया, जिसकी इजाजत नही दी जा सकती. प्रशासनिक संवादहीनता और लचर कानून व्यवस्था ने इस विवाद में आग में घी डालने का काम किया. कांकेर विवाद के पहले भी सोशल मीडिया पर आधारहीन टिप्पणियों के जितने मामले सरकार ने पकड़े हैं, वे दर्शाते हैं कि राज्य में आनलाइन ट्रोलर्स' रक्तबीज की तरह पनप रहे हैं.


आश्चर्य कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर ‘रेप कैसे करें’ जैसी पोस्ट वायरल हो गयी थी. पश्चिम बंगाल पुलिस ने इसकी जांच शुरू की है. पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में यह पोस्ट भारत के बाहर की लगती है और इसे कुछ लोकल सोशल मीडिया हैंडल्स ने शेयर किया है. महिला संगठनों ने इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट्स शेयर कर पुलिस से कार्रवाई की मांग की है. मौजूदा समय में सभी बड़े राजनीतिक दलों के पास ट्रोल्स की बड़ी फौज है. उनका काम है पार्टी के पक्ष में माहौल बनाना और इस बात का ध्यान रखना कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया में कोई नकारात्मक राय न बन पाए. आप टिवटर और फेसबुक पर कितना सक्रिय हैं, मैं नही जानता लेकिन कभी आकर देखिएगा कि वीआईपी और सेलिब्रिटिज तक अपने प्रतिपक्षियों के लिए अमर्यादित, फूहड़ टिप्पणी करने से नही चूकते. जाहिर इससे आने वाली पीढ़ी कुछ न कुछ सीख रही होगी तभी तो 16 साल का युवक एक 5 साल की अबोध बालिका से रेप करने की धमकी सरेआम दे रहा है! नवरात्रि शुरू होने में चंद दिन ही बचे हैं, ऐसी अबोध बेटियों को भी हम देवी की तरह पूजेंगे. तब ऐसी टिप्पणियां हमें विचलित करती हैं, चिंता में डालती हैं. निदान तो खोजना ही होगा. आनलाइन ट्रोलर्स और गुण्डों ने संवाद के महात्मा गांधी मार्ग को ध्वस्त किया है!