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कला एवं कारोबार में राजनीतिक विरोध नहीं हो

कला एवं कारोबार में राजनीतिक विरोध नहीं हो

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो दिन के दौरे पर मुंबई पहुंचे, जहां उन्होंने अभिनेता अक्षय कुमार से मुलाकात की। उनके मुंबई आने का मकसद नोएडा में बनने जा रही भारत की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक फिल्म सिटी है। उनके महाराष्ट्र के दौरे को लेकर योगी व महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना के नेताओं के बीच शाब्दिक वॉकयुद्ध छिड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और पार्टी के प्रवक्ता संजय राऊत ने मुख्यमंत्री योगी की जमकर आलोचना की। शिवसेना नेता फायर ब्रांड नेताओं के तौर पर जाने जाते हैं। इसी प्रकार राज्य व विशेषकर मुंबई के साथ योगी का लगाव भी क्षेत्रवाद तक सीमित है। शिवसेना नेता सीएम योगी के बारे में बयान दे रहे हैं कि वे मुंबई के फिल्म सिटी को यहां से उठाकर नोएडा ले जाना चाहते हैं, परायेपन के जैसी बयानबाजी एक ही देश में एक समान नागरिकों के प्रति सही नहीं।

फिल्म सिटी एक कारोबार है और सभी राज्यों को अधिकार है कि वे मनोरंजन के क्षेत्र में काम कर सकते हैं। मुंबई भी भारत में है और एक मुख्यमंत्री से लेकर देश के किसी भी कोने का आम व्यक्ति मुंबई आ सकता है और फिल्मी कलाकारों के साथ मुलाकात कर सकता है। संविधान के अनुसार प्रत्येक नागरिक को देश में कहीं भी आने-जाने की आजादी है। यदि योगी सरकार नोएडा में कोई प्रोजैक्ट शुरू करती है तब इसमें कुछ भी गलत नहीं, बल्कि इससे दूसरे राज्य के स्थानीय कलाकारों को भी काम करने का अवसर मिलेगा और रोजगार भी बढ़ेगा।

राजनीति में विरोध का बड़ा महत्व है और ये लोकतंत्र की आत्मा भी है लेकिन विरोध करने को शत्रुता की तरह समझना उचित नहीं। फिर भी मुंबई का अपना भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है। राजनीति में विरोध चलता रहता है लेकिन सामाजिक व संस्कृतिक क्षेत्र में टकराव सही नहीं। यूं भी कला भाईचारा, मानवता व सद्भावना की सीख देती है। कला के नाम पर वैर-विरोध नहीं होना चाहिए। राजनीतिक हितों के लिए समाज की सामाजिक समरसता की कुर्बानी न दी जाए। महज चुटकी बजाने से किसी शहर के काम को खत्म नहीं कर किया जा सकता।?देश सबका है और यह रंग-बिरंगे गुलदस्ते की तरह है। एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आने-जाने से लोगों का संपर्क ही बढ़ता है, जो देश के विकास में सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक सब तरह से सहायक व अच्छी बात है।