सहायक शिक्षक पद पर भर्ती हुए शिक्षकों को तृतीय वेतनमान स्वीकृत करने शिक्षामंत्री ने दिए निर्देश

सहायक शिक्षक पद पर भर्ती हुए शिक्षकों को तृतीय वेतनमान स्वीकृत करने शिक्षामंत्री ने दिए निर्देश

रायपुर। शिक्षामंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम ने प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग को   शिक्षकों को तृतीय समयमान वेतनमान स्वीकृत करने निर्देश दिया है।  शिक्षकों को 12 वर्षों के बाद न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। कोरोना संक्रमण काल में शिक्षामंत्री के पत्र से शिक्षकों में भारी उत्साह का संचार हुआ है।

      छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी एवं मीडिया प्रभारी विधुशेखर झा ने बताया कि शासकीय सेवकों को समयमान वेतनमान स्वीकृत करने का आदेश 28 अप्रैल 2008 को जारी हुआ था। शिक्षा विभाग ने 4 अगस्त 2010 एवं ट्राइबल विभाग ने 22 फरवरी 2011 को शिक्षक संवर्गों के लिए स्वीकृति आदेश जारी किया था। लेकिन आदेश में सहायक शिक्षक के पदनाम का उल्लेख नहीं था। उन्होंने बताया कि राज्य शासन ने 10 मार्च 2017 को सहायक शिक्षकों को 10 एवं 20 वर्ष सेवा पश्चात क्रमोन्नत वेतनमान देने का आदेश जारी किया था। 

  उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा के सदस्यों को तृतीय समयमान वेतनमान स्वीकृति आदेश 8 अगस्त 2018 को राज्य शासन ने जारी किया,जिसमें सहायक शिक्षकों के साथ पुनः न्याय नहीं हुआ।

 छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के आव्हान पर जारी नियाय पाती अभियान के आग्रह को संज्ञान में लेते हुए शिक्षामंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम ने सहायक शिक्षकों को तृतीय समयमान वेतनमान स्वीकृत करने निर्देश प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग को दिया है। जिसके कारण शिक्षकों में हर्ष व्याप्त है। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने पदोन्नति के मामले में भी शिक्षामंत्री से त्वरित कार्यवाही का मांग किया है।

         उन्होंने बताया कि सहायक शिक्षकों की निरंतर उपेक्षा एवं शिक्षकों के रुके हुए पदोन्नति को देने के मुद्दे पर,छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने राज्यव्यापी नियाय पाती अभियान 20 अगस्त 20 से प्रारम्भ किया। अभियान के प्रथम चरण में राज्य के 28 जिलों से,प्रभावित शिक्षकों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, शिक्षामंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम एवं प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग डॉ आलोक शुक्ला को हजारों की संख्या में पोस्टकार्ड लिखकर न्याय करने का आग्रह किया। द्वितीय चरण में जिला कलेक्टर के माध्यम से 9 सितंबर 20 को फेडरेशन के पदाधिकारियों ने ज्ञापन(नियाय पाती) दिया था।