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राजीव ग्राम दुगली क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण चालू, हाथियों की उपस्थिति से ग्रामीणों में भय

राजीव ग्राम दुगली क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण चालू, हाथियों की उपस्थिति से ग्रामीणों में भय

नगरी । विकासखंड नगरी में एक बड़ा क्षेत्र वनांचल से घिरा हुआ है आमतौर पर ग्रामीण वनों पर निर्भर हैं वनोपज संग्रहण कर परिवार चलाते हैं महुआ फूल संग्रहण का जैसे दौर खत्म हुआ। अब आया हरा सोना का दौर जिसे ग्रामीण तेंदूपत्ता कहते हैं।
 तेंदूपत्ता की गड्डी बनाकर ग्रामीण सैकड़ा की दर से बेचते हैं जिसे वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से खरीदी की जाती है पिछले वर्ष प्रति सैकड़ा 400 की दर से खरीदी हुआ था वहीं समितियों के द्वारा संग्रहण किए तेंदूपत्ता का दाम अच्छा आने से संग्राहकों को लाभांश भी अच्छा खासा मिलता है। राजीव ग्राम दुगली के वनोपज सहकारी समिति से जुड़े सदस्य मैनूराम यादव ने बताया इस साल तेंदूपत्ता का फसल पूर्व साल से कमजोर है अभी पत्ता सही स्थिति में नहीं आया है साथ ही ये भी बताया कि देश में चल रहे वैश्विक कोरोना महामारी एवं दुगली क्षेत्र में जंगली हाथियों के डेरा डालने की वजह से पत्ता तोड़ाई प्रभावित हुआ है। वहीं ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर जंगल क्षेत्र में जाकर तेंदूपत्ता तोड़ाई कर रहे हैं।
बीते तीन रात्रि दुगली के आबादी क्षेत्र में आकर जंगली हाथियों ने उत्पाद मचाया है जिससे ग्रामीण डरे हुए हैं।
बहरहाल इन जंगली हाथियों को क्षेत्र से दूर भगाने का प्रयास विभागीय अमला द्वारा अब तक किसी भी प्रकार से प्रयास नहीं किया गया है जिससे वनांचल क्षेत्र सहित दुगली आसपास में वन विभाग से खासी नाराजगी है।