कठिन दौर बड़ा अवसर लेकर आता है......... वैश्विक महामारी से निपटना एक चुनौती

कठिन दौर बड़ा अवसर लेकर आता है......... वैश्विक महामारी से निपटना एक चुनौती


बेमेतरा ! देश अपने कठिन दौर से गुज़र रहा है। जहां एक ओर वैश्विक महामारी से निपटना एक चुनौती है तो दूसरी गरीबों को दो वक्त की रोटी मुहैया कराना। पक्ष विपक्ष सब मिलकर काम कर रहे हैं।निश्चित ही कुछ कमिया थी या अब भी हैं। मगर ये वक्त कमियों को उजागर कर लाभ उठाने का नहीं बल्कि उनके समाधान सुझाने का है।

इस माहमारी ने विद्यार्थियों के जीवन को भी काफी हद कर प्रभावित किया है।जगह का बदलना हो या किताबों का ना मिलना। स्कूल कालेजों और कोचिंग सेंटरों का बंद हो जाना हो या प्रतियोगी परीक्षाओं का अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो जाना। हर परिस्थिति में अपने वजूद को समाज में स्थापित करने के लिए प्रयास करते प्रतिभागी को काफी हद तक निराश किया है।

गुजरते वक्त के बीच एक रिक्त स्थान जो मन को अच्छा ना लगे वह "अकेलापन" है।लेकिन जब व्यक्ति उस परिस्थिति में ढलकर अपने आप को खोजने लगे वह "एकांत" है।एकांत आवश्यक है।ताकि आप अपने भीतर के विकार को निकालकर सात्विकता को अपना सकें। ताकि आप अपने भीतर छिपी उन छोटी इच्छाओं को पूरा कर सकें जो जीवन की भागदौड़ में आपने अधूरी छोड़ दी थी।

इस एकांत ने बाहर जाने के दरवाजे को बंद कर अपने भीतर प्रवेश करने के दरवाजे खोल दिए हैं।तो उस दरवाजे को खोलकर अपने भीतर एक बार झांककर देखिए कि जीवन की इस आपाधापी में आपने कितनी इच्छाओं को समय के हाथो कुर्बान कर दिया।कितने प्रश्नों के कभी उत्तर ढूंढने का प्रयास नहीं किया। कितने लोगों के साथ कभी वक्त नहीं बिताया। इस समय का सदुपयोग कर इस कठिन वक्त को सुनहरे अवसर में तब्दील कर दीजिए।क्योंकि सफल देश,सफल समाज और सफल व्यक्ति वही होता है जो संकट को अवसर में बदलने की ताकत रखता हो.....।

chandra shekhar