breaking news New

धान में आभासी कंडुआ रोग किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती

धान में आभासी कंडुआ रोग किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती

नवागढ़/बेमेतरा- नवागढ़ के युवा किसान किशोर राजपूत ने बताया कि धान में आभासी कडुआ रोग वर्तमान में किसानों की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रही है । उपज की मात्रा एवं दानों की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करता है । ऐसे में किसानों को निपटने के लिए पर्याप्त जानकारी का होना बहुत जरूरी है 

इस तरह से करें रोग की पहचान

किशोर राजपूत ने कहा कि धान की दानों की दुग्धावस्था के तुरंत बाद जब दानें परिपक्व होने लगते हैं उसी समय यदि 1 से. मी. व्यास के नारंगी से पीले रंग के पुटिकाएं दिखाई देती हैं शुरुआत में एक दो की संख्या में होती हैं फिर पूरी फसल में फ़ैल जाती हैं। इनका रंग भी आगे चलकर हरे रंग और फिर काले रंग में बदल जाता है, फसल से दुर्गंध आने लगती है।

धान में लगने वाले इस रोग के कारण

उन्होंने बताया कि यह रोग मुख्यतया वैलोसिक्लेव विरेन्स नामक फफूंद से होता है, लेकिन यह तभी फसल में लगता है जब वातावरण में 90% से अधिक नमी रहती है और लगातार कई दिनों तक बादल छाए रहते हैं । रोग के लिए अनुकूल तापमान 25 - 30 डिग्री सेंटीग्रेड होता है ।

इस तरह से करें धान का बचाव

1. फसल की लगातार निरीक्षण करते रहना चाहिए जिससे शुरुआती क्षणों में ही रोग पहचान में आ जाए ।

2. इस रोग के एक बार हो जाने पर शुरुआती क्षणों में रोकने पर ही नियंत्रित किया जा सकता है इसलिए तुरंत गौवंश आधारित फफूंदनाशको का प्रयोग करके रोग को नियंत्रण करना चाहिए।

3. पूर्व से ही कुछ सावधानियों को अपनाने से भी रोग से फसल को बचाया जा सकता है जैसे- स्वस्थ बीज का चयन,

प्रतिरोधी किस्मों का चयन, खेत को बारी बारी से गीला और सूखा रखना, नाइट्रोजन उर्वरक का कम और सीमित प्रयोग करना, एक ही खेत में लगातार धान की फसल नहीं लेना, खेत की मेड़ों और नालियों में खरपतवारों को न रहने देना इत्यादि।

4. ग्रीष्कालीन गहरी जुताई करने से इसके फलनकाय नष्ट हो जाते हैं ।

3. ताम्र युक्त छाछ का 1लीटर प्रति एकड़ की मात्रा का प्रयोग करें।

4. गौमूत्र का 10 लीटर प्रति एकड़ की मात्रा का प्रयोग करें।