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"मां दंतेश्वरी हर्बल समूह नेआदिवासीवादियों के साथ मनाई 25 वीं वर्षगांठ, रजत जयंती समारोह मनाए जाने की घोषणा


प्रदेश के परंपरागत आदिवासी चिकित्सकों का चार दिवसीय सम्मेलन "मां दंतेश्वरी हर्बल समूह" के रायपुर परिसर में  हुआ संपन्न

  दंतेवाड़ा। "मां दंतेश्वरी हर्बल समूह ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन रायपुर में  किया गया। इस अवसर पर "मां दंतेश्वरी हर्बल समूह के संस्थापक डॉ राजाराम त्रिपाठी ने समूह के सभी साथियों को संघर्ष तथा सफलता के 25 साल पूरे होने पर बधाई देते हुए, रजत जयंती के समारोह की शुरुआत  की।  

प्रदेश के आदिवासी वैद्यों, परंपरागत चिकित्सकों के साथ  मिलकर रजत जयंती समारोह मनाया गया। इस रजत जयंती समारोह के अंतर्गत कई सकारात्मक आयोजन किए जाएंगे, जिसकी पृथक रूप से घोषणा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में "संवाद- जनजातीय सम्मेलन" कार्यक्रम के अंतर्गत एक  चार दिवसीय शिविर आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश भर से आए जनजातीय समुदाय के परंपरागत चिकित्सकों ने भाग लिया ! कार्यक्रम का आयोजन बेहद सादे एवं गरिमामय माहौल में कोरोना की सावधानियां बरते हुए किया गया। 

उद्घाटन व्याख्यान "मां दंतेश्वरी हर्बल ग्रुप" की "बौद्धिक संपदा अधिकार" विशेषज्ञ एडवोकेट अपूर्वा त्रिपाठी के द्वारा, परंपरागत चिकित्सा पद्धति (टीएचपी) तथा परंपरागत चिकित्सकों के "बौद्धिक संपदा अधिकार"  विषय पर दिया गया। इसके पश्चात मुख्य वक्ता  डॉ एचडी गांधी के द्वारा परंपरागत चिकित्सा पद्धति पर विशेष व्याख्यान दिया गया।  

कार्यक्रम के दूसरे चरण में बस्तर, नारायणपुर, कांकेर सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से इस चार दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने हेतु आए हुए 30 वरिष्ठ परंपरागत चिकित्सकों को हर्बल वैज्ञानिक डॉ. राजाराम त्रिपाठी द्वारा बस्तर से शुरू किये गये बहुचर्चित सफल माडल "उच्च लाभदायक बहुस्तरीय खेती" (उलाबखे) में आस्ट्रेलियन टीक के साथ काली मिर्च की खेती और एवं उसके साथ ही की जा रही हल्दी,सफेद मूसली, स्टीविया तथा अन्य दुर्लभ जड़ी बूटियों की अंतर्वर्ती जैविक खेती का  दृश्य श्रव्य माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

 कार्यक्रम के समापन समारोह की अध्यक्षता डॉ राजाराम त्रिपाठी ने की।डॉक्टर त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारा आयुर्वेद जनजातीय समुदाय के परंपरागत वनऔषधि ज्ञान का ऋणी है। हम अभी भी जनजातीय समुदायों से कई असाध्य रोगों की बेहद सहज सरल उपचार सीख सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि जनजातीय समुदायों का परंपरागत ज्ञान भंडार बहुत तेजी से विलुप्त होते जा रहा है जिसके संरक्षण संवर्धन तथा दस्तावेजीकरण की महती आवश्यकता है। इस दिशा में "मां दंतेश्वरी हर्बल समूह" ने इस दिशा में पिछले 25 वर्षों में कुछ सार्थक पहल की है, पर अभी भी हमें बहुत कुछ करना शेष है।  राज्य तथा केंद्र सरकार को भी इस पर तत्काल ध्यान देते हुए नट इसमें जरूरी सहयोग समर्थन देना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि मां दंतेश्वरी हर्बल समूह की पहल पर जल्द ही कोंडागांव में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा उड़ीसा के जनजाति परंपरा का चिकित्सकों का  संयुक्त महासम्मेलन आयोजन किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने डॉक्टर गांधी से सक्रिय सहयोग की अपील की।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण तथा शिविर भागीदारी हेतु धन्यवाद ज्ञापित प्रदान करते हुए कहा कि आज से आप सभी परंपरागत चिकित्सकों की जिम्मेदारियां और अधिक बढ़ गई अब आपको ही परंपरागत ज्ञान के इस अनमोल ज्ञान के खजाने को सहेजना, सवारना है।

संगोष्ठी टाटा स्टील के तत्वावधान में डॉ एचडी गांधी, तथा अपूर्वा त्रिपाठी के संयोजन में बस्तर के "मां दंतेश्वरी हर्बल ग्रुप" के सहयोग से एमडीएचपी प्रधान कार्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ में संपन्न हुआ।