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संसदीय सचिव विनोद चन्द्राकर की शिकायत पर मुख्य सचिव और सरकार ने चुप्पी साधी..नकली रेमडेसिविर बेचने के मामले में घेरा था पाटनवार अफसर को..प्रवक्ता विकास तिवारी का मुददा भी फुस्स!

संसदीय सचिव विनोद चन्द्राकर की शिकायत पर मुख्य सचिव और सरकार ने चुप्पी साधी..नकली रेमडेसिविर बेचने के मामले में घेरा था पाटनवार अफसर को..प्रवक्ता विकास तिवारी का मुददा भी फुस्स!

जनधारा समाचार
रायपुर. रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी को लेकर संसदीय सचिव और विधायक विनोद चन्द्राकर द्वारा मुख्य सचिव को की गई लिखित शिकायत पर अब तक कोई कार्यवाही नही हुई है. चंद्राकर ने स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव से भी की थी लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ नही मिल सका. चंद्राकर का आरोप है कि रेमडेसिविर की कालाबाजारी खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी पाटनवार के संरक्षण में हुई है और इससे सरकार की बदनामी हुई है.


उपरोक्त संबंध में जब संसदीय सचिव और विधायक विनोद चन्द्राकर से फोन पर ताजा अपडेट लिया गया तो उन्होंने कहा कि पखवाड़ा भर पहले उन्होंने लिखित शिकायत देते हुए जांच की मांग की थी लेकिन अभी तक मामला ठण्डे बस्ते में पड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि मेरे विधानसभा इलाके में इंजेक्शन की कालाबाजारी जमकर हुई. एक—एक इंजेक्शन 15—15 हजार में बेचा गया, एक डॉक्टर भी पकड़ाया, उसके बाद उन्होंने संज्ञान लिया था लेकिन अभी तक उस पर ना जांच हुई और ना ही दोषियों पर कार्यवाही. अब वे पुन: इस विषय पर आगे बढ़ेंगे.

मुख्य सचिव से की थी शिकायत, अब तक तो कुछ नही हुआ

संसदीय सचिव विनोद चन्द्राकर ने अपनी शिकायत में कहा है कि विगत अप्रैल और मई के पहले सप्ताह में जब कोरोना चरम पर था। लोगों की मौत हो रही थी और कोरोना संक्रमित के परिजन जब रेमडेसिविर के लिए भटक रहे थे, तब छत्तीसगढ़ के बाजार में नकली रेमडेसिविर की जमकर कालाबाजारी खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में हुई है. स्वास्थ्य विभाग का संसदीय सचिव होने के नाते विनोद चंद्राकर ने अफसरों की मिलीभगत को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मुख्य सचिव अमिताभ जैन सहित आला अधिकारियों से शिकायत की थी कि खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारी निजी अस्पताल और दवा कंपनी के सीएंडएफ संचालकों के साथ सांठगांठ करके रकम कमा रहे हैं और उन्होंने रायपुर से पूरे प्रदेश में नकली रेमडेसिविर की सप्लाई की है. इसमें डिस्ट्रीब्यूटर्स की मिलीभगत भी है.

फर्जी मरीज बनाकर बेचे इंजेक्शन : विनोद चंद्राकर

संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर का यह भी आरोप है कि सरकार ने खाद्य एवं औषधि विभाग को रेमडेसिविर की खरीदी और अस्पताल में मरीजों को लगे रेमडेसिविर का हिसाब रखने का निर्देश दिया था, लेकिन अधिकारियों ने फर्जी मरीज बनाकर रेमडेसिविर को अपने कब्जे में लिया और बाद में उसे महंगे दाम पर जरूरतमन्दों को बेचा गया.
जानते चलें कि नकली रेमडेसिविर खरीदी के मामले में राजधानी के माना थाने में शिकायत दर्ज है. जांच में पता चला है कि मध्य प्रदेश में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने वाले सूरत स्थित आदिनाथ डिस्पोेबल को ही रायपुर की डायमंड एजेंसी ने रेमडेसिविर की खरीदी का आर्डर दिया था. आदिनाथ डिस्पोेबल कंपनी के संचालक हैं, जो देशभर में एक लाख नकली रेमडेसिविर इंजेक्शंस सप्लाई करने के रैकेट में मुख्य आरोपी हैं. डायमंड एजेंसी ने कंपनी को आठ लाख एडवांस दिया, लेकिन मध्य प्रदेश में रैकेट पकड़े जाने के बाद सप्लाई नहीं हो पाई. सूत्रों के मुताबिक गुजरे एक मई को रैकेट पकड़े जाने से पहले लाखों रुपये बिना बिल के रेमडेसिविर की सप्लाई छत्तीसगढ़ में हो चुकी थी। इस सप्लाई में रायपुर के सहायक खाद्य एवं औषधि नियंत्रक और आला अधिकारियों की भूमिका है.

दो आइएएसों को मिली थी जिम्मेदारी

जानते चलें कि रेमडेसिविर खरीदी के लिए शासन ने प्रदेश में कोरोना के इलाज में इस्तेमाल हो रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर हो रही कालाबाजारी को देखते हुए सरकार ने विशेष सचिव हिमशिखर गुप्ता को नोडल अधिकारी बनाया था और उनको रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति और राज्य के भीतर वितरण के लिए स्वास्थ्य विभाग और कलेक्टरों के साथ समन्वय बनाना कर काम करने की जिम्मेदारी दी गई । इसके साथ ही सरकार ने मुंबई में आइएएस भास्कर विलास संदीपन और हैदराबाद में अरुण प्रसाद को तैनात किया था।

मामले की जांच छह बिंदुओं पर हो : चंद्राकर

महासमुंद क्षेत्र के विधायक व स्वास्थ्य विभाग के संसदीय सचिव विनोद चंद्राकर ने छह बिंदुओं पर जांच की मांग की है। जिसमें दवा कंपनी से सीएंडएफ के पास कितनी रेमडेसिविर आई। सीएंडएफ ने किन-किन डिस्ट्रीब्यूटर्स को किस-किस कंपनी का इंजेक्शन सप्लाई किया। डिस्ट्रीब्यूटर्स ने किस अस्पताल को सप्लाई किया। अस्पताल में इंजेक्शन सप्लाई किस आधार पर की गई और कहीं ज्यादा कहीं कम सप्लाई के लिए दोषी कौन है। रायपुर और आसपास के में भी इंजेक्शन की सप्लाई और मरीजों की संख्या के आधार पर उपयोग की जांच की मांग की है।

नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन की भूमिका की जांच हो : वीरेंद्र नामदेव

स्वास्थ्य चेतना विकास समिति छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व कर्मचारी नेता वीरेन्द्र नामदेव ने महासमुंद क्षेत्र के विधायक और स्वास्थ्य विभाग के संसदीय सचिव विनोद चन्द्राकर द्वारा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों के मिलीभगत से छत्तीसगढ़ राज्य में नकली रेडमेशिविर की बिक्री किये जाने के लगाये आरोप पर गम्भीर चिंता जताई है और मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री से तुरंत संसदीय सचिव की शिकायत पर कार्यवाही करने की मांग की है. श्री नामदेव ने के लचर प्रशासन और उनकी भूमिका पर सवाल उठाया है।

कांग्रेस प्रवक्ता का उठाया मामला भी फुस्स

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विकास तिवारी ने राजधानी में रेमडेसिविर की कालाबाजारी करते हुए अस्पताल के दो दलालों को रंगेहाथों पकड़ा था. तिवारी ने एक वीडियो जारी कर दलालों को एक्सपोज किया था और सरकार से मांग की थी कि ऐसे दलालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए. दरअसल विकास तिवारी के एक रिश्तेदार का इलाज चल रहा था जिसे इंजेक्शन की जरूरत थी. उसने दो लोगों से संपर्क किया तो दो दलालों ने उन्हें एक इंजेक्शन 15 हजार में बेचा. यह पूरा मामला मीडिया में भी काफी उछला था. हालांकि उसके बाद अन्य मामलों में सरकार ने दलालों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया था लेकिन तिवारी का एक्सपोज किया मुददा हवा हवाई हो गया.