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गर्म हुई पंखा, कूलर और एसी की हवा: सुपा, बुहारी, टब और घमेला भी लगे तपने

गर्म हुई पंखा, कूलर और एसी की हवा: सुपा, बुहारी, टब और घमेला भी लगे तपने

प्लास्टिक के दाने में लगी आग

बिलासपुर, 5 मार्च। सीजन सिर पर। ऐसे समय में प्लास्टिक पर एंटी डंपिंग फीस की अनिवार्यता से महाराष्ट्र की प्लास्टिक इकाइयों का दम निकलने लगा है। आत्मनिर्भर भारत बनने की चाह वैसे भी पहले से ही बाधा बनती रही है। अब नए फीस की बाध्यता के बाद प्लास्टिक के दाने की कीमत आसमान छूने लगी है। असर, प्लास्टिक से बनने वाले सामान की बढ़ती कीमत के रूप में सामने आ चुका है। 10 माह में किलो पीछे 50 रुपए की तेजी के बाद प्लास्टिक दाना 72 रुपए की जगह 122 रुपए किलो पर पहुंच गया है।

सांसत में आ चुकी हैं पंखे, कूलर, एसी और टीवी बनाने वाली इकाइयां। बंद होने की तैयारी में हैं धमेला, बुहारी, टब और दैनिक उपयोग के काम आने वाली सामग्री बनाने वाली इकाइयां क्योंकि प्लास्टिक के दाने की बढ़ी हुई कीमतों के असर से दाने से बनने वाली सामग्रियां भी महंगी कीमत में उपभोक्ताओं तक पहुंच रही हैं। खरीदी के लिए, टूटते बाजार को देखते हुए महाराष्ट्र की प्लास्टिक सामान बनाने वाली इकाइयों में तालों का लगना चालू हो चुका है। असर घरेलू मांग पर भी पड़ता दिखाई देने लगा है, जहां लगभग सभी सामान तेजी की चपेट में आ चुके हैं।


इसकी वजह से तेजी

आत्मनिर्भर भारत के प्लान को अच्छा तो बताया जा रहा है लेकिन लागू करने के तरीके को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि योजना के बाद प्लास्टिक के दाने के आयात पर एंटी डंपिंग फीस जैसी अनिवार्यता ने आयात पर ब्रेक तो लगाया ही साथ ही देसी कंपनियों ने अपने उत्पादन की कीमतों में वृद्धि करनी चालू कर दी है। यदि यह जरूरी था तो निर्यात की अनुमति भी बंद की जानी थी, जिससे बाजार में संतुलन बना रहता।

आई तेजी 50 रुपए की

एंटी डंपिंग फीस की अनिवार्यता के बाद घरेलू मांग पूरा करने के लिए प्लास्टिक दाने की खरीदी, अब 122 रुपए किलो की दर पर करनी पड़ रही है। इसके पहले तक यह 72 रुपए किलो पर आसानी से उपलब्ध हो रहा था। कोरोना काल में वैसे भी मांग कम है इसलिए कंपनियां प्लास्टिक के दाने की खरीदी, ऊंची कीमत पर करने से पीछे हट रहीं हैं। इसका असर उपभोक्ता बाजार में तेजी के रूप में पहुंच चुका है। रही-सही कसर, समय पर उपलब्धता नहीं होना भी पूरा कर रही है।

इसलिए इनमें तेजी

प्लास्टिक के दानों की कीमत में किलो पीछे एक साथ 50 रुपए की करने गर्मी के बाद सबसे ज्यादा असर पंखे, कूलर, एसी, टीवी, वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, बुहारी, प्लास्टिक के टब, खिलौने, पिचकारिया और घरेलू सजावट के सामग्रियों की कीमतों पर पड़ने लगा है। ऊपर से शादियों का सीजन और भवन निर्माण का काम भी जोरों से चल रहा है। जहां प्लास्टिक से बनी सामग्रियों की सबसे ज्यादा मांग रहती आई है।

बजाज स्टोर के संचालक मोहन बजाज ने बताया कि प्लास्टिक के दाने में रिकॉर्ड 50 रुपए किलो की तेजी के बाद घरेलू उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतें बढ़ रहीं हैं। इसमें फिलहाल मंदी के संकेत नहीं हैं क्योंकि आयात पर एंटी डंपिंग फीस की अनिवार्यता लागू की जा चुकी है।