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इप्टा रायपुर ने आबिद अली की याद में रखी जूम मीटिंग .. रंगकर्मी, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मियों एवं मित्रों ने आबिद अली को किया याद.. नम हुई आखें..

इप्टा रायपुर ने आबिद अली की याद में रखी जूम मीटिंग .. रंगकर्मी, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मियों एवं मित्रों ने आबिद अली को किया याद.. नम हुई आखें..

रायपुर, 27 जून। सुपरिचित रंगकर्मी और पत्रकार आबिद अली का निधन 15 मई, 2021 को कोरोना की दूसरी लहर में हो गया था। इप्टा में चालीस साल से अधिक अपनी सक्रियता से आाबिद ने जो पहचान एक कलाकार , गायक , संगठनकर्ता के रूप में बनाई थी , वह अविस्मणीय थी। उनकी पत्रकार के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान थी । वे दैनिक भास्कर समेत कई नामी अखबारों में एडीटर भी रहे थे।

IPTA-PWA रायपुर ने आज शाम 6 बजे से आबिद अली की याद में जूम मीटिंग रखी गयी। जिसमें देश के रंगकर्मी, साहित्यकार, संस्कृतिकर्मियों एवं मित्रों ने आबिद अली को अलग-अलग जगह से याद किया।  जूम मीटिंग का संचालन बालकृष्ण अय्यर ने किया उन्होंने कहा कि आबिद भाई लगता नहीं कही गए, वो हमेशा हमारे साथ है।


दिल्ली से सुप्रसिद्ध आलोचक अपूर्वानंद ने आबिद से जुड़ी यादों को साझा किया। उन्होंने कहा कि आबिद को इस तरह से नहीं जाना था, वे समाज में अच्छा सोचने वाले व्यक्ति थे। गुना से सुप्रसिद्ध कवि और रंगकर्मी हरिओम राजोरिया ने कहा कि मेरा रंगकर्म से जुडने में आबिद का योगदान रहा। भोपाल से डॉ. शौकत आलम ने कहा कि आबिद से जुड़ी अपनी रायपुर की यादें साझा की कि किस तरह से मेडिकल में रहते हुए उनसे जुड़े और उनके साथ काम किया।इसी तरह की बातें डॉ. विप्लव बंधोपाध्याय ने कही, उन्होंने आबिद के साथ अपनी यादे साझा की। अभिनेता शहनावाज प्रधान ने कहा आबिद मेरे भाई लगते थे उन्होंने मुझे नाटकों में लाने काफी मदद की, मेरे काम को हमेशा देखते थे...उन्होंने मुंबई तक आने में मेरी मदद की। सुप्रसिद्ध फिल्म लेखक अशोक मिश्रा ने आबिद अली के काम की सराहना की। भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर ने भी जुड़कर आबिद अली को याद किया। व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने भी आबिद अली को याद किया।

मिनाज असद -जूम मीटिंग में आबिद अली को याद करते हुए मिनाज असद ने कहा कि आज हम लोग इक्कठा हुए है, ये ऐसी सभा है जो हम सोच नहीं सकते थे. दूसरी लहर में हमने अपनों को खोया, आबिद जी के जाने ने हम सबको को हिला कर रख दिया। में आबिद से कॉलेज के समय से जुड़ा हुआ था। उसकी याद में कुछ बोलू तो आबिद एक दोस्त की तरह मेरे साथ था आबिद जर्नलिस्ट थे, एक्टर थे । में और आबिद हमेशा एक साथ दिखाई दिया करते थे, शायद ही कभी ऐसा हुआ हो की लोगो को मै और आबिद साथ न दिखे । मेरी आधी पहचान आबिद था। आबिद मुश्किल से मुश्किल घड़ी में मेरे साथ था एक दोस्त की तरह, एक गाइड की तरह वो हमेशा मेरे साथ खड़ा था। आबिद लोगो को सुनता था ,खुद्दार किसम का आदमी था। अगर कोई मुझे कुछ बोल दे तो मुझे इतना बुरा नहीं लगता था जितना आबिद को लगता । उनका शो कबीरा खड़ा बाजार में बहुत लोकप्रिय था। एक कलाकार का जाना एक म्यूजिक डायरेक्टर का जाना एक आर्टिस्ट का जाना एक खालीपन छोड़ गया है , पता नहीं ये खालीपन कब भरेगा।


सुभाष मिश्र (प्रधान संपादक, आज की जनधारा) - आबिद और मिनाज जैसे विक्रम और बेताल। वो दोनों हमेशा साथ रहते थे। आबिद से मेरी मित्रता 40 साल से भी पुरानी है। आबिद में जितनी प्रतिभा थी वो बाहर नहीं आ पाई। जब में आबिद को याद करता हूँ तो आबिद एक मल्टी टैलेंटेड इंसान थे मगर संकोच के कारण या परिस्तिथियों के कारण वो टैलेंट बाहर नहीं आ पाया। आबिद को कभी चीज़ों के प्रति मोह नहीं था। आबिद का जाना हम सभी के लिए व्यक्तिगत स्तर पर छवि है। हम आगे जाके पूरी कोशिश करेंगे की आबिद का काम अमर रहे , 'कबीरा चला बाजार' को लोगो तक पहुँचाएंगे। आखिर में यही कहूंगा आबिद थोड़ा थोड़ा हम सभी के पास है।

राकेश कुमार (राष्ट्रीय महासचिव इप्टा) - कोरोना महामारी में हमारे देश में लाखो लोगो ने जान गवाई है। इस साल हमने बहुत महत्वपूर्ण साथियो को खोया, ललित सुरजन जी , आटले जी , महेंद्र मिश्रा जी जैसे लोगो को खोया। आबिद का पूरा चिंतन चाहे पत्रकारिता में या संगीत में रहा। इतने खुश मिजाज लोग मेने कम ही देखे है , मेने उनको कभी गुस्से में नहीं देखा , जैसे भी परिस्थिति हो वो हमेशा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहते थे।

डॉ अलोक वर्मा - आज का दिन जब हम साथी आबिद को याद करते हुए बैठे है , साथी आबिद का जाना में कभी स्वीकार नहीं पाया हूँ । उनका इप्टा के रोल से सब परिचत रहे है , मगर हम आबिद से भीतर से जुड़े थे में वो बताना चाहुगा। आबिद शायरना मिजाज के थे, वे धुन बना लिया करते थे फिर उसमे शायरी किया करते थे। आबिद में ऐसे बहुत साड़ी खूबियां थी जिसकी वजह से वो लोगो से जुड़े हुए थे। वे सदा हमेशा चौकन्ना रहा करते थे और लोगो की सुना करते थे। मुझे याद है जब साथी आबिद की तबियत ख़राब थी तो उन्होंने मुझे फ़ोन किया चुकी मै डॉक्टर रहा हु मेने उनका इलाज शुरू किया , उनका इलाज घर पर शुरू हो गया था, वो मुझे रिपोर्ट भेजा करते थे संवाद करते थे , बोलते थे मेरे इत्ते दोस्त है मुझे कुछ नहीं होगा, मगर वो चले गए। साथी आबिद हमको अक्सर याद आते रहेंगे।

मणिमय मुख़र्जी (छत्तीसगढ़ इप्टा के अध्यक्ष)- ये हमारे लिए सोचना भी विचित्र लग रहा है की आबिद हमारे बीच में नहीं है, उनके जाने से छत्तीसगढ़ इप्टा में एक शुन्य स्थान पैदा हो गया है कब तक भरेगा कह नहीं सकते।

ईश्वर दोस्त - हमने कबीर को तो नहीं देखा मगर जब हम आबिद को देखते थे तो लगता था कबीर ऐसे ही होंगे। आबिद के साथ में रायपुर का एक अंग चले गया। कितनी यादें आबिद के साथ रही है। आबिद को देख के कभी नहीं नहीं लगता था वो परेशां है, मगर उनके खास ही जानते थे की उनको कुछ दिक्कत भी हो सकती है। आबिद के बिना रायपुर की कल्पना करना बहुत मुश्किल है। आबिद हमारे मन के क्षितिज में हमेशा रहेंगे।

जूम मीटिंग में हिमांशु राय, ऊषा आठले, तनवीर अख्तर, कमल शर्मा, शाहनवाज, अशोक मिश्र, मणिमय मुखर्जी, हरिओम राजौरिया, अमिताभ पांडेय के साथ रायपुर इप्टा-प्रलेस के साथियों ने अपनी स्मृति साझा की।  करीब 65 लोग इस जूम मीटिंग से जुड़े और आबिद अली को याद किया और कहा कि आबिद अली के कार्यों का डाक्यूमेंटेशन होना चाहिए और उनकी संगीत रचना सुरक्षित रखना चाहिए। जूम मीटिंग में मणिमय मुख़र्जी द्वारा 2-2 मिनट की डाक्यूमेंट्री दिखाई गई। अंत में इप्टा छ.ग के महासचिव अरुण काठोटे ने सभी सदस्यों का आभार प्रकट किया।