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पैसा लेकर वोट देने वाला.. एसडीएम का ऑडियो वायरल

पैसा लेकर वोट देने वाला.. एसडीएम का ऑडियो वायरल


मामला-बंद पड़ी बड़ी करेली रेत खदान चालू करवाने, ग्रामीणों के साथ हुई बैठक

मुख्यमंत्री से ग्रामीणों ने की एसडीएम पर कार्यवाही की मांग

संजय जैन

धमतरी, 23 मई। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में स्वच्छ प्रशासन के लिये कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही है। लेकिन इस प्रयास को प्रदेश में बैठे कुछ अधिकारी विफल करने का प्रयास कर रहे हैं। नौकरशाहों का व्यवहार निश्चय ही सरकार की छवि को खराब कर रहा है। उधर सूरजपुर में कलेक्टर द्वारा एक युवक को दुव्यर्वहार कर थप्पड़ मारने की घटना जब वायरल हुई तो उसे लेकर श्री बघेल ने उक्त कलेक्टर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। लेकिन इस घटना ने समूचे प्रदेश में एक नया माहौल पैदा कर दिया है। इसकी स्याही अभी सूख भी नहीं पाई थी कि कुरूद अनुविभाग में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी सुनील शर्मा के द्वारा ग्राम बड़ी करेली में विवादित रेत खदान को लेकर ग्रामीणों एवं राजस्व अधिकारियों के बीच जो बैठक हुई उसमें रेत ठेकेदार के पक्ष में बोलते हुए ग्रामीणों को ही यह कहकर धमकी दी कि तुम सभी पैसा लेकर वोट देते हो, ज्यादा तीन-पांच करोगे तो तुम्हें गैर जमानती अपराध में पुलिस पकड़कर ले जायेगी, फिर तुम लड़ते रहना। अनुविभागीय अधिकारी के इस कथन से ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने इस अधिकारी के स्थानांतरण एवं कार्यवाही की मांग की है। यहां यह बताना जरूरी है कि उपरोक्त ऑडियो की सत्यता को आज की जनधारा प्रमाणित नहीं करता। बहरहाल प्रदेश के मुख्यमंत्री से ग्रामीणों ने उक्त एसडीएम पर कार्यवाही करने की मांग की है।

प्रदेश के सूरजपुर जिले के कलेक्टर रणवीर शर्मा ने एक नवयुवक के साथ अभद्र व्यवहार किया और उसका मोबाईल पटककर थप्पड़ मारने की घटना का वीडियो वायरल हुआ जिसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने उक्त कलेक्टर को मंत्रालय में बुला लिया और उनके स्थान पर नये कलेक्टर की नियुक्ति की है। ऐसे घटनाक्रम प्रदेशवासियों की जुबान पर चर्चित रहा जिससे शासन की छवि खराब हुई। अधिकारीवाद प्रदेश में हावी हो चुका है, इसमें कोई संदेह नहीं है। कोरोना काल के चलते ऐसे अधिकारियों के बर्ताव शासन को लगातार बदनाम करने में सहायक साबित हो रहे हैं और विपक्ष को ऐसे मुद्दे जोर-शोर से उठाने का मौका दे रहे हैं। धमतरी जिले में भी कुरूद अनुविभागीय अधिकारी सुनील शर्मा द्वारा ग्राम बड़ी करेली में रेत खदान से संबंधित उपजे विवाद को लेकर बैठक ली गई। बैठक में राजस्व के कुछ अधिकारियों का नेतृत्व अनुविभागीय अधिकारी कुरूद कर रहे थे जबकि ग्रामीणों की ओर से वहां पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मगरलोड कर रही थीं। इस अवधि में राजस्व अमला ने ठेकेदार की हिमायत करते हुए उसके द्वारा खुदाई की जा रही रेत एवं परिवहन को उसे किये जाने का संपूर्ण अधिकार बताते हुए उपस्थित समूह के समक्ष यहां तक कहा डाला कि तुम पैसा लेकर वोट देने वाले लोग, रेत खदान के मामले में टंाग मत अड़ाओ क्योंकि यह शासन का निर्देश है और इस रेत परिवहन से शासन को राजस्व की प्राप्ति होती है। इस पर ग्रामीणों ने कहा कि संबंधित सफेदपोश ठेकेदार द्वारा रेत उत्खनन के नियम-कायदों को बलाये ताक रखते हुए खुदाई की जा रही है जिसके कारण ग्रामीणों के पूर्वजों के नर कंकाल बाहर आ रहे हैं। इससे समूचे ग्राम में असंतोष व्याप्त है क्योंकि उक्त नर कंकाल के निकलने से संबंधितों के आस्था को ठेस पहुंच रही है। 


अनुविभागीय अधिकारी द्वारा आयोजित बैठक में रेत ठेकेदार के नियम विरूद्ध खुदाई किये जाने की जानकारी देते हुए उन्हें बताया गया कि उक्त ठेकेदार निर्धारित मापदंड के विपरीत अधिक खुदाई कर नदी को इतना गहरा कर दिया है कि वहां यदि ग्राम के इंसान, जानवर कोई धोखे से भी चला गया तो उसका बच कर निकलना नामुमकिन है। इसके अतिरिक्त रकबा से अधिक भाग में जाकर खुदाई की जा रही है। साथ ही साथ वहां नर्सरी में लगाये गये पौधों को भी नेस्तनाबुद कर दिया गया। इन सभी महत्वपूर्ण एवं विचारणीय पहलू को लेकर अनेकों ट्रेक्टरों में सवार होकर भारी संख्या में ग्रामीणजन कलेक्टोरेट पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने अपनी बात रखी। कलेक्टर ने उनकी समस्या को सुनते उचित कार्यवाही का आश्वासन देकर उन्हें विदा किया। यह मामले को लेकर प्रदेश के पूर्व केबिनेट मंत्री अजय चंद्राकर ने भी ग्रामीणों का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी समस्या बताने का अधिकार है। इस तरह यह विवाद चलते रहा। रेत खदान बंद हो गई। चूंकि यह रेत खदान रसूखदार रायपुर के एक नेता की खदान है, इसलिये बंद खदान को चालू करने के उद्देश्य से अनुविभागीय अधिकारी कुरूद के नेतृत्व में राजस्व अमला के कुछ अधिकारी ग्राम बड़ी करेली पहुंचे जहां पहले से ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, ग्रामीणों को लेकर कुरूद एसडीएम का इंतजार कर रही थीं। वहां पहुंचने पर सीईओ ने अनुविभागीय अधिकारी को ग्रामीणों की समस्या से अवगत कराया। इसी अवधि में ग्रामीणों ने अपनी अपनी शिकायतों का उल्लेख करते नाराजगी जाहिर की। उक्त बैठक का पूरा ऑडियो बनाकर इस प्रतिनिधि को भेजा भी गया है जिसमें ग्रामीणों के साथ अनुविभागीय अधिकारी द्वारा जिस प्रकार व्यवहार कर धमकाया गया है, उससे वहां मामला और उलझकर रह गया है।

मगरलोड क्षेत्र से आये ऑडियो में वार्तालाप का पूरा अंश कैद है जिसमें अनुविभागीय अधिकारी कुरूद द्वारा कहा गया है कि शासन के पास बहुत पॉवर है। नेतागिरी करोगे तो गैर जमानती अपराध में तुम्हें अंदर होना पड़ेगा। अगर इसकी पुष्टि करना है तो कौहाबाहरा और नगरी के ग्राम में देखो और पता लगाओ कि आज वे लड़ाई के बाद किस स्थिति से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उस वक्त कुरूद एसडीएम, नगरी अनुविभाग में एसडीएम थे। ग्रामीणों ने एसडीएम को बताया कि हम ठेकेदार को नहीं जानते, न ही हमने उनकी ट्रकें रोकी हैं। लेकिन लगातार जेसीबी, चैन माउंटेन मशीन से हाईवा को भरकर सैकड़ों ट्रिप खदान से निकाली गई है। लगभग 8 हजार ट्रिप हाईवा से रेत का परिवहन किया गया है। लेकिन 3 हजार ट्रिप परिवहन की पर्ची कटी है जिससे शासन को 5 हजार ट्रिप हाईवा से ले जाने वाली रेत का रॉयल्टी चोरी किया गया है। इस पर एसडीएम भड़क गये। 

ग्रामीणों ने जांच समिति बनाकर इसकी जांच करने की बात कही और खनिज विभाग की कार्यशैली पर उंगलियां उठाते हुए सहायक खनिज अधिकारी, निरीक्षक को तत्काल बदले जाने की मांग की क्योंकि इन्हीं के द्वारा खदानों में जो नियम लागू होना चाहिये, उसका पालन ठेकेदार बिल्कुल नहीं कर रहे हैं। न खदानों में रेंप है, न वृक्षारोपण, न ही आवश्यक दवाई सामग्री है। इसके बाद भी एसडीएम द्वारा नियम में रहने की सलाह दी जा रही है, इस बात से ग्रामीण बेहद खफा हैं। ग्रामीणेां द्वारा टेंडर की कॉपी, शपथ पत्र की भी मांग की गई और जो सीमांकन हुआ है, उसकी कॉपी भी दिलाये जाने की मांग की। इस पर अनुविभागीय अधिकारी ने ग्रामीणों से कहा कि वे आरटीआई लगाकर उक्त दस्तावेज प्राप्त कर सकते हैं। इस बात को उन्होंने जान बूझकर ग्रामीणों को दिग्भ्रमित करने के उद्देश्य से कही। उन्हें मालूम है कि 15 जून से वर्षा कालीन सत्र लागू हो जायेगा। रेत खदानें बंद होने की कगार पर पहुंचेगी और 30 दिन के भीतर आरटीआई का जवाब मिले, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। इस तरह ग्रामीणों के साथ की गई वार्ता में अनेक ऐसे तथ्य कहे गये हैं जिससे बड़ी करेली के ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश, अधिकारी की चाटुकारिता का उपज चुका है। अब देखना है कि राज्य शासन कलेक्टर रणवीर शर्मा की तर्ज पर अनुविभागीय अधिकारी सुनील शर्मा पर क्या कार्यवाही होती है। इस मामले को लेकर अनुविभागीय अधिकारी कुरूद से उनका पक्ष लिये जाने का प्रयास किया गया परंतु उन्होंने मोबाईल रिसीव नहीं किया। 

इस संबंध में कलेक्टर जयप्रकाश मौर्य से दूरभाष पर चर्चा किये जाने पर उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं को जागरूक करने के समय इस प्रकार की बातें लोगों को समझाई जाती है कि मतदाता किसी लालच में न आकर अपना निष्पक्ष वोट दें। लेकिन जैसा कि आपने मुझे बताया कि मगरलोड में रेत खदान संबंधी बैठक के दौरान एसडीएम सुनील शर्मा के द्वारा इस प्रकार की बातें कही गई हैं, ऐसे बयानों से बचना चाहिये।