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राम नाम हथियार नहीं,आत्मीय पुकार है

राम नाम हथियार नहीं,आत्मीय पुकार है

ध्रुव शुक्ल

राम का नाम एकाधिकार का नहीं, मनुष्य सहित सभी प्राणियों के स्वराज्य का प्रतीक है। यह नाम भारत के तत्वचिंतन में ब्रह्म स्वरूप है जिसमें समग्र जीवन की बस्तियाँ बसी हैं। इस नाम में विषमता और भेदभाव की कोई जगह नहीं है। यही राम नाम पौराणिक आख्यान में मनुष्य के सौभाग्य के रूप में मनुजरूप ईश्वर का गुणगान बनकर हमारी प्रार्थनाओं में समा गया है। महाकवि तुलसीदास इस राम नाम को ऐसी स्वयं प्रकाशित मणि कहते हैं जो हमारी जीभ की देहरी पर रखी है और जो हमारी देह के अंतरंग और बहिरंग को प्रकाशित करती है। राम के नाम को मानस रोगों के उपचार की औषधि के रूप में भी सदियों से भजा जा रहा है। महात्मा गांधी उसे इसी तरह भजते रहे। यह राम नाम इतना निर्भार है कि सबका भार उठा सकता है। यह नाम किसी की व्यक्तिगत सत्ता का नहीं बल्कि सृष्टि के  संपूर्ण सत्य का प्रतीक है। सदियों से राम के भक्त उनके नाम के प्रति आभार ही प्रकट करते आये हैं। किसी को शत्रु मानकर इस नाम को हथियार की तरह नहीं उठाया जाता, सबके प्रति आत्मीय पुकार का नाम ही राम है।