ब्लैक डेथ महामारी के लिहाज से काफी कम है कोरोना

 ब्लैक डेथ महामारी के लिहाज से काफी कम है कोरोना


नईदिल्ली। दुनिया की नामचीन हस्तियों से कोरोना संक्रमण को लेकर हर पहलू पर चर्चा की जा रही है। प्रोफेसर युवाल नोआ ने कहा कि कोरोना महामारी मध्य काल में आयी ब्लैक डेथ महामारी के लिहाज से काफी कम है. जिस महामारी ने  दुनिया में 50  लाख जिन्दगिया छीन ली थी। हमारे पास  इसे रोकने के साइंटिफिक तरीके हैं. लेकिन मध्य काल के ब्लैक डेथ महामारी के वक्त किसी को कुछ नहीं पता था, लोग उसे ईश्वर का दंड मान रहे थे। 

युवाल हरारी ने कहा कि कोरोना महामारी के खिलाफ दुनिया अब भी एक साथ आ सकती है. चीन, अमेरिका को सुझाव दे सकता है।  एक-दूसरे देशों में मेडिकल टीम और मेडिकल किट्स भेजी जा सकती हैं।  

 प्रोफेसर युवाल ने 2014 में आये इबोला संकट का उदाहरण दिया।  उन्होंने कहा कि इबोला के वक्त अमेरिका ने आगे आकर लीड किया।  इससे पहले 2008 की आर्थिक मंदी में भी अमेरिका ने लीड किया, लेकिन आज जब पूरी दुनिया कोरोना से जूझ रही है तो कोई ग्लोबल ताकत इससे लड़ने के लिए नेतृत्व करती नजर नहीं आ रही है। 

 दुनिया एक-दूसरे की मदद के बजाय आरोप-प्रत्यारोप में लगी है।  चीन, अमेरिका पर वायरस फैलाने का आरोप लगा रहा है तो अमेरिका चीन पर. उन्होंने कहा कि इससे काम नहीं चलेगा।  कोरोना ऑपरेशन से इस महामारी को हराया जा सकता है। 

उन्होंने  भारत का जिक्र करते हुए  कहा कि भारत में अल्पसंख्यक समुदाय पर वायरस फैलाने का आरोप लगाकर भी बदनाम करने की कोशिश की गई जो कि एक गलत तरीका है।  उन्होंने कहा  कि नफरत के बजाय सहयोग से इस बीमारी को रोका जा  सकता है। चीन दूसरे देशों की मदद कर रहा है।  चीन अगर शुरुआत में जानकारियां साझा कर देता तो शायद हालात अलग हो सकते थे।  लेकिन मैं इस बात से खुश हूं कि चीन  मेडिकल मदद भी दूसरे मुल्कों में भेज रहा है। 

 प्रोफेसर ने अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए  कहा कि आज अमेरिका बस अपने बारे में सोच रहा है, जबकि उसे ग्लोबर लीडर के तौर पर सामने आना चाहिए था।   पिछले कुछ दिनों में अमेरिका की लीडरशिप पर भरोसा कम हुआ है। 

युवाल ने  कहा कि अगर हर देश वैक्सीन बनाने में लग जाये तो इससे काम नहीं चलेगा।  कोई देश वैक्सीन बनाए और फिर उसे सारे देश खरीदें. ऐसे ही आर्थिक दिशा में भी एक-दूसरे का साथ दें।  

उन्होंने इजरायल का एक उदाहरण  देते हुए कहा -धर्म या धार्मिक नेता कोरोना का इलाज नहीं कर सकते हैं, बल्कि साइंटिस्ट ही इससे बचा सकते हैं।  उन्होंने बताया कि  इजरायल में चुनाव के दौरान धार्मिक पार्टी के एक नेता ने जनता से कहा कि आप हमें वोट दीजिए, आपको कोरोना से बचाएंगे. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि उस पार्टी के नेता जो कि इजरायल के हेल्थ मिनिस्टर भी थे वो कोरोना संक्रमित हो गए। 

प्रोफेसर युवाल ने कहा कि मुश्किल हालात के बाद भी लोगों में सहयोग का भाव देखा गया है।   मुझे उम्मीद है कि जब कोरोना का  संकट खत्म हो जाएगा तो लोग एक-दूसरे के साथ आएंगे। 

chandra shekhar