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स्वास्थ्य केन्द्रों में स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मचारी की उपस्थिति करें सुनिश्चित-कमिश्नर

स्वास्थ्य केन्द्रों में स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मचारी की उपस्थिति करें सुनिश्चित-कमिश्नर

जगदलपुर।  बस्तर संभाग के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों में स्वास्थ्य अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति 24 घंटे सातों दिन होनी चाहिए, ताकि आवश्यक आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मरीजों को परेशानी न हो।


बुधवार को कमिश्नर श्री श्याम धावड़े ने कमिश्नर कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित संभाग स्तरीय स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उक्त निर्देश दिए। बैठक में कमिश्नर श्री धावड़े ने सीजीएमएससी, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा निर्माण की जा रही स्वास्थ्य केन्द्रों की प्रगति की समीक्षा कर समय-सीमा में कार्य को पूर्ण करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा भवन विहीन स्वास्थ्य केन्द्र, अस्पतालों में रनिंग वाटर की सुविधा, सोलर लाईंट की व्यवस्था की भी समीक्षा की। बैठक में संयुक्त संचालक डाॅ. गोटा, संभाग के सभी जिलों के सीएमएचओ, डीपीएम सहित लोक निर्माण विभाग, क्रेडा विभाग, सीजीएमएससी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधिकारी उपस्थित थे।

कमिश्नर श्री धावड़े ने संभाग के सभी जिलों में तृतीय-चतुर्थ श्रेर्णी के रिक्त पदों की भर्ती हेतु विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड के माध्यम से भर्ती अभियान के कार्य को जल्द से जल्द पूर्ण कर पदस्थापना के लिए जिला स्तर पर काउंसिलिंग कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

बैठक में कमिश्नर द्वारा गर्भवती पंजीयन, गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व जांच, मातृ-शिशु मृत्यु दर, मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक, मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान, मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान, टीकाकरण अभियान की समीक्षा किया गया।

कमिश्नर श्री धावड़े ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए लोगों में जागरूकता अभियान करने सहित स्वास्थ्य कर्मियों को मुख्यालय में निवास करने के निर्देश दिए।

संस्थागत प्रसव हेतु स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध संसाधनों की जानकारी लेकर उन्होंने ग्रामीण स्तर पर बेहतर से बेहतर सेवाएं देने के साथ-साथ बस्तर अंचल में हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर में सभी प्रकार की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक के लिए समर्पित वाहन, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, दवाई की उपलब्धता, आवश्यक स्वास्थ्य जांच हेतु टेस्ट किट की स्थिति, ओपीडी की स्थिति की समीक्षा की।

उन्होंने शासन की प्राथमिकता वाले हाट बाजार क्लीनिक की सेवाएं ग्राम स्तर पर आयोजित बाजारों में निर्धारित रूट चार्ट के आधार पर सेवाएं देने के निर्देश दिए। उन्होंने गर्मी से होने वाले बीमारियों व उल्टी दस्त के लिए मितानिनों के पास आवश्यक दवाई किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने कहा।

साथ ही बीच-बीच में दवाई की उपयोगिता व सुरक्षा के संबंध में मितानिनों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। कमिश्नर ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र में सर्पदंश से संबंधित आवश्यक दवाईयां की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए, सर्पदंश के संबंध में बैगा गुनिया का सम्मेलन करने कहा। उन्होंने आरबीसी 6-4 से संबंधित प्रकरणों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी त्वरित देने की आवश्यकता बताई।

कमिश्नर  धावड़े ने मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान में डोर टू डोर सर्वे करवाने के साथ-साथ मच्छरदानी का वितरण-उपयोग करने, मलेरिया की दवाई उपलब्धता सुनिश्चित करने, मलेरिया प्रभावित  क्षेत्रों को चिंहाकित कर निवासियों का सतत निरीक्षण कर मितानिनों व स्वास्थ्य केन्द्रों के कर्मियों को प्रशिक्षण और शिविर लगाकर जागरूकता अभियान करने के निर्देश दिए।

उन्होंने मुख्यमंत्री प्रवास से पूर्व सभी व्यवस्था दुरुस्त करने और शासन की  महत्वपूर्ण प्राथमिकता वाले योजनाओं का क्रियान्वयन मैदानी स्तर पर करने के निर्देश दिए। साथ ही अस्पतालों में जेनेरिक दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टरों द्वारा लिखे जाने दवाइयों में जेनेरिक दवाई को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

इसके अलावा सुपोषण अभियान के तहत लक्ष्य निर्धारित कर कुपोषण को दूर करने के प्रयास करने की आवश्यकता बताई। जिसमें सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जोड़कर किया जाए। बच्चों को दी जा रही अण्डा केला और रेडी टू ईंट का उपयोग हितग्राही को ही मिलना सुनिश्चित किया जाए।

सुकमा, कोण्डागावं और दन्तेवाड़ा जिले के डीपीओ, सीपीडीओ को सुपोषण अभियान में और बेहतर कार्य करने के लिए निर्देश दिए। साथ ही सभी जिलों में लक्ष्य निर्धारित कर कुपोषण दर में कमी लाने के निर्देश दिए। बैठक में कमिश्नर द्वारा जीवन दीप समिति की स्थिति, स्वास्थ्य केन्द्रों की साफ-सफाई की व्यवस्था, कंडम गाड़ी का निलामी, वाहनों की उपलब्धता के साथ-साथ मेडिकल काॅलेज कांकेर और डिमरापाल से संबंधित आवश्यक संसाधनों के संबंध में संज्ञान लिया।