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स्कूल संचालक का आरोप-बिना जानकारी दिए बंद कर दिया स्कूल, अब नहीं चलाएंगे, बुरे फंसे जिला शिक्षा अधिकारी

स्कूल संचालक का आरोप-बिना जानकारी दिए बंद कर दिया स्कूल, अब नहीं चलाएंगे, बुरे फंसे जिला शिक्षा अधिकारी


राजनांदगांव, 31 मई। ग्रीन फिल्ड सीआईटी स्कूल के संचालक ने जिला शिक्षा अधिकार कार्यालय में पत्र भेजकर बड़ा खुलासा कर दिया कि स्कूल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ने बिना प्रबंधन को जानकारी दिए ही स्कूल बंद कर दिया, जिसके लिए शिक्षा विभाग जिम्मेदार है और अब स्कूल प्रबंधन स्कूल संचालित नहीं करेगा।

स्कूल संचालक ने गंभीर आरोप लगा कर जिला शिक्षा अधिकारी की मुश्किलें बढ़ा दिया है, क्योंकि अब तक पालकों यह जानकारी दिया जा रहा था कि स्कूल संचालकों ने अचानक स्कूल बंद कर दिया है और इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी ने दो बार डीपीआई रायपुर भेज कर स्कूल का नाम आरटीई पोर्टल से भी हटा दिया गया था।

पुलिस भी कर रही है जांच

इस पूरे मामले में पुलिस विभाग भी शिक्षा विभाग से जानकारी ले रहा है, क्योंकि पालकों की लिखित शिकायत है कि जिला शिक्षा अधिकारी की घोर लापरवाही और उदासीनता के चलते उनके बच्चों का जीवन व भविष्य बर्बाद हो गया है। शिक्षा का अधिकार कानून के अंतर्गत गरीब बच्चों को इस स्कूल में जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा प्रवेश दिलाया था और इन बच्चों को कक्षा बारहवीं तक शिक्षा पूर्ण कराने की जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी है, लेकिन गरीब बच्चे विगत एक वर्ष से शिक्षा पाने भटक रहे है।

बालक कल्याण समिति ने भी लिया संज्ञान

बालक कल्याण समिति भी इस बात को लेकर गंभीर है और उनका भी कहना है कि बच्चों को किसी अन्य स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाना चाहिए, जिसको लेकर समिति ने जिला शिक्षा अधिकारी को दिनांक 5 अप्रैल को पत्र भी जारी किया है। कलेक्टर ने भी इस मामले में कई पत्र जिला शिक्षा अधिकारी को प्रेषित कर चुके है, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया। पालकों का कहना है कि उनके बच्चों को शिक्षा से वंचित रखकर उनके बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन किया गया है जिसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी दोषी है और डीईओ के विरूद्ध सख्त कार्यवाही किया जाना चाहिए।

छग मानव अधिकार आयोग में हुई शिकायत

पालकों ने इस मामले की पूरी जानकारी छग मानव अधिकार आयोग को भी प्रेषित कर दिया है, क्योंकि उनका कहना है जिला शिक्षा अधिकारी ने उनके बच्चों के मौलिक अधिकार का हनन किया है। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अब घिरते नजर आ रहे है, क्योंकि मामला बच्चों के जीवन व भविष्य से जुड़ा हुआ है और इन गरीब बच्चों को स्वयं शिक्षा विभाग ने इस स्कूल में प्रवेश दिलाया था और गरीब बच्चे विगत एक वर्ष से शिक्षा से वंचित है और शिक्षा पाने जिला शिक्षा अधिकारी से आग्रह कर रहे है, लेकिन इन गरीब बच्चों को किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं दिलाया गया।