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निगम.मण्डल में नियुक्तियों का विरोध शुरू..अरूण भद्रा ने सदस्य पद लेने से इंकार किया..अर्चना उपाध्याय का भी विरोध..अनिल सिंग और संजय गुप्ता को भी कांग्रेसी ढूंढ़ रहे..सोशल मीडिया पर निकलने लगी भड़ास

निगम.मण्डल में नियुक्तियों का विरोध शुरू..अरूण भद्रा ने सदस्य पद लेने से इंकार किया..अर्चना उपाध्याय का भी विरोध..अनिल सिंग और संजय गुप्ता को भी कांग्रेसी ढूंढ़ रहे..सोशल मीडिया पर निकलने लगी भड़ास

रायपुर. निगम मण्डल में नई नियुक्तियों के बाद विरोध के स्वर फूट पड़े हैं. सोशल मीडिया में कार्यकर्ता और नेता अपनी भड़ास निकाल रहे हैं. कुछ अपमान का मुददा बना रहे हैं तो कुछ ने विधायकों और उनके रिश्तेदारों को ही पद बांटने पर नाराजगी जताई है. दलबदलुओं को पद दिए जाने को लेकर भी विरोध की चिंगारी फूट पड़ी है.

हालांकि इनमें से अधिकांश खुलकर सामने नही आए हैं लेकिन बहुतों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर करना शुरू कर दी है. संजय पाठक ने फेसबुक पर लिखा कि निगम मण्डल में कई नियुक्त्यिां शीर्ष नेतृत्व का गलत निर्णय साबित हुई हैं. लल्लू सिंह ने लिखा कि आप सबको पद प्रतिष्ठा नही दे सकते, उसे हम मानते हैं लेकिन उनके सम्मान को तो मत छीनिए. एक अन्य कार्यकर्ता ने लिखा कि जो विधायक बने गए, उन्हें निगम मण्डल में भी जगह दी जा रही है. बाकी लोग क्या पार्टी कार्यालय में गमला घास छीलेंगे.

वरिष्ठ कार्यकर्ता पुष्पेन्द्र परिहार तो कई दिनों से भड़ास निकाल रहे हैं. उन्होंने फेसबुक पर सीधे सीएम से गुहार लगाई कि भूपेश जी कितना और मेरा अपमान करोगे. सौ खून आपको माफ करता हूं. मेरे नेता हो आप.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरूण भद्रा को उम्मीद थी कि उन्हें किसी निगम मण्डल में चेयरमेन बनाया जाएगा लेकिन मात्र सदस्य बनाकर खानापूर्ति कर दी गई लेकिन उन्होंने इसे प्रेम से खारिज कर दिया है. वाटसअप पर संतुलित टिप्पणी करते हुए उन्होंने गुस्सा जाहिर किया. लिखा कि 'मैं पद के लिए पार्टी से नही जुड़ा. सीएम सर ने मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी, उसे पूरी तरह से निभाया. इसलिए नये शासकीय पद व शासकीय सुविधा को स्वीकार नही कर रहा हूं. यह किसी समर्पित साथी को देना ही सार्थक होगा.' भद्रा को कांग्रेस में 40 साल से ज्यादा हो गए. पार्टी ने उन्हें बस्तर संभाग की जिम्मेदारी दी थी और वहां पर छप्परफाड़ विजय मिली थी. असम चुनाव में भी अरूण भद्रा ने महीनों समय और पसीना बहाया लेकिन उन्हें मात्र सदस्य बनाने से निराशा हुई है.

विरोध का स्वर कोरबा जिले से फूटा है जहां राज्य महिला आयोग की सदस्य नियुक्त अर्चना उपाध्याय की खिलाफत शुरू हुई है. वर्षों से कांग्रेस का दामन थामने वाली अर्चना उपाध्याय ने बीते वर्षों में कांग्रेस पार्टी से किनारा कर जोगी कांग्रेस का दामन थाम लिया था लेकिन उन्हें पद दे दिया गया. पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं नगर पालिक निगम में तीन बार के कांग्रेस पार्षद रहे महेंद्र सिंह चौहान ने इस पर अपना विरोध दर्ज करा दिया है. उन्होंने तो सोशल मीडिया में यह तक कह दिया कि भले उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाए लेकिन उन्हें अर्चना मंजूर नहीं।

जोगी कांग्रेस में रहे या वहां से आकर कांग्रेस में पुन: आने वाले नेताओं को लाल बत्ती मिलना भी कांग्रेस के वफादार सिपाहियों को हजम नही हो रहा. इनका कहना है कि क्या पार्टी को धोखा देना, दलबदल करना, बडे नेताओं की चापलूसी करना ही एकमात्र योग्यता रह गई है क्या.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक दुबे जिन्होंने पार्टी को 50 साल से ज्यादा दे दिए, को सदस्य तक नही बनाया गया. जबकि वे सालों पीसीसी के उपाध्यक्ष, सेवा दल के पदाधिकारी, पूर्व पार्षद भी रह चुके हैं. हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि मैं पद के लिए पार्टी में नहीं हूं. मुख्यमंत्रीजी के विवेक का फैसला है. उन्होंने जरूर कुछ न कुछ अच्छा सोच रखा होगा.

जो नेता विधायक बन गए, उन्हें भी आयोग मण्डल में अध्यक्ष और अन्य पद दिये जा रहे हैं. कई जगहों पर उनकी पत्नियां संगठन में काबिज हैं या फिर उन्हें चेयरमेन सहित कई पदों पर बिठाया गया. ऐसे में कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेताओं ने अंदर ही अंदर विरोध किया है. खुलकर कोई सामने नही आ रहा लेकिन चुनाव में पार्टी के लिए यह बड़े खतरे से कम नही है.