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रविवार बंद-व्यापारियों में जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोश

रविवार बंद-व्यापारियों में जिला प्रशासन के खिलाफ आक्रोश

संजय जैन
धमतरी । पिछले साल से कोविड कोरोना-19 के नाम पर समूचा देश अपने को सुरक्षित करने के लिये अनेक कवायद कर शासन के द्वारा निर्देशों का खुल्लमखुल्ला पालन करते हुए आया है। इस लंबी-चौड़ी अवधि में व्यवसाय पूरी तरह चरमरा गई है। गरीब, मध्यम श्रेणी के लोगों को समाजसेवी संस्थाओं द्वारा मदद के लिये हाथ बढ़ाया गया। देश के विभिन्न शहरों में लॉकडाउन किया गया। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में भी कोविड कोरोना को लेकर समय समय पर लॉकडाउन किया गया। ईश्वर की कृपा से छत्तीसगढ़ में अभी ऐसे मरीजों की संख्या कम पाये जाने पर प्रशासन द्वारा लॉकडाउन में ढील दी गई। लेकिन अभी भी अन्य जिलों की तुलना में धमतरी में लॉकडाउन के नाम पर रात में आदेश जारी होता है। बिना परामर्श के ऐसे आदेशों से व्यवसाय जगत से जुड़े लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। बताया जाता है कि रविवार के स्थान पर मंगलवार बंद का निर्णय जिला प्रशासन द्वारा जो पूर्व में लिया गया था वह बदलने के पीछे सत्तापक्ष से जुड़े एक कांग्रेस नेता का दबाव बताया जा रहा है।
    कोरोना काल को लेकर जिले में लगाये गये लॉकडाउन का पालन करने के लिये व्यापारी वर्ग ने प्रशासन को पूरी तरह सहयोग किया। उन्होंने मास्क, सेनेटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिये अपने ग्राहकों से अपील की। व्यवसाय पूरी तरह लगभग दो साल से चरमरा गया है जिससे व्यापारी वर्गों में चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। पिछले दिनों जिला प्रशासन द्वारा आदेश जारी कर रविवार को पूर्णत: लॉकडाउन को बदलकर मंगलवार कर दिया गया। इसके बाद पुन: रात्रि में आदेश जारी कर फिर से रविवार को ही पूर्णत: लॉकडाउन की घोषणा की गई जबकि प्रशासन द्वारा पूर्व में जो लॉकडाउन की घोषणा की गई थी, उससे मध्यम एवं गरीब श्रेणी के लोगों को काफी खुश देखा गया था क्योंकि यहां वर्षों से ईतवारी बाजार नामक साप्ताहिक बाजार लगते आया है जिसकी ख्याति आसपास के जिलों तक चर्चित है। इस बाजार से अपना व्यवसाय कर अनेकों को जीविकोपार्जन का जरिया मिलता रहा है। लेकिन फिर से रविवार को लॉकडाउन की घोषणा से ऐसे छोटे व्यवसायियों में काफी नाराजगी देखी गई है। इनका कहना है कि पिछले साल से कोरोना के नाम पर हमारा व्यवसाय पूरी तरह ठप्प हो गया है और हमें अपना परिवार के जीविकोपार्जन हेतु कोई दूसरा जरिया नहीं है। वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के लोगों को धरना, प्रदर्शन, किसी भी वक्त करने की पूरी तरह छूट दी गई है। ऐसे धरना प्रदर्शन, आंदोलन में लॉकडाउन के साथ साथ धारा 144 का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। इसके लिये कोई समय सीमा अथवा रोक जिला प्रशासन द्वारा नहीं लगाई गई है। जबकि रोजी रोटी के लिये छोटे व्यापारियों के जीविकोपार्जन का एक प्रमुख स्त्रोत में आने वाले रविवार को आयोजित होने वाले साप्ताहिक बाजार को लॉकडाउन के परिधि में ला दिया गया है।
    जिला प्रशासन के द्वारा अचानक ऐसे आदेशों को निकालकर शहर के व्यापारियों में ऊहापोह की स्थिति निर्मित की जा रही है जबकि लॉकडाउन के लिये जो आदेश निकाला जाता है और उसमें जो बदलाव किया जाता है, उसके लिये पूर्व में आम लोगों को मुनादि अथवा अपील के माध्यम से सूचना दी जाती है। लेकिन तत्काल आदेश निकलने से व्यापारियों के साथ साथ ईतवारी बाजार जैसे साप्ताहिक बाजार में आने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। धमतरी शहर का व्यवसाय इसी प्रकार पूरी तरह से चरमरा गया है। उसे पटरी में लाने के लिये ऐसे आदेश के चलते काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अन्य बड़े जिलों में लॉकडाउन को पूरी तरह अनलॉक कर दिया गया है। लेकिन धमतरी जिले में लॉकडाउन लगाकर लोगों को अभी भी इसके दायरे में लाया जा रहा है। ऐसे लोगों का कहना है कि अन्य जिलों की तरह धमतरी को भी अनलॉक किया जाना चाहिये ताकि जिले के व्यापारियों को व्यवसाय करने में किसी प्रकार की कोई रूकावट पैदा न हो और उनका व्यवसाय पटरी पर आ जाये। पिछले वर्ष से आज तक धमतरी जिले के व्यवसायी कोरोना के नाम पर अपने व्यवसाय में घाटा सहते आये हैं जिसे पूरा करने के उद्देश्य से इन्हें व्यवसाय करने की पूरी तरह छूट मिलनी चाहिये। वैसे भी व्यापारियों द्वारा ग्राहकों से कोरोना से बचने सेनेटाइजर, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग की अपील लगातार की जा रही है जिसकी वजह से धमतरी जिले में कोरोना के मामले कम हुए हैं।
    धमतरी शहर के व्यापारियों ने कोरोना कोविड-19 के लिये जिला प्रशासन की अपील पर लगातार सहयोग किया है और अब भी चेंबर्स ऑफ कॉमर्स जैसे संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासन को पूरी तरह सहयोग करने का आश्वासन दिया है। जो भी ग्राहक उनके प्रतिष्ठानों में आते हैं, उन्हें प्रशासन की अपील से अवगत कराते हुए मास्क लगाये जाने की हिदायत दी जा रही है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा व्यवसायियों से बिना परामर्श के ऐसे अचानक निकलने वाले आदेश से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। व्यवसायियों का कहना है कि पिछले वर्ष से अभी तक हमारा व्यवसाय पूरी तरह टूट चुका है। अनेक व्यापारियों को कर्ज लेकर अपना व्यवसाय चलाना पड़ रहा है। जिस तरह व्यवसायी प्रशासन को सहयोग कर रहे हैं, उसी तरह व्यवसायियों के परामर्श के पश्चात ऐसे आदेश निकाला जाना चाहिये, जो कि नहीं किया जाता। इससे व्यापारी और प्रशासन के मध्य दूरियां बढऩे की संभावना है। गौरतलब रहे कि जिले में रविवार को पूरी तरह लॉकडाउन का आदेश पूर्व में निकाला गया था जिसे बदलकर मंगलवार किया गया। अब फिर से मंगलवार के स्थान पर रविवार को पूर्ण लॉकडाउन के आदेश से छोटे व्यवसायियों के मध्य जीविकोपार्जन की समस्या फिर से आ खड़ी हुई है जिसे लेकर शहर में चर्चाओं का दौर प्रारंभ है। इन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि अन्य जिलों की तरह धमतरी जिले को भी अनलॉक किया जाये। मंगलवार के स्थान पर रविवार को शहर बंद के निर्णय को लेकर जिला कलेक्टर पी एस एल्मा से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष लिये जाने का प्रयास किया गया परंतु उनसे संपर्क नहीं हो पाया।