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उपचुनावों में भाजपा को 15 से ज्यादा सीटों पर बढ़त, सिंधिया के तीन समर्थक मंत्रियों का भविष्य दांव पर

  उपचुनावों में भाजपा को 15 से ज्यादा सीटों पर बढ़त, सिंधिया के तीन समर्थक मंत्रियों का भविष्य दांव पर


प्रणव पारे
भोपाल।
मध्यप्रदेश में अब तक के सबसे चर्चित और बड़ी संख्या में हुए विधानसभा उपचुनावों को लेकर कयासों और अटकलों का दौर जारी है। राजधानी भोपाल में जहाँ अचानक निर्दलीय विधायकों कि पूछ-परख अचानक बढ़ गई वहीं सत्ता के गलियारों में बैठकों और मेल मिलाप का दौर भी तेज़ होता दिखाई पड़ा। मध्यप्रदेश में पहले से ही दोनों दल एक दूसरे पर खरीद फरोख्त का आरोप लगा रहे हैं। इस बीच दोनों ही दल अपने अपने विधायकों को सम्हालने में लगे हुए हैं, भाजपा भी इस बार सतर्क नजऱ आ रही है वहीं कांग्रेस अपने विधायकों को संभालने में यदि छोटी का ज़ोर लगाती हुई नजऱ आ रही है।
10 तारीख को उपचुनावों के नतीजे घोषित होने वाले है, राजनैतिक पंडित और दूसरे सूत्र इस बार जीत-हार का जो मंत्र बता रहे हंै उसमें कुल 28 सीटों में से 17 सीटें भाजपा  को और करीब 11 सीटों पर कांग्रेस पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को जीत हासिल होगी ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि ऐसा माना जा रहा है की इस बार बहुजन समाज पार्टी धमाल मचा सकती है लेकिन उसकी सम्भावना मतदान के बाद से नदारद दिख रही है, अब पूरा का पूरा गणित और कयास वोटिंग के ट्रेंड को देख कर लगाया जा रहा है।  
यदि कुछ दूसरे सूत्रों की मानें तो ग्वालियर और चम्बल में कांग्रेस पार्टी को बढ़त मिलेगी ऐसी भी संभावना है। इसके दो कारण है पहला कारण है कांग्रेस पार्टी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हुई लड़ाई को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था, और अपना सारा ध्यान चम्बल और ग्वालियर पर लगा दिया था। दूसरा कारण वोटिंग का प्रतिशत जो की ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा दिखा, वहीं शहरी क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से कम दिखा जिसको कांग्रेस पार्टी अपने पक्ष में मान रही है।  बम्पर वोटिंग से प्रदेश के कई विश्लेषक भी हैरान दिखे, क्योंकि करोना संक्रमण के चलते सभी को यही उम्मीद थी कि इस बार मतदान का प्रतिशत कम रहेगा।
ये माना जा रहा है कि सांवेर से तुलसी सिलावट जो कि सिंधिया के ख़ास सिपहसालार है वो इस कठिन लड़ाई में अपनी सीट गँवा सकते है, भाजपा के अंदरखाने कि ख़बरें भी यही इशारा कर रही है, दूसरा आश्चर्य इमरती देवी के साथ भी हो सकता है जो कि मतदान के पहले तक जीती हुई मानी जा रही थी।  इधर अनूपपुर से कांग्रेस के प्रत्याशी विश्वनाथ सिंह भी बिसाहूलाल सिंह को उलटफेर  का शिकार बना सकते है जो कि तीसरा आश्चर्य हो सकता है। ग्वालियर पूर्व से कांग्रेस के प्रत्याशी जो कभी भाजपा से भी चुनाव लड़ चुके है मुन्नालाल गोयल को पटकनी दे सकते हैं। निमाड़ से कांग्रेस पार्टी के उत्तम राज सिंह मान्धाता सीट पर नारायण पटेल को कड़ी चुनौती देते हुए जीत का परचम बुलंद कर सकते हैं, वहीं बुरहानपुर से सुमित्रा कास्डेकरजो कि हाल ही में भाजपा में शामिल हुई है अपनी जीत दुहराती हुई दिख रही है। मुंगावली से कन्हैया राम लोधी, सुवासरा से राकेश पाटीदार और ब्यावरा से रामचंद्र दांगी कांग्रेस पार्टी को विजयश्री दिला सकते हंै।  
बहरहाल ये तो तय है कि उपचुनावों के नतीजे भाजपा की सरकार के स्थायित्व पर तो कम से कम कोई प्रश्नचिन्ह लगाते हुए नहीं दिख रहे हैं लेकिन इसके नतीजों के बाद क्या होगा ये देखना दिलचस्प होगा।