डॉक्टर्स, स्टॉफ के हजारों पद रिक्त, मेडिकल कॉलेजों की मान्यता खतरे में, एनॉटामी—फिजोलॉजी पढ़ाने वाला कोई नही, सूर्यप्रताप सिंह की विशेष रिपोर्ट

डॉक्टर्स, स्टॉफ के हजारों पद रिक्त, मेडिकल कॉलेजों की मान्यता खतरे में, एनॉटामी—फिजोलॉजी पढ़ाने वाला कोई नही, सूर्यप्रताप सिंह की विशेष रिपोर्ट
  • सूर्यप्रताप सिंह


रायपुर. एक तरफ पूरा प्रदेश कोरोना महामारी के डर से सहमा हुआ है, मरीज बढ़ते ही जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पताल कई प्रकार की कमियों से जूझ रहे हैं. कहीं पढ़ाने के लिए प्रोफैसर नही हैं तो कहीं पर स्टॉफ की कमी है. हाल यह है कि एमसीआई ने कई कॉलेजों की मान्यता रदद करने की चेतावनी कई बार दे चुकी है.

जानते चलिए कि जुलाई 2019 में दुर्ग की चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने का मामला अभी भी उच्च न्यायालय में अटका हुआ है जिससे करीब 150 छात्रों का सुनहरा भविष्य दांव पर है। इस मामले से सीख न लेते हुए भी प्रदेश के चारों संभाग रायपुर, बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा के मेडिकल कॉलेज संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ के अंतर्गत प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों की स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं और उन पर एमसीआई यानी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की तलवार लटकी हुई है। जिससे कभी भी महाविद्यालयों की मान्यता खत्म होने का खतरा है।

प्रदेश के सभी कॉलेज में स्टाफ की कमी

बात राजधानी के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की करें या अन्य शहरों के विद्यालयों की, सभी जगह मेडिकल स्टाफ की कमी है जिसमें चिकित्सा विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, दंत चिकित्सक और नर्स स्टाफ शामिल हैं। प्रशासन इतना लापरवाह है कि चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज का मामला कोर्ट तक पहुचने के बाद भी वह सतर्क नहीं हुआ। बात रायपुर मेडिकल महाविद्यालय की करें तो यहां चिकित्सा विशेषज्ञ के 79 पद स्वीकृत किए गए थे जिसमें नियमित रूप से 21 पद हैं वहीं 58 पद रिक्त हैं। एमबीबीएस के विदयार्थियों को पहले साल एनॉटामी और फिजोलॉजी पढ़ना होता है मगर इस विषय के प्राध्यापक ही नही हैं.

नहीं हैं चिकित्सा अधिकारी
प्रदेश भर का आंकड़ा देखा जाए तो चिकित्सा विशेषज्ञ के लिए 1593 पद स्वीकृत किए गए थे जिसमें से मात्र 154 नियमित रूप से दर्ज हैं वहीं 45 पदों पर संविदा नियुक्ति की गई है जबकि 1394 पद अब भी खाली हैं। जिनकी भर्ती कब होगी इसका जवाब प्रवंधन के पास नहीं है। हैरानी की बात तो ये है कि राज्य के इतने बड़े-बड़े महाविद्यालयों में चिकित्सा अधिकारी भी मौजूद नहीं हैं और पद रिक्त हैं। प्रदेश भर में 2100 चिकित्सा अधिकारी मेडिकल कॉलेज में स्वीकृत किए गए थे जिनमें से मात्र 1450 पदों पर नियुक्ति हुई जिसमें 167 संविदा नियुक्ति शामिल हैं। वहीं 483 पद अब भी खाली हैं। डेंटिस्ट का भी अभाव प्रदेश में देखा जा रहा है जिससे सभी कॉलेज में 25 पद दंत चिकित्सक के रिक्त हैं।

मान्यता का नियम

जब कोई नया मेडिकल काॅलेज शुरू होता है, तब एमसीआई लगातार पांच साल तक कॉलेज का निरीक्षण करती है। इस दौरान कॉलेज को मान्यता मिलना अनिवार्य है। इसके लिए कुछ मापदंड तय किए गए हैं। उसी के अनुसार स्टाफ और भवन होना चाहिए। मापदंड पूरे नहीं होने पर कॉलेज को एमसीआई से मान्यता नहीं मिल पाती। मान्यता नहीं मिलने पर कॉलेज प्रशासन एमबीबीएस में प्रवेश नहीं दे पाते।

कोरोना के लिए दिया विज्ञापन
असमंजस की बात यह है कि एक ओर जहां मेडिकल कॉलेज स्टाफ की कमी से जूझ रहा है वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड विज्ञापन के माध्यम से शार्ट टेंडर नोटिस निकाल रहा है। जिसमे कोरोना से संवंधित टेंडर का विज्ञापन 6 अप्रैल 2020 को निकाला गया। बात ये आती है कि जब प्रदेश के इतने बड़े महाविद्यालय स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं जिन पर एमआईसी कभी भी मान्यता रद्द करने का आदेश दे सकती है, उसके बावजूद प्रबंधन इतना मौन क्यों है?

ये रहा आंकड़ा
(प्रदेश में कार्यरत विशेषज्ञ व पीजीएमओ की जानकारी)


पैथोलॉजी  28
रेडियोलॉजी 18
ईएनटी 42
सर्जरी 42
स्त्रीरोग 63
शिशुरोग 65
निश्चेतना 35
नेत्ररोग 44
अस्थिरोग 43
मेडिसिन 47

प्रदेश भर में रिक्त पद
चिकित्सा विशेषज्ञ

स्वीकृत पद 1593
नियमित 154
संविदा 45
रिक्त पद 1394

चिकित्सा अधिकारी
स्वीकृत पद 2100
नियमित 1450
संविदा 167
रिक्त पद 483

दंत चिकित्सक
स्वीकृत पद 114
नियमित 74
संविदा 15
रिक्त पद 25


लॉकडाउन के बाद इस मामले पर बात करेंगे

रिक्त पदों का मामला गंभीर है। लॉकडाउन के बाद विभागीय टीम के साथ बैठकर इस मामले पर बातचीत की जाएगी। जल्द ही पदों पर नियुक्ति के बारे में कोई कदम उठाया जाएगा। निहारिका बारिक सिंह, सचिव स्वास्थ्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन