breaking news New

बेहद आर्थिक संकट का सामना कर रहा रेलवे का two व्हीलर पार्किंग

बेहद आर्थिक संकट का सामना कर रहा रेलवे का two व्हीलर  पार्किंग

भाटापारा। कोरोना वायरस  के दस महीने हो गए।  कोरोना के  चलते भाटापारा रेलवे स्टेशन के two  व्हीलर  पार्किंग के ठेकेदारों पर वायरस बेहद भारी पड़ रहा है। मजबूरी में लिया जा रहा लगभग 2 गुना किराया वाहन मालिकों को नाराज तो कर रहा है, लेकिन सिर्फ एक विनम्र प्रार्थना, नाराज मत होईए, मजबूरी समझिए, सहयोग करें। सूने टिकट काउंटर। प्रतीक्षालय की खाली कुर्सियां। 

 चाय-नाश्ता बेचने वाले काउंटरों में लटके ताले। चलती यात्री ट्रेनों के सहारे जीवन की गाड़ी चलाने वाले हर वर्ग को कोरोना ने जोरदार नुकसान पहुंचाया हैं। इसमें अब एक और नाम साइकिल स्टैंड का भी जोड़ लीजिए, क्योंकि यह वर्ग भी भयंकर आर्थिक संकट के साए में आ चुका है। 

बिलासपुर जिले से लेकर राजनांदगांव तक के हर स्टेशन के रेलवे साइकिल स्टैंड सूने हो चुके हैं। संचालक अब परेशान हैं कि ठेके की राशि जमा करने की अवधि तेजी से करीब आ रही है। कैसे यह राशि जमा की जा सकेगी, क्योंकि अवधि खत्म होने में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है।

मार्च के महीने में कोरोना के आतंक के कारण   रेल सेवाएं बंद करने के फैसले ने पार्किंग को तगड़ा झटका दिया। अब दसवें महीने में प्रवेश कर चुका रेलवे का यह फैसला उम्मीदें तोड़ चुका है। इसलिए सीमित संख्या में चल रही यात्री ट्रेनों में आना-जाना कर रहे वाहन मालिकों से बढ़ाकर किराया लिया जाना स्टैंड मालिकों के बीच मजबूरी में लिया गया फैसला माना जा रहा है। 

यात्री ट्रेनों के सहारे यह वर्ग भी अपना और सहयोगी कर्मचारियों के परिवार की गाड़ी चलाता था। ट्रेनों के पहियों पर ब्रेक लगने के बाद परिवार की चलती गाड़ी पर भी ब्रेक लग चुका है। सहयोगियों की रोजी-रोटी चलती रहे, इसे ध्यान में रखकर स्टैंड का किराया बढ़ाना पीड़ादायक फैसला था। आना-जाना कर रहे यात्रियों से बढ़ा हुआ किराया लिए जाने के बाद एवज में सुनने को मिल रहे शब्द नाराज तो करते हैं, लेकिन जवाब के पीछे सिर्फ एक ही एहसास होता है कि आपात स्थितियों में सहयोग दें। हम भी भारी अर्थ संकट का सामना कर रहे हैं।

सूनसान साइकिल स्टैंड में अब साइकिल की संख्या बेहद कम हो चुकी है। जो हैं उनके मालिकों से 5 रुपए की जगह 8 रुपए, बाइक या स्कूटर मालिकों से 6 रुपए की जगह 8 रुपए और चार पहिया वाहन मालिकों से 25 रुपए की जगह 30 या 40 रुपए जैसा किराया पीड़ा तो पहुंचा रहा है। 

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अब रेलवे से खत्म हो रही ठेके की अवधि में कम से कम 1 माह का अतिरिक्त समय दिए जाने की मांग रखने का विचार है।