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बम्लेश्वरी देवी मंदिर में लगा ताला, फिर खुला, रोपवे दुर्घटना में मृत व्यक्ति को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं ग्रामीण, मंदिर ट्रस्ट और नगर पालिका के रोपवे की लड़ाई का नतीजा है यह वाकया

बम्लेश्वरी देवी मंदिर में लगा ताला, फिर खुला, रोपवे दुर्घटना में मृत व्यक्ति को मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं ग्रामीण, मंदिर ट्रस्ट और नगर पालिका के रोपवे की लड़ाई का नतीजा है यह वाकया

डोंगरगढ़. परसों शाम छत्तीसगढ़ की आराध्य देवी माँ बम्लेश्वरी मन्दिर में ऐसा हादसा हुआ, जिसने ट्रस्ट प्रबंधन पर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए। बीती शाम मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन की लापरवाही या यूं कहें कि मजदूरों के पैसे बचाने की लालच के चलते पहाड़ पर स्थित रोपवे की ट्राली गिरने से बड़ा हादसा हुआ, जिससे मजदूर की मौत हो गई। मजदूर की मौत के बाद मृतक के परिजनों व गांव के ग्रामीणों ने आज मन्दिर के गेट में ताला जड़ दिया।

घटना से आक्रोशित ग्रामीण मृतक के परिजनों को पांच लाख रुपए मुआवजे की मांग कर रहे थे। गांव से बड़ी संख्या में पहुंची महिलायें मन्दिर गेट के सामने बैठ गई तथा बम्लेश्वरी ट्रस्ट के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस दल-बल के साथ मंदिर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया गया।

तहसीलदार अविनाश ठाकुर व टीआई एलेक्जेंडर किरो की उपस्थिति में मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ ग्रामीणों की बैठक हुई तथा ट्रस्ट ने मृतक के परिजनों को पांच लाख मुआवजे देने के साथ साथ बीमा की राशि नहीं आने तक प्रति माह 3 हजार रुपये देने की भी घोषणा की तब जाकर कहीं ग्रामीण शांत हुए। स्थिति नियंत्रण में आने के बाद मन्दिर के गेट को आम दर्शनार्थियों के लिए खोला गया।

आरोप है कि धर्मनगरी के नाम से विख्यात मां बम्लेश्वरी देवी के दरबार में पूर्व से नगर पालिका व कलकत्ता की कंपनी की साझेदारी में चल रहे रोपवे को प्रभावित कर स्वयं लाभ कमाने के उद्देश्य से तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को प्रस्ताव बनाकर राशि स्वीकृत कराई गई और एक साल पहले ही वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों इसका लोकार्पण कराया गया। मंदिर ट्रस्ट का रोपवे प्रारंभ होने से नगर पालिका का रोपवे घाटे में चलने लगा और अनुबंध का समय पूरा होने के पूर्व ही यह रोपवे बंद हो गया, जिसका पूरा लाभ मंदिर ट्रस्ट के रोपवे को मिलने लगा लेकिन लाभ अर्जित करने के चक्कर में मंदिर ट्रस्ट सभी नियमों को ताक में रखकर बिना टैक्निकल व मैकनिकल स्टाफ के ही संचालन करने लगा। यही नहीं लाभ कमाने के चक्कर में अब मंदिर ट्रस्ट मजदूरों के पेट में भी लात मारना शुरू कर दिया। इसी का नतीजा बीती शाम देखने को मिला। भारी भरकम लोहे के सामानों को क्षमता से अधिक भरकर ऊपर पहुंचाने का कार्य किया जा रहा था, जिसके कारण यह हादसा हुआ और अब जांच की आड़ में मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है।

चूंकि रोपवे उन दर्शनार्थियों के लिए वरदान है जो विकलांग हैं या फिर बुजुर्ग है और लंबी ऊंची सीढियां नही चढ़ सकते लेकिन बीती शाम हुए हादसे के बाद प्रशासन ने जहाँ एक ओर मामले की जांच के आदेश दिए हैं वहीं दूसरी ओर मंदिर ट्रस्ट के रोपवे का संचालन भी बंद करवा दिया है। कोरोना महामारी के चलते लगभग एक वर्ष से नगर पालिका व कलकत्ता कम्पनी की साझेदारी से चल रहा रोपवे भी बंद हो चुका है। ऐसे में दोनों रोपवे बंद होने से दर्शनार्थियों को माँ के दरबार तक जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। अब देखनी वाली बात यह होगी कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच हो पायेगी क्या वास्तविक दोषियों को सजा मिल पायेगी और कितनी जल्दी यह जांच कार्यवाही का अमलीजामा पहन पाती हैं।

इस मामले में एसडीएम अविनाश भोई ने कहा कि बीती शाम रोपवे ट्राली के टूटने से उस पर सवार एक कर्मचारी की मौत हुई है जिसकी जांच शुरू कर दी गई है और जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक रोपवे का संचालन बंद कर दिया गया है, जांच के बाद दोषियों पर कार्यवाही की जायेगी।

थाना प्रभारी एलेक्जेंडर किरो ने कहा कि अभी मामले को विवेचना में लिया गया है विवेचना में जो तथ्य सामने आयेंगे उसके आधार पर मामला दर्ज किया जायेगा और आगे की कार्यवाही की जायेगी मंत्री मन्दिर ट्रस्ट नवनीत तिवारी ने कहा कि रोपवे की ट्रॉली कैसे टूट कर नीचे गिरी यह जांच का विषय है फिलहाल मृतक के परिजनों की मुआवजे की मांग पूरी कर दी गई है परिजनों को पांच लाख रुपये का मुआवजा दिया जायेगा साथ ही 3 हजार रुपये प्रति माह देने की बात कही गई। मंत्री नवनीत तिवारी ने फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना रोपवे के संचालन की बात से इंकार करते हुए सभी टैक्निकल प्रकिया पूरी करने के बाद रोपवे का संचालन करने की बात कही।