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साउथ में बस्तरिहा इमली की धूम, केशकाल ने दी सभी को मात

साउथ में बस्तरिहा इमली की धूम, केशकाल ने दी सभी को मात

 तेजी का संकेत देते भविष्य ने इमली की डिमांड और कीमत, दोनों बढ़ा दी है। उपभोक्ता राज्यों की खरीदी और स्टॉकिस्टों की जोरदार लिवाली के बाद इमली ने सीजन की शुरुआत में ही 3400 से 3500 रुपए क्विंटल की कीमत अपने नाम दर्ज करवा ली है। यह तेजी आने वाले दिनों में और बढ़त ले सकती है।

वनोपज की बढ़ती कीमतों ने संग्राहकों को खुश कर दिया है तो बाजार इस तेजी से परेशान नजर आने लगा है। उपभोक्ता राज्यों को यह तेजी हलाकान करने लगी है क्योंकि हर सुबह, नई दर लेकर बाजार पहुंच रही है। भरपूर उत्पादन के बीच भाव टूटने थे, थोक बाजार की यह सोच, अब धारशायी होती नजर आ रही है क्योंकि इमली में अब स्टॉकिस्टों की खरीदारी चालू हो चुकी है। इसमें भी केशकाल की इमली को मनचाही कीमत मिल रही है, यह इसलिए क्योंकि चाही जा रही गुणवत्ता के मानक पर केशकाल खरा उतर रहा है।

मौसम की मेहरबानी

इस बार वैसे तो मौसम ने पूरे प्रदेश को राहत दी लेकिन बस्तर पर उसने जैसी मेहरबानी दिखाई, उसके बाद हर वनोपज, उत्पादन और कीमत में नया कीर्तिमान बना रहा है। चरोटा, बावची, महुआ, सालबीज के बाद अब नंबर है इमली का, जिसकी फसल इस बरस उत्पादन में अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ सकती है। बस्तर के हर क्षेत्र से पहुंच रही इमली को सबसे पहले ग्राहक मिल रहे हैं।

केशकाल इसलिए अव्वल

वनोपज में केशकाल की इमली हमेशा से सभी पर भारी रही है। इस बार भी यह अपनी मानक गुणवत्ता के दम पर 3500 रुपए की नई कीमत अपने नाम दर्ज करवा ली है। इमली फूल भी पहली बार 5000 से 6000 रुपए क्विंटल की दर पर ली जा रही है। यह कीमत भी हैरत में डाल रही है क्योंकि इसके पहले तक कभी भी, इमली फूल इस कीमत पर कभी नहीं बिका।

उत्पादन तोड़ेगा रिकॉर्ड

बस्तर के जंगलों की मेहरबानी से दक्षिण भारत और स्टॉकिस्टों को इस बार रिकॉर्ड 1000 टन इमली मिलने की संभावना है। यह 20 फ़ीसदी बढ़त के बाद सामने आ रहा आंकड़ा है। इसके बावजूद, कीमतें और आगे बढ़ने की पूरी संभावना है क्योंकि घरेलू मांग के अलावा बाहर की भी मांग का दबाव हर रोज बढ़ रहा है। समय रहते अच्छी कीमत का लाभ, संग्राहकों को मिले इसके लिए अब जशपुर और सरगुजा से संपर्क साधा जा रहा है।

एसपी इंडस्ट्रीज, रायपुर के संचालक सुभाष अग्रवाल ने कहा कि इमली की नई फसल आने लगी है। इसमें साउथ और स्टॉकिस्टों की मांग निकली हुई है। मांग का दबाव बस्तर के उत्पादन पर ज्यादा देखा जा रहा है।