अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई और बेजा कब्जा हटाने चौथे दिन भी जारी रही ग्रामीणों की हड़ताल

अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई और बेजा कब्जा हटाने चौथे दिन भी जारी रही ग्रामीणों की हड़ताल


हड़ताल पर सवाल उठाने वालों के विरुद्ध लामबंद हुए आंदोलनकारी...अपनाया कड़ा रुख
 
कहा- अधिकारी नेता और माफिया दलाली बंद करें..

भैयाथान सूरजपुर, 15 अक्टूबर। जिले के भैयाथान तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत जूर में गांव के कुछ बेजा कब्जा धारियों  द्वारा ग्राम विकास हेतु सुरक्षित रखी गई शासकीय भूमि पर जबरन कब्जा कर खेत, बाड़ी और मकान बना लिए जाने से उपजा असंतोष अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों द्वारा बेजा कब्जा की जमीन को खाली कराने हेतु 3 दिन पूर्व जारी की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल आज चौथे दिन की जारी रखी और इस हड़ताल पर सवालिया निशान लगाने वालों को भी ग्रामीणों ने जमकर आड़े हाथों लिया।

विदित हो कि ग्राम पंचायत जूर के कुछ ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से शासकीय गोचर मद की भूमि पर अतिक्रमण कर घर बना लिया है और खेत बना कर कृषि कार्य भी किया जा रहा हैं। ग्रामवासी विगत कई वर्षों से इस बहू उपयोगी जमीन को अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराने  की मांग शासन प्रशासन से करते आ रहे हैं लेकिन नतीजा आज तक सिफर रहा। 

गौरतलब है कि बेजा कब्जा करने वाले लोग अधिकारी कर्मचारियों और तथाकथित नेताओं और पत्रकारों को अपने पक्ष में कर इस शासकीय भूमि को कूट रचित दस्तावेज के सहारे अभिलेखों में भी इंद्राज करा लिए हैं। ग्रामीण जनप्रतिनिधियों एवं आंदोलनकारी ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर्ता ग्रामीणों के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए 4 दिन पूर्व जो आंदोलन शुरू किया वह अनवरत आज भी जारी रखा है।

हड़ताल पर सवाल उठाने वालों को लिया आड़े हाथ और आंदोलनकारियों ने किया आक्रामक रूख

मानसून और कोविड-19 के कारण उत्पन्न माहौल के साथ-साथ उच्च न्यायालय के द्वारा जारी दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए स्थानीय प्रशासन ने अपनी मजबूरियां गिनाई और कब्जे की भूमि पर लगाई गई फसल को जप्त करने की कार्रवाई करने का आश्वासन देते हुए प्रशासन ने आंदोलनकारी ग्रामीणों वह जनप्रतिनिधियों को हड़ताल समाप्त करने की समझाइश दी, लेकिन इसी बीच ग्रामीण जनप्रतिनिधियों एवं आंदोलनकारियों की इस हड़ताल पर सवाल उठाकर कुछ लोगों ने इस आंदोलन को और अधिक आक्रामक बना दिया परिणाम स्वरूप आंदोलनकारी ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में है और वे चाहते हैं कि ग्राम विकास हेतु आरक्षित उक्त भूमि पर से समूल कब्जा हटाकर उक्त भूमि पूरी तरह से ग्राम पंचायत और शासन के कब्जे में हो।

प्रशासन ने गठित की 3 सदस्य टीम

ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और आंदोलनकारियों के अड़ियल रुख को देखते हुए प्रशासन ने 3 सदस्यीय टीम का गठन भी कर दिया है जो संपूर्ण मामले में समाधान का रास्ता निकालेंगे और आंदोलनकारियों की मंशा के अनुरूप ग्राम पंचायत और शासन की जमीन को खाली कराने हेतु अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे 3 सदस्यीय टीम में।